भारत की रक्षा शक्ति में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ते हुए, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन DRDO ने सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट SFDR तकनीक का सफल परीक्षण कर दुनिया को अपनी स्वदेशी ताकत का परिचय दिया है। यह तकनीक भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा करती है जिनके पास लंबी दूरी की हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों BVRAAM के लिए सबसे उन्नत प्रणोदन प्रणाली Propulsion System है।
क्या है SFDR तकनीक
सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट SFDR एक ऐसी मिसाइल प्रणोदन प्रणाली है जो रैमजेट इंजन के सिद्धांत पर काम करती है। पारंपरिक मिसाइलों में ईंधन और ऑक्सीडाइज़र दोनों मिसाइल के भीतर ही होते हैं, जिससे मिसाइल का वजन बढ़ जाता है और उसकी रेंज कम हो जाती है।
रैमजेट कैसे काम करता है?
SFDR तकनीक में मिसाइल उड़ान के दौरान वातावरण से हवा (ऑक्सीजन) लेती है। यह हवा मिसाइल के भीतर डक्ट के माध्यम से प्रवेश करती है और उच्च गति पर संकुचित (Compress) होकर ईंधन को जलाने में मदद करती है।
- विशेषता – क्योंकि यह हवा से ऑक्सीजन लेती है, इसलिए इसे ऑक्सीडाइज़र ले जाने की आवश्यकता नहीं होती। इससे मिसाइल हल्की होती है और उसमें अधिक मारक क्षमता वाला ईंधन भरा जा सकता है।
- गति – यह तकनीक मिसाइल को सुपरसोनिक ध्वनि की गति से तेज़ गति बनाए रखने में मदद करती है।
चीन में बड़ा घोटाला मिसाइलों में ईंधन की जगह भरा मिला पानी जिनपिंग ने फोर्स के कई लोगों को निकाला
परीक्षण का विवरण – कहाँ और कैसे?
DRDO ने इस सफल परीक्षण को ओडिशा तट के पास चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज ITR में अंजाम दिया।
परीक्षण की प्रक्रिया
- बूस्टर चरण – मिसाइल को शुरू में एक सॉलिड बूस्टर मोटर का उपयोग करके लॉन्च किया गया जिसने इसे रैमजेट ऑपरेशन के लिए आवश्यक गति तक पहुँचाया।
- रैमजेट सक्रियण – एक निश्चित गति और ऊंचाई पर पहुँचने के बाद बूस्टर अलग हो गया और रैमजेट इंजन सक्रिय हो गया।
- हवा का प्रवेश – मिसाइल के डक्ट्स खुल गए और वातावरण से हवा अंदर आने लगी जिससे ईंधन जलना शुरू हुआ।
- निगरानी – पूरी उड़ान के दौरान इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम, रडार और टेलीमेट्री स्टेशनों ने मिसाइल के प्रदर्शन का डेटा एकत्र किया।
भारत के लिए इसका रणनीतिक महत्व
यह परीक्षण भारत की सामरिक स्वायत्तता की दिशा में एक बड़ी छलांग है
- लंबी दूरी की मारक क्षमता Long Range – SFDR आधारित मिसाइलें 350 किमी से भी अधिक की दूरी तक दुश्मन के विमानों को मार गिराने में सक्षम होंगी।
- नो-एस्केप ज़ोन No-Escape Zone – पारंपरिक मिसाइलें अंत में धीमी हो जाती हैं लेकिन SFDR मिसाइल आखिरी क्षण तक अपनी तेज़ गति बनाए रखती है जिससे दुश्मन के लड़ाकू विमान का बच निकलना नामुमकिन हो जाता है।
- स्वदेशी मिटिओर (Meteor) – वर्तमान में भारत यूरोपीय मिटिओर मिसाइल पर निर्भर है। SFDR के सफल होने से भारत अपनी खुद की अत्याधुनिक हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलें बना सकेगा।
SFDR के मुख्य घटक व उनके कार्य
- नोजल रहित बूस्टर – मिसाइल को शुरुआती सुपरसोनिक गति प्रदान करना।
- बोरोन आधारित ईंधन – उच्च ऊर्जा घनत्व प्रदान करने के लिए विशेष ठोस ईंधन।
- एयर इनटेक डक्ट्स – उड़ान के दौरान वायुमंडलीय ऑक्सीजन को सोखना।
- थ्रस्ट मॉड्यूलेशन – उड़ान की स्थिति के अनुसार इंजन की शक्ति को नियंत्रित करना।
भविष्य की राह – अस्त्र मिसाइल का अगला संस्करण
SFDR तकनीक का प्राथमिक उपयोग अस्त्र मिसाइल के भविष्य के संस्करणों में किया जाएगा। वर्तमान अस्त्र मिसाइल की रेंज लगभग 110 से 160 किमी है लेकिन SFDR तकनीक इसे सीधे 300+ किमी की श्रेणी में ले जाएगी। इससे भारतीय वायुसेना IAF अपने हवाई क्षेत्र से बाहर निकले बिना ही दुश्मन के AWACS अर्ली वार्निंग विमानों और टैंकर विमानों को नष्ट कर सकेगी।
SFDR का सफल परीक्षण न केवल DRDO की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता को दर्शाता है बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मज़बूत करता है। यह तकनीक भारत को हवाई युद्ध के क्षेत्र में एक निर्णायक बढ़त Decisive Edge प्रदान करती है।
ISRO के लिये DDU के 5 स्टूडेंट्स का चयन, अखिल भारतीय तकनीकी सम्मेलन 2025 में होगें शामिल







