दिसंबर 2024 में Bashar al-Assad के शासन के पतन के एक साल बाद, युद्धग्रस्त Syria (सीरिया) में कई शरणार्थियों ने अपने देश लौटने की शुरुआत की थी — लेकिन अब यह शरणार्थी वापसी धीमी पड़ गयी है। वैश्विक वित्तीय सहायता में भारी कमी के कारण लौटने की प्रवृत्ति सुस्त हो रही है, और शरणार्थी-वापसी के प्रयासों को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति न सिर्फ शरणार्थियों के लिए, बल्कि सीरिया के पुनर्निर्माण और स्थिरता की दिशा में एक बड़ी चिंता बन चुकी है।

शरणार्थी वापसी: शुरुआत में उजली उम्मीदें
बीते कुछ महीनों में, सात साल के गृहयुद्ध और विस्थापन के बाद लाखों सीरियाई नागरिकों ने अपने वतन लौटने की सोची थी। रिपोर्ट के अनुसार, असद शासन के गिरने के बाद 1.2 मिलियन शरणार्थी और 1.9 मिलियन आंतरिक विस्थापित लोग (internally displaced persons, IDPs) वापसी कर चुके हैं। कुल मिलाकर 3 मिलियन से अधिक लोगों ने अपने घरों की ओर कदम बढ़ाया।
कई लोगों के लिए यह एक नई शुरुआत की आशा थी — जिन्होंने वर्षों तक संघर्ष, विस्थापन, शरणार्थी-शिविरों और अनिश्चित भविष्य के बीच जीवन जिया था। यूरोप, जॉर्डन, लेबनान, तुर्की जैसे देशों में बसे शरणार्थियों में से कुछ ने वापसी की, जबकि देश के भीतर विस्थापित लोगों ने भी अपने पूर्व गृह इलाकों की ओर लौटने की कोशिश की।
वापसी धीमी क्यों हुई? — दान कम, बुनियादी सुविधाएँ अधूरी
लेकिन इस वापसी के सिलसिले में अब बड़ी रुकावटें आ रही हैं। प्रमुख कारणों में से एक है — अंतरराष्ट्रीय सहायता और दान में कटौती। 2025 में, सीरिया के लिए मानवीय प्रतिक्रिया (humanitarian response) केवल 29% फंडिंग मिली है। इससे बुनियादी पुनर्निर्माण, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, अस्थायी घरों, और अविस्फोटित बमों/माइन सफाई जैसी पहलों पर असर पड़ा है।
स्वास्थ्य सेवाएँ, अस्पताल, वैक्सीनेशन — सब प्रभावित हुए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पतालों में से सिर्फ 58% ही पूरी तरह कार्यरत हैं, और कई में बिजली-वाटर की कमी है, जिससे ठंड, दवाओं की कमी, और अन्य स्वास्थ्य खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा, युद्ध के दौरान छोड़े गए विस्फोटक (unexploded ordnance) और माइन सफाई भी अधूरी है — यह कदम बहुत धीमी गति से हो रहा है। पिछले साल माइन विस्फोटों और अविस्फोटित हथियारों की वजह से 1,500 से अधिक लोगों की मौत या घायल होने की घटनाएँ हुईं। यह स्थिति यह दिखाती है कि लौटे हुए लोग अभी भी असुरक्षित वातावरण में वापस आ रहे हैं।
कुल मिलाकर, यह साफ है कि सिर्फ सुरक्षा सुधारने भर से काम नहीं चलेगा — अगर बुनियादी पुनर्निर्माण, सामाजिक सुविधाएँ, स्वास्थ्य, स्कूल, रोज़गार, और पुनःस्थापना (rehabilitation) नहीं हुई, तो वापसी स्थायी नहीं रहेगी।
डर, अनिश्चितता और असमंजस: शरणार्थियों का मनो-मानस
शरणार्थी, जो पिछले दशक से संघर्ष, विस्थापन और अस्थिरता का सामना कर रहे थे, वापस लौट रहे हैं — लेकिन लौटने वाले कई परिवारों में अब डर और अनिश्चयता है।
- कई युवा, खासकर वे जो विदेश या अन्य देशों में बड़े हुए हैं, कह रहे हैं कि उन्हें वहां जीवन, रोजगार और स्थिरता मिली थी, इसलिए वापस लौटना जीवन-लय में उतार-चढ़ाव लेकर आएगा।
