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डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के साल भर में करीब 2 अरब डॉलर फंड इकट्ठा किया 

डोनाल्ड ट्रंप
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 23, 2025 7:01 अपराह्न
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डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही अमेरिकी राजनीति और वैश्विक व्यापार के गठजोड़ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक विश्लेषणों में यह बात उभरकर सामने आई है कि ट्रंप प्रशासन के नीतिगत निर्णयों और उनके चुनावी अभियान के लिए जुटाए गए फंड के बीच एक गहरा संबंध है।​

डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के साल भर में करीब 2 अरब डॉलर फंड इकट्ठा किया

​ट्रंप 2.0 फंड फायदे और सत्ता का नया समीकरण 

​डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति का दूसरा अध्याय केवल राजनीतिक बदलावों तक सीमित नहीं है बल्कि यह बड़े कॉर्पोरेट निवेश और रणनीतिक फंडिंग का एक नया अध्याय भी लिख रहा है। चुनावी अभियान से लेकर सत्ता संभालने तक लगभग 2 अरब डॉलर 2 Billion USD के फंड और उससे जुड़े नीतिगत लाभों की चर्चा वैश्विक मीडिया में छाई हुई है।

​फंडिंग का विशाल नेटवर्क और सुपर PACs

​ट्रंप के चुनावी अभियान और उनके करीबियों द्वारा संचालित विभिन्न सुपर PACs Political Action Committees ने रिकॉर्ड तोड़ फंड जुटाया है। इस फंडिंग का एक बड़ा हिस्सा सिलिकॉन वैली के दिग्गजों वॉल स्ट्रीट के निवेशकों और तेल माफियाओं से आया है।​सौदा आधारित राजनीति आलोचकों का तर्क है कि यह फंड केवल दान नहीं है  बल्कि एक ट्रांजेक्शनल लेन-देन आधारित निवेश है।​नियामक छूट फंड देने वाले बड़े समूहों को टैक्स में कटौती पर्यावरण नियमों में ढील और एकाधिकार Monopoly विरोधी कानूनों से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

​भारतवंशी व्यापारिक समुदाय की भूमिका

​इस पूरे वित्तीय समीकरण में भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों Indian-Americans की भूमिका पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। ट्रंप के करीबियों में कई ऐसे प्रभावशाली भारतवंशी शामिल हैं जिन्होंने न केवल फंड जुटाने में मदद की बल्कि नीतियों को प्रभावित करने की स्थिति में भी हैं।

​प्रमुख नाम विवेक रामास्वामी काश पटेल और बॉबी जिंदल जैसे नाम प्रशासन के भीतर या बाहर रहकर एक बड़े थिंक-टैंक के रूप में काम कर रहे हैं। ​व्यापारिक लॉबी होटल उद्योग आईटी सेवाओं और फार्मास्युटिकल क्षेत्र से जुड़े बड़े भारतीय-अमेरिकी व्यापारियों ने ट्रंप के डीरेगुलेशन नियमों में ढील के वादे के बदले भारी निवेश किया है।

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​अरबों के फायदे और नीतिगत बदलाव

  • ​जब हम करोड़ों के फायदे की बात करते हैं तो इसका सीधा संबंध उन नीतियों से है जो विशिष्ट उद्योगों को अरबों डॉलर का लाभ पहुँचाती हैं|
  • ​ऊर्जा क्षेत्र (Energy Sector) ट्रंप ने ड्रिल बेबी  ड्रिल का नारा दिया है। तेल कंपनियों को दी जाने वाली छूट से इन कंपनियों के मुनाफे में अप्रत्याशित वृद्धि होने वाली है।
  • ​क्रिप्टोकरेंसी ट्रंप ने अमेरिका को दुनिया की क्रिप्टो राजधानी बनाने का वादा किया है। इसके पीछे उन क्रिप्टो दिग्गजों का हाथ है जिन्होंने उनके अभियान में करोड़ों डॉलर झोंके हैं।
  • ​टैक्स कटौती कॉर्पोरेट टैक्स को 21% से घटाकर 15% करने का प्रस्ताव बड़े दानदाताओं के लिए सीधा वित्तीय लाभ है।

​हितों का टकराव (Conflict of Interest)

​ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में सबसे बड़ी चुनौती हितों के टकराव को लेकर है। ट्रंप के अपने पारिवारिक व्यवसाय और उनके करीबियों के निजी व्यापारिक हित सरकारी नीतियों के साथ ओवरलैप कर रहे हैं।

​विदेशी निवेश  ट्रंप के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में खाड़ी देशों और अन्य विदेशी संस्थाओं का निवेश एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है कि क्या अमेरिकी विदेश नीति इन निवेशों से प्रभावित होगी।

​एलोन मस्क का प्रभाव दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलोन मस्क की ट्रंप से नजदीकी और सरकारी दक्षता विभाग DOGE में उनकी भूमिका यह दिखाती है कि कैसे एक बड़ा दानदाता सीधे सरकारी ढांचे को नियंत्रित कर सकता है।

भारत पर इसका प्रभाव

​भारत के लिए यह स्थिति दोधारी तलवार की तरह है। ​सकारात्मक ट्रंप की चीन विरोधी नीतियों से भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनने में मदद मिल सकती है। भारतवंशी करीबियों की वजह से द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में भारत को प्राथमिकता मिल सकती है।

​नकारात्मक

एच-1बी वीजा नियमों में सख्ती और व्यापार शुल्कों में वृद्धि भारतीय आईटी और निर्यात क्षेत्र को नुकसान पहुँचा सकती है|

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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