न्यूट्रॉन स्टार (Neutron Star) ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमय और सघन (dense) पिंडों में से एक है। इसका घनत्व इतना अधिक होता है कि इसके मात्र एक चम्मच पदार्थ का वजन माउंट एवरेस्ट (लगभग 161 अरब टन) के बराबर हो सकता है।
न्यूट्रॉन स्टार क्या है?
जब एक विशाल तारा (हमारे सूर्य से 10 से 25 गुना बड़ा) अपने जीवन के अंत में पहुँचता है, तो वह एक भयंकर विस्फोट के साथ समाप्त होता है जिसे सुपरनोवा कहते हैं। इस विस्फोट के बाद तारे का जो हिस्सा बच जाता है, वह गुरुत्वाकर्षण के कारण अंदर की ओर ढह जाता है। यदि बचा हुआ हिस्सा बहुत भारी है, तो वह ‘न्यूट्रॉन स्टार’ बन जाता है।
एक चम्मच का वजन इतना क्यों होता है?
इसे समझने के लिए हमें परमाणु (Atom) के स्तर पर जाना होगा।
खाली जगह का खत्म होना – साधारण पदार्थ में, परमाणु का अधिकांश हिस्सा खाली होता है। इलेक्ट्रॉन नाभिक (Nucleus) से बहुत दूर चक्कर लगाते हैं।
अत्यधिक संपीड़न (Compression) – न्यूट्रॉन स्टार के बनने के दौरान, गुरुत्वाकर्षण इतना शक्तिशाली होता है कि वह इलेक्ट्रॉनों को प्रोटॉन के अंदर धकेल देता है। इससे वे आपस में मिलकर न्यूट्रॉन बन जाते हैं।
परमाणु का ढहना – परमाणु के बीच की सारी खाली जगह खत्म हो जाती है। यह वैसा ही है जैसे आप पूरे पृथ्वी के सारे इंसानों को एक चीनी के क्यूब (Sugar cube) में समा दें।
इस प्रक्रिया के कारण, न्यूट्रॉन स्टार का घनत्व पानी के घनत्व से लगभग 10^{14} गुना अधिक हो जाता है।
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वजन की तुलना – एक चम्मच बनाम माउंट एवरेस्ट
यदि आप न्यूट्रॉन स्टार की सतह से एक चम्मच (लगभग 5 मिलीलीटर) पदार्थ निकाल सकें, तो उसका द्रव्यमान लगभग 900 अरब किलोग्राम से 1 ट्रिलियन किलोग्राम के बीच होगा।
| विशेषता | विवरण |
| आकार | एक बड़े शहर के बराबर (लगभग 20 किमी व्यास) |
| द्रव्यमान | सूर्य से 1.4 से 2 गुना अधिक |
| घनत्व | 10^{17} kg – m³ |
| गुरुत्वाकर्षण | पृथ्वी से 200 अरब गुना अधिक |
न्यूट्रॉन स्टार की मुख्य विशेषताएं
अत्यधिक चुंबकीय क्षेत्र – इनका चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी से खरबों गुना शक्तिशाली होता है। इन्हें ‘मैग्नेटर’ भी कहा जाता है।
तेज घूर्णन (Rotation) – कुछ न्यूट्रॉन स्टार अपनी धुरी पर एक सेकंड में सैकड़ों बार घूमते हैं, जिन्हें ‘पल्सर’ (Pulsars) कहा जाता है।
पलायन वेग (Escape Velocity) – यहाँ से बाहर निकलने के लिए आपको प्रकाश की गति की लगभग आधी गति (1,50,000 किमी – सेकंड) से यात्रा करनी होगी।
यह वजन इतना क्यों है? (वैज्ञानिक कारण)
इसका असली कारण पाउली अपवर्जन सिद्धांत (Pauli Exclusion Principle) है। जब गुरुत्वाकर्षण तारे को छोटा करने की कोशिश करता है, तो न्यूट्रॉन एक-दूसरे के बहुत करीब आ जाते हैं। वे एक-दूसरे से दूर रहने के लिए एक दबाव पैदा करते हैं जिसे “न्यूट्रॉन डिजेनरेसी प्रेशर” कहा जाता है। यही दबाव तारे को पूरी तरह ब्लैक होल बनने से रोकता है और उसे दुनिया का सबसे सघन पदार्थ बना देता है।
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