7 मार्च 2026 को भारत में घरेलू रसोई गैस (LPG) की कीमतों में 60 रुपये प्रति सिलेंडर की भारी बढ़ोतरी की गई है। इस वृद्धि का सीधा संबंध पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते तनाव और उससे उत्पन्न ऊर्जा संकट से है।
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलाव, अंतरराष्ट्रीय कारण और भारत सरकार द्वारा उठाए गए सुरक्षात्मक कदमों का विश्लेषण
LPG की नई कीमतें (मार्च 2026)
तेल कंपनियों द्वारा की गई इस बढ़ोतरी के बाद देश के प्रमुख महानगरों में 14.2 किलोग्राम वाले गैर-सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडर की कीमतें अब इस प्रकार हैं
| शहर | पुरानी कीमत (₹) | नई कीमत (₹) | वृद्धि (₹) |
| दिल्ली | 853 | 913 | 60 |
| मुंबई | 852.5 | 912.5 | 60 |
| कोलकाता | 879 | 939 | 60 |
| चेन्नई | 868.5 | 928.5 | 60 |
नोट – उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए कीमतें अपरिवर्तित रखी गई हैं उन्हें मिलने वाली ₹300 की सब्सिडी जारी रहेगी।
कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण – पश्चिम एशिया संकट
रसोई गैस की कीमतों में अचानक आई इस तेजी के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक (Geopolitical) कारण सबसे प्रमुख हैं
- ईरान और इजरायल-अमेरिका तनाव – पश्चिम एशिया में चल रहे सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी – भारत अपनी जरूरत का लगभग 85-90% LPG पश्चिम एशिया से आयात करता है। इसमें से अधिकांश आपूर्ति ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ के रास्ते आती है। तनाव के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है जिससे माल ढुलाई और बीमा लागत (Insurance cost) बढ़ गई है।
- आपूर्ति में कमी की आशंका – कतर जैसे बड़े निर्यातकों द्वारा उत्पादन और शिपमेंट में अस्थाई रुकावट की खबरों ने बाजार में ‘सप्लाई शॉर्टेज’ का डर पैदा कर दिया है जिससे अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमतों में उछाल आया है।
भारत सरकार का बड़ा फैसला – LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश
किल्लत की आशंका को देखते हुए भारत सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत अपनी आपातकालीन शक्तियों का उपयोग किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने सभी तेल रिफाइनरियों (सरकारी और निजी) को कड़े निर्देश जारी किए हैं
- उत्पादन को अधिकतम करना- रिफाइनरियों को आदेश दिया गया है कि वे अपने पास उपलब्ध प्रोपेन (Propane) और ब्यूटेन (Butane) गैस के स्टॉक का उपयोग केवल और केवल LPG उत्पादन के लिए करें।
- पेट्रोकेमिकल उपयोग पर रोक- आमतौर पर इन गैसों का उपयोग प्लास्टिक और अन्य पेट्रोकेमिकल बनाने में होता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक आपूर्ति सामान्य नहीं होती इनका उपयोग घरेलू गैस बनाने के अलावा कहीं और नहीं किया जाएगा।
- केवल घरेलू आपूर्ति- उत्पादित LPG को केवल तीन सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) को ही बेचा जाएगा ताकि आम नागरिकों तक सिलेंडर पहुँच सके।
- निर्यात में कटौती – कंपनियों को सलाह दी गई है कि वे घरेलू मांग पूरी करने के लिए अपने निर्यात (Exports) को सीमित करें।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति
वर्तमान संकट से निपटने के लिए सरकार ‘बहुआयामी’ रणनीति पर काम कर रही है
- रूस से आयात– भारत अब अपनी ऊर्जा निर्भरता को पश्चिम एशिया से हटाकर रूस की ओर मोड़ रहा है। हाल ही में रूस से भारी मात्रा में कच्चे तेल और गैस के आयात के लिए नए समझौते किए गए हैं।
- अमेरिका से आपूर्ति- 2026 के लिए भारत ने अमेरिका से लगभग 22 लाख टन LPG आयात करने का अनुबंध किया है जिसकी खेप जनवरी से मिलनी शुरू हो गई है।
- भंडारण (Stockpiling)- सरकार के अनुसार देश के पास वर्तमान में पर्याप्त स्टॉक है और नागरिकों को घबराने (Panic buying) की जरूरत नहीं है।
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आम आदमी और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
- रसोई का बजट- ₹60 की वृद्धि से मध्यम वर्गीय परिवारों के मासिक बजट पर दबाव बढ़ेगा।
- कमर्शियल सिलेंडर – कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भी लगभग ₹115 की वृद्धि हुई है जिससे होटल और रेस्तरां में खाना महंगा हो सकता है।
- मुद्रास्फीति (Inflation) – ईंधन की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर परिवहन और अन्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है जिससे महंगाई दर बढ़ने की संभावना रहती है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत की ऊर्जा स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। उत्पादन बढ़ाने के आदेश और आयात के वैकल्पिक रास्तों (जैसे रूस और अमेरिका) के कारण आपूर्ति में कोई बड़ी बाधा नहीं आएगी। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के कारण कीमतों में सुधार के लिए पश्चिम एशिया में शांति का होना अनिवार्य है।







