रॉटरडैम (नीदरलैंड्स)।हॉकी के मैदान से एक ऐसी खबर आई जिसने हर भारतीय खेल प्रेमी का दिल तोड़ दिया, लेकिन साथ ही टीम के गजब के जज्बे पर गर्व करने का मौका भी दिया। एफआईएच प्रो लीग के यूरोपीय चरण में भारत और विश्व चैंपियन जर्मनी के बीच एक ऐसा मुकाबला खेला गया, जिसने आखिरी सेकेंड तक देखने वालों की सांसें अटकाए रखीं। मुकाबला इतना टक्कर का था कि लग रहा था मैच बराबरी पर छूटेगा, पर ऐन वक्त पर किस्मत जर्मनी के साथ चली गई और भारत को 1-2 से यह मैच गंवाना पड़ा। मैदान पर दोनों टीमों ने जिस ऊंचे स्तर की हॉकी खेली, उसने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
शुरुआत से ही दोनों टीमें थीं आमने-सामने
मैच की सीटी बजते ही दोनों टीमों ने आक्रामक तेवर अपना लिए थे। पहले क्वार्टर में भारतीय फॉरवर्ड लाइन ने गेंद पर गजब का कंट्रोल दिखाया और जर्मन डिफेंडर्स को काफी छकाया। जवाब में जर्मनी ने भी पलटवार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और भारतीय गोलपोस्ट पर लगातार धावे बोले। दोनों तरफ से गोल करने के कुछ अच्छे मौके बने, लेकिन पहले 15 मिनट में कोई भी टीम खाता नहीं खोल सकी।दूसरे क्वार्टर में जर्मन टीम ने अपने तगड़े तजुर्बे का पूरा फायदा उठाया और भारतीय डिफेंस में थोड़ी सी ढील पाते ही गोल दागकर 1-0 की बढ़त बना ली। इसके बाद तो उन्होंने हमलों की झड़ी लगा दी थी, पर दाद देनी होगी हमारे गोलकीपर और डिफेंडर्स की, जिन्होंने दीवार बनकर जर्मनी को दूसरा गोल नहीं करने दिया। हाफ टाइम तक स्कोर जर्मनी के पक्ष में 1-0 ही रहा।
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तीसरे क्वार्टर में भारत की धमाकेदार वापसी
हाफ टाइम के बाद जब भारतीय टीम मैदान पर लौटी, तो लड़कों के तेवर बिल्कुल बदले हुए थे। साफ दिख रहा था कि ड्रेसिंग रूम में कोच से कोई खास गुरुमंत्र मिल चुका है। तीसरे क्वार्टर में भारत ने ऐसा आक्रामक खेल दिखाया कि जर्मनी की मजबूत टीम भी बैकफुट पर आ गई। लगातार हमलों का नतीजा यह हुआ कि भारत ने एक बेहद शानदार गोल दागकर स्कोर 1-1 की बराबरी पर ला खड़ा किया।इस गोल के बाद मैच का रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया। कप्तान हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई में मिडफील्डर्स ने ऐसा तालमेल बिठाया कि जर्मन खिलाड़ी बस देखते रह गए। उस वक्त तो भारतीय फैंस की उम्मीदें इतनी बढ़ गई थीं कि लगने लगा था टीम इंडिया आज एक और बड़ा उलटफेर करने वाली है।

आखिरी मिनट का वो एक टर्निंग पॉइंट
चौथा क्वार्टर आते-आते मैच किसी सस्पेंस फिल्म जैसा हो गया था। दोनों टीमें जीत के लिए अपनी पूरी जान लगाने को तैयार थीं। भारत को भी एकाध मौके मिले, पर फिनिशिंग लाइन पार नहीं हो सकी। जब सब मान चुके थे कि मैच ड्रॉ की तरफ बढ़ रहा है और दोनों टीमों को एक-एक अंक मिलेगा, ठीक तभी आखिरी मिनट में जर्मनी ने एक तेज काउंटर-अटैक किया और एक ऐसा गोल दागा जिसने भारतीय खेमे को सन्न कर दिया। इसके बाद संभलने का वक्त ही नहीं बचा था और जर्मनी ने 2-1 से बाजी मार ली।याद दिला दें कि ठीक एक दिन पहले इसी मैदान पर भारत ने जर्मनी को 3-1 से पटखनी दी थी। वर्ल्ड चैंपियन को उनके घर के पास हराना कोई छोटी बात नहीं है, इसीलिए इस दूसरे मैच से भी प्रशंसकों को बहुत ज्यादा उम्मीदें थीं।
मनप्रीत सिंह का नया कीर्तिमान और हार के सकारात्मक संकेत
हार के दुख के बीच भारतीय हॉकी के लिए एक बेहद गर्व का पल भी इस सीरीज में आया। हमारे सबसे सीनियर खिलाड़ी मनप्रीत सिंह अब भारत के लिए सबसे ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेलने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। मैदान पर उनका होना ही युवाओं में एक अलग जोश भर देता है और उनका यह लंबा सफर आज के युवा खिलाड़ियों के लिए किसी बड़ी सीख से कम नहीं है।भले ही स्कोरबोर्ड पर हम हार गए, लेकिन इस मैच ने साफ कर दिया कि भारतीय हॉकी अब पूरी तरह बदल चुकी है। जर्मनी जैसी दुनिया की नंबर वन टीम के सामने लगातार दो मैचों में ऐसी बराबरी की टक्कर देना कोई मजाक नहीं है। जाहिर है कि कोचिंग स्टाफ आखिरी मिनटों की इन छोटी-मोटी गलतियों पर काम करेगा। प्रो लीग के ये मुकाबले असल में आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स का रिहर्सल हैं, और टीम इंडिया ने दिखा दिया है कि वह दुनिया की किसी भी टीम की आंख में आंख डालकर खेल सकती है।







