चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के भीतर हाल ही में सामने आए भ्रष्टाचार के मामलों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। विशेष रूप से ‘रॉकेट फोर्स’ में मिसाइलों के भीतर ईंधन के स्थान पर पानी भरे होने की खबरों ने चीनी सैन्य तैयारियों और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना का मुख्य केंद्र – पीएलए रॉकेट फोर्स (PLARF)
चीन की रॉकेट फोर्स वह शाखा है जो देश के परमाणु और पारंपरिक मिसाइल शस्त्रागार को नियंत्रित करती है। शी जिनपिंग ने इसे चीन की सैन्य शक्ति का “कोर” माना था।
- भ्रष्टाचार का खुलासा – अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय मीडिया (जैसे ब्लूमबर्ग) के अनुसार, चीन की कई लंबी दूरी की मिसाइलों के फ्यूल टैंक में रॉकेट ईंधन की जगह पानी भरा हुआ पाया गया।
- दोषपूर्ण उपकरण – रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि पश्चिमी चीन में स्थित विशाल मिसाइल सिलोस (Silos) के ढक्कन (Lids) ठीक से काम नहीं कर रहे थे, जिससे मिसाइलों को लॉन्च करना असंभव हो गया था।
जिनपिंग की ‘सफाई’ और सैन्य नेतृत्व पर गाज
इस घोटाले के उजागर होने के बाद, शी जिनपिंग ने अपनी सेना में अब तक का सबसे बड़ा शुद्धिकरण अभियान (Purge) चलाया।
- वरिष्ठ अधिकारियों की बर्खास्तगी – रॉकेट फोर्स के कमांडर ली युचो (Li Yuchao) और उनके डिप्टी को रहस्यमय तरीके से पद से हटा दिया गया।
- रक्षामंत्री का गायब होना – पूर्व रक्षामंत्री ली शांगफू (Li Shangfu) हफ्तों तक सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए और अंततः उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में पदमुक्त कर दिया गया।
- सांसदों पर कार्रवाई – चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (NPC) से 9 वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को बाहर निकाल दिया गया, जो सीधे तौर पर खरीद और रसद (Procurement) विभाग से जुड़े थे।
इस घोटाले के कारण और प्रभाव
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह घोटाला केवल कुछ अधिकारियों के लालच का नतीजा नहीं है, बल्कि चीन की सैन्य प्रणाली में गहरी जड़ों तक फैले भ्रष्टाचार का प्रतीक है।
भ्रष्टाचार के कारण
- खरीद प्रक्रिया में घपला – मिसाइल घटकों और ईंधन के लिए आवंटित बजट को अधिकारियों ने अपनी जेबों में भर लिया और घटिया गुणवत्ता का सामान या पानी का उपयोग किया।
- निगरानी का अभाव – रॉकेट फोर्स जैसी संवेदनशील शाखाओं में गोपनीयता के कारण बाहरी ऑडिट होना मुश्किल होता है, जिसका लाभ अधिकारियों ने उठाया।
इसके गंभीर परिणाम
- युद्ध की तैयारी पर प्रश्न – यदि मिसाइलों में ईंधन की जगह पानी है, तो चीन की “युद्ध लड़ने और जीतने” की क्षमता शून्य हो जाती है।
- ताइवान पर प्रभाव – विशेषज्ञों का मानना है कि इस कमजोरी के कारण शी जिनपिंग निकट भविष्य में ताइवान पर किसी भी बड़े सैन्य हमले की योजना को टालने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
- वैश्विक छवि – चीन की छवि एक सैन्य महाशक्ति के रूप में धूमिल हुई है, क्योंकि उसके सबसे आधुनिक हथियारों को ‘कागजी शेर’ के रूप में देखा जा रहा है।
क्या यह चीन की सैन्य शक्ति के लिए ‘चेकमेट’ है?
यह कहना गलत होगा कि चीन की पूरी सेना कमजोर है, लेकिन रॉकेट फोर्स का यह घोटाला दिखाता है कि अरबों डॉलर खर्च करने के बावजूद, मानवीय भ्रष्टाचार तकनीक पर हावी हो सकता है। शी जिनपिंग अब सेना पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए ‘पॉलिटिकल कमिसार’ की भूमिका को बढ़ा रहे हैं ताकि वफादारी सुनिश्चित की जा सके।
मिसाइलों में पानी भरा होना केवल एक तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि एक राजनीतिक आपदा है। यह शी जिनपिंग के लिए एक बड़ा झटका है जिन्होंने पिछले एक दशक में सेना के आधुनिकीकरण पर अपनी पूरी ताकत लगा दी थी।
नोट – यह जानकारी उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय खुफिया रिपोर्टों और मीडिया विश्लेषण पर आधारित है। चीन ने आधिकारिक तौर पर ‘मिसाइल में पानी’ की बात स्वीकार नहीं की है, लेकिन सैन्य नेतृत्व में बड़े बदलावों ने इन दावों की पुष्टि की है।
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