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हीट स्ट्रोक (लू) से बचने के आसान टिप्स – गर्मियों में खुद को रखें सुरक्षित

हीट स्ट्रोक (लू) से बचने के आसान टिप्स – गर्मियों में खुद को रखें सुरक्षित
नवजोत कौर सिद्धू
On: अप्रैल 27, 2026 11:48 पूर्वाह्न
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लू (Heatstroke) एक गंभीर चिकित्सा स्थिति है जो तब होती है जब शरीर का तापमान 104°F (40°C) या उससे अधिक हो जाता है। यह अक्सर तेज धूप या गर्म वातावरण में लंबे समय तक रहने के कारण होता है।

​यहाँ लू से बचाव, लक्षण और उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई है

लू के मुख्य लक्षण (Symptoms)

​लू लगने पर शरीर के अंग काम करना बंद कर सकते हैं इसलिए इन लक्षणों को पहचानना जरूरी है

  • तेज बुखार –  शरीर का तापमान अचानक बहुत बढ़ जाना।
  • त्वचा में बदलाव –  त्वचा का लाल, गर्म और सूखा हो जाना (पसीना आना बंद हो जाना)।
  • सिरदर्द और चक्कर – तेज सिरदर्द, मतली या उल्टी महसूस होना।
  • मानसिक स्थिति –  भ्रम (Confusion), बोलने में लड़खड़ाहट, चिड़चिड़ापन या बेहोशी।
  • तेज धड़कन – दिल की धड़कन और सांस लेने की गति का तेज होना।

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लू से बचाव के उपाय (Prevention)

​बचाव हमेशा इलाज से बेहतर होता है। गर्मी के मौसम में इन बातों का ध्यान रखें

​खान-पान और हाइड्रेशन

  • भरपूर पानी पिएं – प्यास न लगने पर भी हर आधे घंटे में पानी पीते रहें।
  • इलेक्ट्रोलाइट्स – ओआरएस (ORS), नींबू पानी, नारियल पानी या छाछ का सेवन करें ताकि शरीर में लवण (Salts) की कमी न हो।
  • हल्का भोजन – सुपाच्य और पानी से भरपूर फल (तरबूज, खीरा, संतरा) खाएं।

​बाहरी गतिविधियां

  • समय का चुनाव –  दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें।
  • सही कपड़े – ढीले, हल्के रंग के और सूती (Cotton) कपड़े पहनें।
  • सुरक्षा गियर –  बाहर निकलते समय टोपी, चश्मा और छाते का प्रयोग करें। नंगे पैर बाहर न निकलें।

​अन्य सावधानियां

  • ​खड़ी कार (बंद गाड़ी) में बच्चों या पालतू जानवरों को कभी न छोड़ें।
  • ​शराब, कैफीन (कॉफी) और अधिक चीनी वाले ड्रिंक्स से बचें, क्योंकि ये शरीर को डिहाइड्रेट करते हैं।

​ तत्काल प्राथमिक उपचार (First Aid)

​यदि आपको लगे कि किसी को लू लग गई है तो तुरंत ये कदम उठाएं

  • ठंडी जगह ले जाएं –  मरीज को तुरंत धूप से हटाकर छायादार या एसी (AC) वाले कमरे में ले जाएं।
  • शरीर को ठंडा करें – ठंडे पानी की पट्टियां सिर, बगल और गर्दन पर रखें। यदि संभव हो, तो ठंडे पानी से नहलाएं या शावर के नीचे रखें।
  • हवा दें –  पंखा या कूलर चला दें ताकि शरीर का तापमान नीचे आए।
  • पानी पिलाएं –  यदि मरीज होश में है तो उसे धीरे-धीरे पानी या इलेक्ट्रोलाइट्स पिलाएं। बेहोशी की हालत में कुछ न पिलाएं।

​ रिकवरी का तरीका (Recovery Process)

​लू से ठीक होने में शरीर को समय लगता है। रिकवरी के दौरान इन बातों का पालन करें

  • पूर्ण विश्राम – रिकवरी के बाद कम से कम 2-3 दिनों तक शारीरिक मेहनत वाला काम न करें।
  • तापमान की निगरानी – कुछ दिनों तक शरीर के तापमान पर नजर रखें क्योंकि दोबारा बुखार आने की संभावना रहती है।
  • डॉक्टर की सलाह –  लू लगने के बाद अंदरूनी अंगों (जैसे किडनी या लीवर) पर प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए डॉक्टर से जांच जरूर कराएं।
  • क्रमिक वापसी –  सामान्य गतिविधियों में धीरे-धीरे लौटें। अचानक फिर से गर्मी में न जाएं।

​घरेलू उपचार और पारंपरिक नुस्खे

​भारत में लू से बचने के कुछ प्रभावी पारंपरिक तरीके भी अपनाए जाते हैं

उपायलाभ
आम पन्नाकच्चे आम का शरबत शरीर को ठंडा रखने और इलेक्ट्रोलाइट्स बैलेंस करने में मदद करता है।
प्याज का रसकान के पीछे और छाती पर प्याज का रस लगाने से लू के प्रभाव में कमी आती है।
बेल का शरबतयह पेट को ठंडा रखता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है।

चेतावनी –  लू (Heatstroke) एक मेडिकल इमरजेंसी है। यदि घरेलू उपायों और प्राथमिक उपचार से 15-20 मिनट में सुधार न दिखे तो तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं या नजदीकी अस्पताल ले जाएं। देरी करना जानलेवा हो सकता है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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