डेलीबार्ता,विदेश-अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार वाशिंगटन पोस्ट में बड़े पैमाने पर छंटनी की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अखबार ने अपने लगभग एक तिहाई कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। इस छंटनी की चपेट में कई वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार भी आए हैं। इन्हीं में एक नाम भारत में खासा चर्चित है कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और जाने-माने पत्रकार ईशान थरूर का।
12 साल बाद टूटा रिश्ता
ईशान थरूर पिछले करीब 12 वर्षों से वाशिंगटन पोस्ट से जुड़े हुए थे। उन्होंने विदेश मामलों के विशेषज्ञ लेखक के तौर पर अपनी अलग पहचान बनाई थी। अचानक हुई इस छंटनी ने न सिर्फ ईशान, बल्कि सैकड़ों पत्रकारों की पेशेवर जिंदगी को झकझोर कर रख दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अखबार में कार्यरत करीब 800 पत्रकारों में से 300 से ज्यादा को बाहर का रास्ता दिखाया गया है।
सोशल मीडिया पर साझा किया दर्द
नौकरी जाने की जानकारी खुद ईशान थरूर ने सोशल मीडिया के जरिए दी। उन्होंने भावुक शब्दों में लिखा कि आज उन्हें वाशिंगटन पोस्ट से निकाल दिया गया है। ईशान ने कहा कि उनके साथ-साथ अखबार के अधिकांश अंतरराष्ट्रीय कर्मचारी और कई बेहतरीन सहकर्मी भी इस फैसले का शिकार हुए हैं।
उन्होंने लिखा,“मैं अपने न्यूज रूम और खासतौर पर उन बेमिसाल पत्रकारों के लिए बहुत दुखी हूं, जिन्होंने
अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर वाशिंगटन पोस्ट की सेवा की। जिन संपादकों और संवाददाताओं के साथ मैंने लगभग 12 साल काम किया, वे सिर्फ सहकर्मी नहीं बल्कि मेरे दोस्त भी रहे हैं। उनके साथ काम करना मेरे लिए सम्मान की बात थी।”
‘वर्ल्डव्यू’ कॉलम से बनाई पहचान
ईशान थरूर ने जनवरी 2017 में वर्ल्डव्यू नाम से एक खास कॉलम की शुरुआत की थी। इस कॉलम का मकसद दुनिया की राजनीति और उसमें अमेरिका की भूमिका को आम पाठकों के लिए सरल और स्पष्ट तरीके से समझाना था।
ईशान के मुताबिक, उनके इस कॉलम को करीब 5 लाख नियमित पाठक पढ़ते थे। उन्होंने कहा कि वे उन सभी वफादार पाठकों के आभारी हैं, जिन्होंने सालों तक हफ्ते में कई बार उनका लेख पढ़ा और उस पर प्रतिक्रिया दी।
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पाठकों के प्रति जताया आभार
ईशान थरूर ने अपने संदेश में कहा,“मैं उन पांच लाख पाठकों का तहेदिल से शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने वर्षों तक मेरे कॉलम को पढ़ा। पत्रकार के तौर पर किसी लेखक के लिए इससे बड़ी संतुष्टि और कुछ नहीं हो सकती कि उसका काम लोगों तक पहुंचे और उन्हें सोचने पर मजबूर करे।”
विदेश मामलों के विशेषज्ञ है ईशान
वाशिंगटन पोस्ट में ईशान थरूर विदेश मामलों के लेखक के तौर पर काम कर रहे थे। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, कूटनीति और वैश्विक घटनाओं पर उनकी पकड़ मानी जाती थी। भारत से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय खबरों पर भी उनकी लेखनी अक्सर चर्चा में रहती थी।
हाल ही में “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद जब भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका दौरे पर गया था, तब ईशान अपने पिता शशि थरूर से सवाल पूछते नजर आए थे। इस वजह से वे सोशल मीडिया और मीडिया हलकों में चर्चा का विषय बने थे।
सोशल मीडिया पर समर्थन की लहर
ईशान थरूर की नौकरी जाने की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई पत्रकारों, पाठकों और मीडिया विशेषज्ञों ने ईशान को एक बेहतरीन पत्रकार बताया और वाशिंगटन पोस्ट के इस फैसले की आलोचना की।
कई लोगों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता के लिए ईशान जैसे अनुभवी लेखकों की जरूरत है, न कि उन्हें बाहर करने की।
अखबार का पक्ष- ‘दुखद लेकिन जरूरी फैसला’
वाशिंगटन पोस्ट के कार्यकारी संपादक मैट मरे ने छंटनी को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला दुखद जरूर है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में जरूरी था।
मैट मरे के अनुसार, मीडिया उद्योग तेजी से बदल रहा है। तकनीक, डिजिटल प्लेटफॉर्म और पाठकों की बदलती आदतों के कारण अखबारों को खुद को नए सिरे से ढालना पड़ रहा है। इसी वजह से यह कठोर कदम उठाना पड़ा।
खेल विभाग और विदेशी कार्यालय भी बंद
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वाशिंगटन पोस्ट ने सिर्फ कर्मचारियों की छंटनी ही नहीं की, बल्कि अपना खेल विभाग और कई विदेशी कार्यालय भी बंद कर दिए हैं। इससे यह साफ होता है कि अखबार लागत कम करने और डिजिटल मॉडल पर ज्यादा फोकस करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
जेफ बेजोस के स्वामित्व वाला अखबार
गौरतलब है कि वाशिंगटन पोस्ट के मालिक अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस हैं। उन्होंने साल 2013 में इस अखबार को ग्राहम परिवार से करीब 25 करोड़ डॉलर में खरीदा था। बेजोस के आने के बाद अखबार में कई तकनीकी और व्यावसायिक बदलाव हुए, लेकिन हालिया छंटनी ने एक बार फिर पारंपरिक पत्रकारिता के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मीडिया इंडस्ट्री पर संकट के संकेत
ईशान थरूर की नौकरी जाना सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह पूरी वैश्विक मीडिया इंडस्ट्री में चल रहे संकट का प्रतीक है। डिजिटल युग में विज्ञापन मॉडल बदल चुके हैं, पाठक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की ओर शिफ्ट हो रहे हैं और प्रिंट व डिजिटल मीडिया दोनों ही आर्थिक दबाव झेल रहे हैं।
आगे की राह
ईशान थरूर जैसे अनुभवी पत्रकार के लिए यह एक कठिन दौर जरूर है, लेकिन उनके समर्थकों और पाठकों का मानना है कि उनकी पत्रकारिता यात्रा यहीं खत्म नहीं होगी।
उनका अनुभव, वैश्विक समझ और लेखन शैली उन्हें आगे भी नए अवसर दिला सकती है। वाशिंगटन पोस्ट की छंटनी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पत्रकारिता का पेशा आज पहले से कहीं ज्यादा अनिश्चित हो गया है। ईशान थरूर की कहानी भावनात्मक भी है और चिंताजनक भी।
यह न सिर्फ एक बेटे, एक पत्रकार या एक लेखक की नौकरी जाने की खबर है, बल्कि यह मीडिया जगत में हो रहे बड़े बदलावों और चुनौतियों की झलक भी दिखाती है।







