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Tiger Corridor पर विकास की दस्तक NH-46 के बरेठा घाट सेक्शन को मिली हरी झंडी स्टे हटनें का है अब इंतजार 

Tiger Corridor पर विकास की दस्तक NH-46 के बरेठा घाट सेक्शन को मिली हरी झंडी स्टे हटनें का है अब इंतजार 
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 23, 2026 10:04 अपराह्न
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डेलीबार्ता।

मध्यप्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल नेशनल हाईवे-46 (NH-46) का बरेठा घाट सेक्शन आखिरकार पूरा होने की दिशा में बढ़ता नजर आ रहा है। टाइगर मूवमेंट कॉरिडोर (Tiger Movement Corridor) के कारण वर्षों से अटका यह प्रोजेक्ट अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को इस संवेदनशील हिस्से के निर्माण के लिए Wildlife Boardऔर केंद्र सरकार से आवश्यक मंजूरी मिल चुकी है। अब सिर्फ मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के स्टे हटने का इंतजार है, जिसके बाद करीब 20.9 किलोमीटर लंबे इस सेक्शन पर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

प्रदेश की लाइफलाइन, उत्तर से दक्षिण तक मजबूत कनेक्टिविटी

NH-46 को मध्य प्रदेश का सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग (national highway) माना जाता है। यह हाईवे ग्वालियर से लेकर बैतूल तक लगभग 634 किलोमीटर लंबा है और पूरी तरह राज्य के भीतर फैला हुआ है। यह न केवल उत्तर और दक्षिण मध्यप्रदेश को जोड़ता है, बल्कि भोपाल-नागपुर कॉरिडोर की एक अहम कड़ी भी है। इस हाईवे के माध्यम से राजधानी क्षेत्र से लेकर महाराष्ट्र की सीमा तक यातायात और व्यापारिक गतिविधियों को सीधा और तेज मार्ग मिलता है।

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टाइगर कॉरिडोर बना सबसे बड़ी चुनौती

हालांकि NH-46 का अधिकांश हिस्सा पहले ही तैयार हो चुका है, लेकिन केसला रेंज, भौंरा रेंज और बरेठा घाट के लगभग 20.9 किलोमीटर हिस्से में काम लंबे समय से अटका हुआ था। इसका मुख्य कारण यह था कि यह क्षेत्र घने जंगलों और टाइगर मूवमेंट कॉरिडोर के अंतर्गत आता है।

वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए 1 अप्रैल 2022 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस क्षेत्र में निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से NHAI को पर्यावरण और वन्यजीव से जुड़े विभिन्न विभागों से अनुमति लेने की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी, जो अब जाकर पूरी हो सकी है।

जोखिम भरा सफर, बढ़ते हादसे

बरेठा घाट का मौजूदा मार्ग न केवल पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील है, बल्कि सड़क सुरक्षा के लिहाज से भी काफी खतरनाक माना जाता है। वर्तमान में यह सड़क दो लेन की है, जहां तीखे मोड़, खड़ी ढलान और सीमित दृश्यता यात्रियों के लिए बड़ी चुनौती बनते हैं।

भारी वाहनों की आवाजाही और बढ़ते ट्रैफिक के चलते यहां आए दिन जाम और दुर्घटनाएं होती रहती हैं।

जानिये क्या कहते हैं आंकड़े

आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच इस क्षेत्र में 51 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में 18 लोगों की मौत हुई, जबकि 62 से अधिक लोग घायल हुए। कई मामलों में सड़क पर अचानक वन्यजीवों के आ जाने से दुर्घटनाएं हुईं, जिससे इस क्षेत्र की संवेदनशीलता और भी स्पष्ट होती है।

 4-लेन हाईवे से बदलेगी तस्वीर

हाईकोर्ट के निर्देशों और पर्यावरणीय मानकों को ध्यान में रखते हुए NHAI ने बरेठा घाट सेक्शन के लिए एक नया डिजाइन तैयार किया है। इसके तहत मौजूदा दो-लेन सड़क को चार लेन में बदला जाएगा।

सड़क के घुमावदार हिस्सों को सुधारा जाएगा, जिससे वाहन चालकों को बेहतर विजिबिलिटी मिलेगी और दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी। इसके अलावा सड़क चौड़ी होने से ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा और यात्रा अधिक सुगम एवं सुरक्षित बनेगी।

 ब्लैक स्पॉट्स पर रखा जायेगा खास ध्यान

इस प्रोजेक्ट में सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स को खत्म करने की योजना बनाई गई है। इसके तहत:

  • 3 माइनर ब्रिज बनाए जाएंगे
  • 38 बॉक्स कलवर्ट्स का पुनर्निर्माण और चौड़ीकरण होगा,1 रेलवे अंडरब्रिज और 2 रोड ओवरब्रिज बनाए जाएंगे।1 व्हीकल अंडरपास का निर्माण होगा।
  • इन सभी संरचनाओं का उद्देश्य ट्रैफिक को बिना बाधा के आगे बढ़ाना और दुर्घटनाओं की संभावना को कम करना है।

विकास के साथ वन्यजीवों का भी संरक्षण

इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें विकास के साथ-साथ पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का भी पूरा ध्यान रखा गया है।

टाइगर कॉरिडोर से गुजरने वाले इस क्षेत्र में जानवरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए 10 एनिमल अंडरपास बनाए जाएंगे,1 एनिमल ओवरपास का निर्माण किया जाएगा।

इसके साथ ही सड़क किनारे नॉइज बैरियर, चेन-लिंक फेंसिंग और बंबू क्रीपर जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे शोर और प्रदूषण का प्रभाव कम हो और वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास सुरक्षित बना रहे।

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व्यापार, उद्योग और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

NH-46 के इस अधूरे हिस्से के पूरा होने से न केवल यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। मंडीदीप जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे माल परिवहन तेज और किफायती होगा।

साथ ही प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे सांची, भीमबेटका, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, तवा डैम और सलकनपुर तक पहुंच आसान होगी, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

अब हाईकोर्ट के फैसले पर निगाहें 

सभी आवश्यक मंजूरियाँ मिलने के बाद अब इस परियोजना की गेंद पूरी तरह अदालत के पाले में है। जैसे ही मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (MP highcourt) स्टे हटाने का औपचारिक आदेश (formal order) देगा, NHAI तुरंत निर्माण कार्य शुरू कर देगा।

वर्षों से अधूरा पड़ा यह प्रोजेक्ट न केवल मध्य प्रदेश की कनेक्टिविटी (Connectivity of Madhya Pradesh) को नई ऊंचाई देगा, बल्कि विकास और पर्यावरण संरक्षण (environmental protection) के बीच संतुलन का एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश करेगा।

अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ, तो आने वाले समय में NH-46 प्रदेश की अर्थव्यवस्था और यातायात व्यवस्था को एक नई रफ्तार देता नजर आ रहा है| 

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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