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क्या कहा गया है —आसिम मुनीर और पाकिस्तानी सेना की नई कमान

आसिम मुनीर
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 6, 2025 11:10 पूर्वाह्न
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आज (2025) पाकिस्तान संसद द्वारा पारित 27वीं संवैधानिक संशोधन के बाद आसिम मुनीर को देश का पहला Chief of Defence Forces (CDF) नियुक्त किया गया — अब उनके हाथ में सिर्फ सेना (Army) ही नहीं, बल्कि नौसेना (Navy), वायु सेना (Air Force) और परमाणु हथियारों की कमान भी है।

कई पाकिस्तानी अखबारों ने यह कहा है कि इस नियुक्ति के साथ मुनीर “पाकिस्तान के अब तक के सबसे ताकतवर सैन्य अधिकारी” बन गए हैं।

“अब आगे बढ़ेगा पाकिस्तान” — क्या उम्मीदें जताई गईं

मुनीर ने हाल ही में कहा है कि वे पाकिस्तान को “आगे बढ़ने वाला” देश मानते हैं — उन्होंने देश की क्षमताओं, खासकर खनिज संसाधन (जैसे रेको-दिक़ खनन) और आर्थिक संभावनाओं का उल्लेख किया है।

आसिम मुनीर और पाकिस्तानी सेना

साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि उनका मकसद किसी राजनीतिक पद की चाह नहीं, बल्कि देश की रक्षा करना है। उन्होंने मीडिया से कहा है, “भगवान ने मुझे इस देश का रक्षक बनाया है, मुझे किसी और पद की चाहत नहीं”।

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विश्लेषकों की राय — क्या हो सकते हैं असर

विशेषज्ञों का कहना है कि मुनीर की शक्ति बढ़ने का मतलब है कि पाकिस्तान का सैन्य नियंत्रण और सेंट्रलाइज़ेशन (केंद्रीकरण) और मजबूत हुआ है — तीनों सेनाओं और परमाणु हथियारों का नियंत्रण एक हाथ में आने से, सैन्य-सियासी असर बढ़ सकता है। हालांकि, आलोचक यह भी कहते हैं कि इतनी शक्ति के साथ लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर पड़ सकती हैं, क्योंकि अब सेना का दबदबा और बढ़ गया है।

पड़ोसी देश और क्षेत्रीय सुरक्षा भारत सहित प्रतिक्रियाएँ

मुनीर ने हाल ही में अपने एक बयान में कहा था कि “नाभिकीय (nuclear) वातावरण में युद्ध की कोई जगह नहीं” — लेकिन साथ ही यह भी चेतावनी दी कि यदि किसी तरह की सैन्य कार्रवाई हुई, तो पाकिस्तान निर्णायक जवाब देने के लिए तैयार है। इस कारण, भारत समेत अन्य पड़ोसी देशों में चिंता है कि पाकिस्तान की सैन्य ताकत और परमाणु नियंत्रण एक ही व्यक्ति के हाथ में आने से तनाव बढ़ सकता है।

पाकिस्तान के लिए “आगे बढ़ने” की चुनौतियाँ — क्या मुनीर की कमान काम आएगी?

पाकिस्तान आर्थिक संकट, आबादी, आतंकवाद, सामाजिक अस्थिरता जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। केवल सैन्य शक्ति मजबूत होने से इन समस्याओं का हल नहीं हो सकता। कईों का कहना है कि सेना अपनी सीमाओं में रहे — आर्थिक, शिक्षा, स्वास्थ्य सुधार में नागरिक सिस्टम मजबूत हो।
विपक्षी नेताओं व सियासी दलों का कहना है कि सेना का इतना केंद्रीकरण लोकतंत्र के लिए खतरनाक हो सकता है। अगर राजनीतिक नियंत्रण कमजोर हुआ, तो भविष्य में नागरिक अधिकारों व मौलिक संस्थाओं को खतरा हो सकता है।

नज़रिया — “आगे बढ़ने” की राह या सैन्य नियंत्रण का विस्तार?

आसिम मुनीर की नई स्थिति पाकिस्तान के लिए एक नया मोड़ है: यदि वे सिर्फ “रक्षा और सुरक्षा” तक सीमित रहें — आतंकवाद, सीमा सुरक्षा, आतंक-संगठनों के खात्मे पर ध्यान दें — तो उनकी स्थिति में सुधार हो सकता है।

लेकिन अगर सैन्य सत्ता नागरिक शासन पर हावी हुई न्यायपालिका, मीडिया, नागरिक आज़ादियाँ कमजोर हुई, तो यह “पाकिस्तान का आगे बढ़ना” नहीं, बल्कि “सैन्य अधिनायकवाद” की दिशा हो सकती है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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