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मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो सेरी अनवर इब्राहिम के न्योते पर दो दिन के दौरे पर गए PM नरेंद्र मोदी

मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो सेरी अनवर इब्राहिम के न्योते पर दो दिन के दौरे पर गए PM नरेंद्र मोदी
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 7, 2026 1:28 अपराह्न
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 7-8 फरवरी 2026 को होने वाली मलेशिया यात्रा न केवल कूटनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को एक नई ऊंचाई देने वाला कदम भी है। मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो सेरी अनवर इब्राहिम के निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा पिछले आठ वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा है।

यात्रा का संदर्भ –  आठ साल का अंतराल और नया अध्याय

प्रधानमंत्री मोदी पिछली बार 2018 में एक संक्षिप्त दौरे पर मलेशिया गए थे, लेकिन एक पूर्ण आधिकारिक द्विपक्षीय दौरा 2015 के बाद अब हो रहा है। बीच के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में कुछ उतार-चढ़ाव आए थे, विशेषकर पूर्व प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद के कार्यकाल के दौरान। हालांकि, 2022 में अनवर इब्राहिम के सत्ता में आने के बाद से रिश्तों में जमी बर्फ पिघलनी शुरू हुई। अगस्त 2024 में अनवर इब्राहिम की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर पर पहुँचाया था। पीएम मोदी की यह यात्रा उसी साझेदारी को जमीन पर उतारने की एक कोशिश है।

प्रधानमंत्री मोदी के मलेशिया दौरे के मुख्य कारण

यह यात्रा केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे रणनीतिक और आर्थिक कारण हैं

  • रणनीतिक संतुलन – भारत मलेशिया को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी मानता है। चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच मलेशिया जैसे देशों के साथ मजबूत सैन्य और रणनीतिक संबंध भारत के लिए अनिवार्य हैं।
  • आसियान (ASEAN) में भूमिका – मलेशिया आसियान का संस्थापक सदस्य है और 2025 में इसकी अध्यक्षता भी कर रहा है। भारत के लिए आसियान देशों के साथ जुड़ाव बढ़ाने का यह सबसे सही समय है।
  • आर्थिक हित – मलेशिया भारत का 13वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 20 अरब डॉलर तक पहुँच गया है, जिसे और बढ़ाने की क्षमता है।
  • प्रवासी भारतीयों से जुड़ाव –  मलेशिया में लगभग 29 लाख भारतीय मूल के लोग (Diaspora) रहते हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था और राजनीति में बड़ा प्रभाव रखते हैं।

किन विषयों पर होगी मुख्य चर्चा?

दोनों नेताओं के बीच होने वाली वार्ता के केंद्र में निम्नलिखित बिंदु रहने की संभावना है-

  • सेमीकंडक्टर और तकनीक –.मलेशिया दुनिया के सेमीकंडक्टर हब के रूप में उभर रहा है। भारत अपने ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ के लिए मलेशिया से तकनीकी सहयोग और निवेश चाहता है।
  • रक्षा सहयोग –  भारत अपने स्वदेशी रक्षा उपकरणों, जैसे तेजस (LCA) और डोर्नियर विमान, के लिए मलेशिया को एक संभावित खरीदार के रूप में देखता है। इसके अलावा, मलेशिया की ‘स्कॉर्पीन पनडुब्बियों’ के रखरखाव और ‘सुखोई-30’ विमानों के अपग्रेडेशन पर भी चर्चा हो सकती है।
  • डिजिटल भुगतान –  भारत के UPI को मलेशिया के PayNet के साथ जोड़ने पर बातचीत अंतिम चरण में है, जिससे दोनों देशों के बीच लेनदेन बेहद आसान हो जाएगा।
  • खाद्य सुरक्षा और पाम ऑयल –  भारत मलेशिया से भारी मात्रा में पाम ऑयल आयात करता है। आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर रखने और व्यापार घाटे को संतुलित करने पर गंभीर चर्चा होगी।
  • ऊर्जा सुरक्षा –  नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाओं को तलाशा जाएगा।

संभावित समझौते और हस्ताक्षर (Expected MoUse)

यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है-

  • डिजिटल अर्थव्यवस्था  –  UPI और PayNet के बीच कनेक्टिविटी का औपचारिक समझौता। 
  • सेमीकंडक्टर  –  चिप निर्माण और अनुसंधान एवं विकास (R&D) में सहयोग। 
  • रक्षा  –  सैन्य रसद (Logistics) और उपकरणों के रखरखाव हेतु समझौता। 
  • श्रम एवं रोजगार  –  भारतीय श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और सुरक्षित प्रवासन (Migration) के लिए नए मानक। 
  • शिक्षा – आईआईटी दिल्ली के परिसर की तरह किसी प्रमुख भारतीय संस्थान की शाखा मलेशिया में खोलने पर चर्चा। 

विशेष कार्यक्रम – ‘सेलामत दातंग मोदी जी’

प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत मलेशिया में बेहद भव्य तरीके से किया जा रहा है।

  • सांस्कृतिक रिकॉर्ड –  कुआलालंपुर में लगभग 800 कलाकार एक साथ पारंपरिक नृत्य पेश करेंगे, जिसे ‘मलेशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज कराने की योजना है।
  • कम्युनिटी एड्रेस –  प्रधानमंत्री मोदी कुआलालंपुर के ‘माइंस इंटरनेशनल एग्जीबिशन सेंटर’ में करीब 15,000 प्रवासी भारतीयों को संबोधित करेंगे।

चुनौतियां और अनसुलझे मुद्दे

रिश्तों में सुधार के बावजूद, कुछ संवेदनशील मुद्दे अभी भी मेज पर हैं

  • जाकिर नाइक का मुद्दा –  भारत लंबे समय से विवादास्पद उपदेशक जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। उम्मीद है कि पीएम मोदी इस मुद्दे को फिर से उठाएंगे।
  • क्षेत्रीय सुरक्षा –  दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के दृष्टिकोण में सामंजस्य बिठाना एक कूटनीतिक चुनौती होगी।

प्रधानमंत्री मोदी की यह मलेशिया यात्रा ‘विशाल भारत’ और ‘मलेशिया मदनी’ (Anwar Ibrahim का विजन) के बीच एक सेतु का काम करेगी। यह न केवल व्यापार और सुरक्षा के नए रास्ते खोलेगी, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी दोनों देशों को करीब लाएगी।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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