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CBSE अब हिंदी अंग्रेजी के अतिरिक्त तीसरी भाषा लागू करने की तैयारी में

CBSE अब हिंदी अंग्रेजी के अतिरिक्त तीसरी भाषा लागू करने की तैयारी में
नवजोत कौर सिद्धू
On: अप्रैल 12, 2026 2:45 अपराह्न
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड एक बड़े बदलाव की तैयारी में है। CBSE अब हिंदी अंग्रेजी के अतिरिक्त तीसरी भारतीय भाषा को लागू करने जा रहा है। तीसरी भाषा कौन सी होगी यह छात्रों पर निर्भर होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि अंग्रेजी भाषा पर पूरी तरह से निर्भरता करना है। जो छात्र अंग्रेजी भाषा को चुनना चाहते है वह अंग्रेजी भाषा को चुन सकते है। जो छात्र तीसरी भाषा को चुनना चाहते है वह तीसरी भाषा का चुनाव कर सकते है। तीसरी भाषा उस क्षेत्र के हिसाब से निर्भर होगा। संस्कृत व अन्य क्षेत्रीय भाषा भी छात्र तय कर सकते है। CBSE इस प्रकल्प से सभी छात्रों को भारतीय भाषाओं से जोड़ने का विचार कर रही है। 

अभी तक केवल दो भाषाओं की होती थी परीक्षा

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अभी तक मुख्य विषय के साथ साथ दो अतिरिक्त भाषाओं की परीक्षा लेती थी व पढ़ाई करवाती थी। अब उस बाध्यता को खत्म करते हुए तीसरी भाषा को भी अनिवार्य कर दिया है। यह भाषा अनिवार्य 2026–27 से ही लागू हो जाएगी। CBSE ने कहा कि 2031 तक 10वी तक पूरे देश के सीबीएसई विद्यालयों में यह तीसरी भाषा का मॉडल लागू कर दिया जाएगा। इससे छात्रों को विशेष लाभ पहुंचेगा। अब जो छात्र अंग्रेजी नहीं पढ़ना चाहते है उनके लिए की बाध्यता नहीं है। अब वो अंग्रेजी की जगह किसी और भाषा का चुनाव कर सकते है। अब वो कौन सी होगी यह उस छात्र पर निर्भर करेगा। 

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संस्कृत या अन्य क्षेत्रीय भाषा हो सकती है तीसरी भाषा

ज्यादातर लोग हिंदी अंग्रेजी के अलावा संस्कृत भाषा को पसंद करते है। संस्कृत भाषा दुनिया की प्राचीनतम भाषा है। कई सीबीएसई विद्यालयों में संस्कृत पढ़ाई जा रही है व परीक्षाएं भी आयोजित की जा रही है। अगर की बच्चा अंग्रेजी जैसे विषय पर intrest नहीं दिखाता तो वह अन्य क्षेत्रीय भाषा को चुन सकता है। CBSE ने यह अनिवार्य किया कि जिस क्षेत्रीय भाषा की पढ़ाई छात्र करना चाहते है उस विषय की पर्याप्त सुविधा हो। उस विषय का शिक्षक भी उस विधालय में उपलब्ध हो। इस पूरे सिस्टम को सीबीएसई ने R1, R2, R3 कोड से लागू किया है। अगर की बच्चा R1 को लेता है तो फिर उसे R2 या R3 में से किसी एक को चुनना पड़ेगा। फिर आगे उसी की परीक्षा उसे देनी होगी। 

2031 तक लागू होगा पूरे तरीके से यह मॉडल

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने यह साफ शब्दों में स्पष्ट किया है कि धीरे धीरे इस मॉडल को लागू किया जाएगा। अगर कोई स्कूल तीसरी भाषा को लागू करने में असहज है तो वह कुछ समयों के बाद तीसरी भाषा को लागू कर सकता है। उस विषय का शिक्षक होना चाहिए जिससे छात्र पढ़ सके। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने यह मॉडल इसलिए भी अपनाया कि छात्र अब विदेशी भाषा की पूरी तरीके से निर्भर न रहे। अब छात्रों को भारतीय भाषाओं से जोड़कर vocal for local को बढ़ाया जाए। इस मॉडल से छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। NEP के रुलबुक के हिसाब से केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का यह फैसला सही माना जा रहा। 

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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