पाकिस्तान में हजारों उच्च शिक्षित पेशेवरो का देश से पलायन -पाकिस्तान के Bureau of Emigration and Overseas Employment BE&OE के हालिया आंकड़ों ने देश में एक गंभीर ब्रेन ड्रेन (Brain Drain) की स्थिति को उजागर किया है। आर्थिक अस्थिरता बढ़ती महंगाई और राजनीतिक अनिश्चितता के बीच पिछले दो वर्षों में लाखों पाकिस्तानी नागरिक देश छोड़ चुके हैं जिनमें हजारों उच्च शिक्षित पेशेवर भी शामिल हैं।
यह रिपोर्ट पाकिस्तान के भविष्य के लिए एक खतरे की घंटी है। जिसमें उन विभागों की जानकारी दी गई है जिनसे जुड़े लोगों ने बड़े स्तर पर पलायन किया है।
पाकिस्तान से पलायन
एक सांख्यिकीय अवलोकन BE&OE की रिपोर्ट के अनुसार 2022 और 2023 के बीच लगभग 16 लाख से अधिक पाकिस्तानियों ने रोजगार के लिए विदेश का रुख किया। इनमें से एक बड़ा हिस्सा उन पेशेवरों का है जिनके पास उच्च डिग्रियां और वर्षों का अनुभव था।
- 2022 में लगभग 832,339 लोग विदेश गए।
- 2023 में यह संख्या लगभग 800,000 के आसपास रही।
दक्षता स्तर-रिपोर्ट बताती है कि इनमें से हजारों लोग अत्यधिक योग्य (Highly Qualified) और अत्यधिक कुशल (Highly Skilled) श्रेणी के थे।
किन-किन विभागों के पेशेवरों ने देश छोड़ा
पलायन करने वालों में केवल श्रमिक ही शामिल नहीं हैं बल्कि पाकिस्तान के रीढ़ माने जाने वाले कई प्रमुख विभागों के विशेषज्ञों ने भी देश छोड़ दिया है।
चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा
स्वास्थ्य क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। आंकड़ों के अनुसार पिछले दो वर्षों में 5,000 से अधिक डॉक्टरों ने पाकिस्तान छोड़ा है।
कारण – अस्पतालों में बुनियादी ढांचे की कमी कम वेतन और बेहतर भविष्य की तलाश।
प्रमुख गंतव्य
- ब्रिटेन NHS सऊदी अरब और यूएई।
- इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र
- हजारों इंजीनियरों ने जिनमें सिविल इलेक्ट्रिकल मैकेनिकल और सॉफ्टवेयर इंजीनियर शामिल हैं देश को अलविदा कह दिया है।
प्रभाव-पाकिस्तान के बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और स्थानीय उद्योगों में विशेषज्ञों की भारी कमी हो गई है।
संख्या-लगभग 6,000 से अधिक पंजीकृत इंजीनियरों ने विदेश में नौकरी के लिए आवेदन किया।
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सूचना प्रौद्योगिकी
आईटी सेक्टर जो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को डिजिटल बनाने में मदद कर सकता था सबसे तेजी से प्रतिभा खो रहा है।
- कारण-रिमोट वर्किंग के अवसरों की कमी और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा बेहतर डॉलर आधारित वेतन।
- प्रभाव-देश के स्टार्टअप ईकोसिस्टम को बड़ा झटका लगा है।
- शिक्षा और शैक्षणिक क्षेत्र-विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों और शोधकर्ताओं ने भी बड़े पैमाने पर पलायन किया है।
- प्रभाव-शोध की गुणवत्ता में गिरावट और उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुभवी शिक्षकों की कमी।
अन्य प्रमुख पेशेवर
- एकाउंटेंट्स और वित्तीय विशेषज्ञ- लगभग 2,500 से अधिक
- प्रबंधक- व्यापार और उद्योग प्रबंधन से जुड़े करीब 3,000 लोग।
- नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ – स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में डॉक्टरों के साथ-साथ हजारों नर्सों ने भी खाड़ी देशों का रुख किया है।
पलायन के मुख्य कारण
BE&OE की रिपोर्ट और विशेषज्ञों के अनुसार इस सामूहिक पलायन के पीछे कई ठोस कारण हैं-
- आर्थिक मंदी-मुद्रास्फीति Inflation की दर 30-40% तक पहुंच गई जिससे मध्यम वर्ग के लिए गुजारा करना मुश्किल हो गया।
- रुपये का गिरता मूल्य-पाकिस्तानी रुपये के अवमूल्यन के कारण विदेशों में मिलने वाला वेतन स्थानीय वेतन की तुलना में कई गुना आकर्षक हो गया है।
- राजनीतिक अस्थिरता -देश में निरंतर राजनीतिक खींचतान और सुरक्षा चिंताओं ने युवाओं में असुरक्षा की भावना पैदा की है।
- कर का बोझ -पेशेवरों पर लगाए गए भारी आयकर Income Tax ने भी उन्हें देश छोड़ने पर मजबूर किया है।
प्रमुख गंतव्य देश -रिपोर्ट के अनुसार
पाकिस्तानी पेशेवर मुख्य रूप से, जा रहे हैं इन देशों की ओर –
- सऊदी अरब- सबसे अधिक संख्या में श्रमिक और इंजीनियर।
- संयुक्त अरब अमीरात – आईटी और प्रबंधन पेशेवर।
- ओमान और कतर – तकनीकी कर्मचारी।
- यूनाइटेड किंगडम UK – डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
यह ब्रेन ड्रेन पाकिस्तान के लिए दोहरा झटका है-
- सकारात्मक-विदेशी मुद्रा Remittances में वृद्धि होती है जो देश की विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा देती है।
- नकारात्मक-देश के भीतर कौशल की कमी Skill Gap पैदा हो जाती है। जब डॉक्टर और इंजीनियर देश छोड़ते हैं तो स्थानीय विकास की गति धीमी हो जाती है और सेवाओं की गुणवत्ता गिर जाती है।
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