- महिलाएँ और बच्चों वाले परिवार भी लौटने में हिचकिचा रहे हैं — कारण है सुरक्षा का अभाव, सीमित सुविधाएँ, स्कूलों की अनिश्चितता और रोज़गार की कमी।
- कुछ परिवारों ने बताया है कि उन्होंने अपने गांवों या शहरों को छोड़कर बस थे, उनका घर नष्ट हो चुका है, या उनकी जमीन-जायदाद पर कब्जा हो चुका है — ऐसे में लौटकर वे फिर से शुरुआत की स्थिति में खड़े हैं।
इन स्थितियों में, अगर उन्हें पर्याप्त सहायता न मिले, तो संभव है कि कई लोग दोबारा पलायन करना चाहें — कुछ विशेषज्ञों ने यही “रिवर्स प्रवाह” (reversal) की चिंता जताई है।
You may also read- Border Crisis — थाईलैंड–कंबोडिया सीमा पर हिंसक उड़ानें, तनाव फिर चरम पर
क्या लौटना सुरक्षित है — हालत अभी अस्थिर
जहाँ एक ओर सीरिया कुछ इलाकों में शांति और स्थिरता की ओर बढ़ रहा है, वहीं सुरक्षा, बुनियादी सुविधाएँ, स्वास्थ्य, शिक्षा व रोज़गार जैसी चुनौतियाँ अभी बरकरार हैं।
- स्वास्थ्य प्रणाली अधूरी है, कई अस्पताल पूर्ण रूप से काम नहीं कर रहे।
- माइन व विस्फोटक अवशेषों की सफाई अर्ध-पूर्ण है।
- पुनर्निर्माण धीमा है; कई घर – अधूरे, कई इंफ्रास्ट्रक्चर — टूटी-फूटी।
- ज़मीन, रोजगार, शिक्षा — इन सब में अनिश्चितता है।
ऐसे में, शरणार्थियों के लिए लौटना कोई “पूर्ण सुरक्षा” नहीं है, बल्कि नई चुनौतियाँ आगे भी बनी हुई हैं।
आगे क्या चाहिए: अंतरराष्ट्रीय ध्यान और स्थायी प्रयास
अगर सीरिया में स्थायी पुनर्निर्माण और स्थिरता चाहिए, तो सिर्फ शरणार्थियों को वापस भेजना पर्याप्त नहीं — व्यापक, सुविचारित और दीर्घकालिक प्रयासों की जरूरत है:
- अंतरराष्ट्रीय दाताओं द्वारा मदद; पुनर्निर्माण और बुनियादी सुविधाओं के लिए पर्याप्त फंडिंग।
- स्वच्छ पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली-पानी, पुनर्निर्माण (रिहैबिलिटेशन) जैसे बुनियादी ढांचे मजबूत करना।
- विस्फोटक अवशेषों की सफाई, सुरक्षा व पुनरावलोकन।
- आर्थिक अवसर, रोजगार सृजन, सामाजिक पुनर्संयोजन।
- मानसिक व सामुदायिक समर्थन — युद्ध के शिकार युवाओं, महिलाओं, बच्चों के लिए पुनर्वास, स्कूल, रोजगार व सामाजिक सुरक्षा।
इतना ही नहीं — अंतरराष्ट्रीय समुदाय, NGOs, मानवाधिकार संगठन, और देश की सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि पुनर्रद्धार (recovery) सिर्फ अस्थायी राहत न बने, बल्कि दीर्घकालिक स्थिरता व विकास की दिशा में हो।
निष्कर्ष — “वापसी” पर नहीं, “पुनर्निर्माण” पर ध्यान
सीरिया में शरणार्थियों की वापसी शुरू हुई — यह एक सकारात्मक संकेत था। लेकिन अब वह रफ्तार धीमी पड़ चुकी है।
वापसी अकेली कोई सफलता नहीं है; असली सवाल है — क्या लौटे लोग वहाँ स्थायी रूप से बस पाएंगे, क्या उन्हें जीवन की बुनियाद मिलेगी?
अगर पूरी दुनिया, सरकार और नागरिक — तीनों मिलकर काम करें, तो यह सिर्फ एक वापसी नहीं, एक पुनरुत्थान (revival) बन सकती है। लेकिन अगर समर्थन रुका — तो यह वापसी पीछे मुड़ने जैसा भी बन सकती है।
आज ज़रूरत है — संवेदनशीलता की, समझदारी की और दृढ़ संकल्प की: ताकि सीरिया के शरणार्थी सिर्फ लौटकर न आएँ, बल्कि एक सम्मानपूर्ण, सुरक्षित, और स्थिर भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकें।






