नई दिल्ली। देश के पांच राज्यों—पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी—में लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव यानी मतदान की प्रक्रिया अब संपन्न हो चुकी है। महीनों तक चली रैलियों, आरोप-प्रत्यारोपों और चुनावी वादों के बाद अब बारी है नतीजों की। लेकिन आधिकारिक नतीजों से पहले जो चीज सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रही है, वह है ‘एग्जिट पोल’। जैसे ही अंतिम चरण का मतदान खत्म हुआ, विभिन्न चैनलों और सर्वे एजेंसियों ने अपने-अपने आंकड़े पेश कर दिए हैं।
इन आंकड़ों ने जहां कुछ राजनीतिक दलों के दफ्तरों में मिठाइयां बंटवानी शुरू कर दी हैं, वहीं कुछ खेमों में सन्नाटा और चिंता की लकीरें खींच दी हैं। हालांकि, इतिहास गवाह है कि एग्जिट पोल कई बार सही साबित हुए हैं, तो कई बार पूरी तरह से औंधे मुंह भी गिरे हैं।
बंगाल में दीदी का किला खतरे में ?
हाल में ही संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में अगर किसी राज्य ने अपना ध्यान आकर्षित किया तो वह पश्चिम बंगाल रहा। यहां की लड़ाई केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह दो बड़ी विचारधाराओं और दो बड़े चेहरों की सीधी टक्कर बन गई।
एग्जिट पोल के आंकड़ों ने यहां की तस्वीर को इतना धुंधला कर दिया है कि किसी एक की जीत का दावा करना फिलहाल जोखिम भरा लग रहा है। जहां कुछ प्रमुख एजेंसियों का मानना है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस अपनी सत्ता बचाने में कामयाब रहेगी, वहीं कुछ अन्य सर्वे भाजपा को एक बड़ी ऐतिहासिक बढ़त की ओर इशारा कर रहे हैं।
बंगाल की राजनीति को करीब से देखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि इस बार ग्रामीण इलाकों और शहरी केंद्रों के बीच का मतदान पैटर्न पूरी तरह अलग रहा है। जय श्रीराम के नारों और ‘खेला होबे’ के शोर के बीच आम आदमी ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है।
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असम में भाजपा भारी
असम में चुनावी हवा बंगाल से थोड़ी अलग नजर आ रही है। यहां के एग्जिट पोल बताते हैं कि भाजपा नीत गठबंधन अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए है। विकास और घुसपैठ जैसे मुद्दों के बीच असम की जनता ने शायद निरंतरता को प्राथमिकता दी है। अधिकांश एजेंसियों का अनुमान है कि भाजपा गठबंधन बहुमत के आंकड़े को आसानी से छू लेगा। हालांकि, कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने इस बार ‘महाजोत’ बनाकर कड़ी चुनौती पेश की थी, लेकिन लगता है कि वह चुनौती वोटों में उस तरह तब्दील नहीं हो पाई जैसी उम्मीद की जा रही थी।
तमिलनाडु में सस्पेंस
तमिलनाडु में तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यहां द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और अन्नाद्रमुक के बीच कड़ा मुकाबला बताया जा रहा है।
कुछ एग्जिट पोल डीएमके गठबंधन को आगे दिखाते हैं, तो कुछ एआईएडीएमके को बढ़त देते हैं। इसके अलावा नए राजनीतिक चेहरों की मौजूदगी भी समीकरण बदल सकती है। ऐसे में तमिलनाडु के नतीजे आखिरी समय तक रोमांच बनाए रख सकते हैं।
केरल में बदलाव की संभावना
केरल में इस बार सत्ता परिवर्तन के संकेत मिल रहे हैं। एग्जिट पोल के अनुसार यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट को बढ़त मिल सकती है, जबकि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।हालांकि केरल में अक्सर एग्जिट पोल चौंकाते रहे हैं, इसलिए यहां भी अंतिम परिणाम आने तक कुछ भी तय मानना जल्दबाजी होगी।
पुडुचेरी में कांग्रेस गठबंधन के आगे रहने के अनुमान
पुडुचेरी में एग्जिट पोल कांग्रेस गठबंधन को बढ़त देते नजर आ रहे हैं। कुछ सर्वेक्षणों के अनुसार कांग्रेस 10 से 12 सीटों तक जीत सकती है, जो 30 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए पर्याप्त हो सकती है। हालांकि भाजपा और अन्य दल भी यहां मुकाबले में बने हुए हैं, जिससे अंतिम परिणाम दिलचस्प हो सकता है।
सियासी दलों की बेचैनी और 4 मई का इंतजार
एग्जिट पोल आने के बाद अब सभी राजनीतिक दलों के दफ्तरों में बैठकों का दौर शुरू हो गया है। जहां आंकड़ों में आगे दिखने वाले नेता अपनी जीत की तैयारियों में जुट गए हैं, वहीं पिछड़ने वाले दलों ने ‘ईवीएम’ और ‘सर्वे की विश्वसनीयता’ पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। नेताओं का मानना है कि असली लड़ाई तो वोटों की गिनती के दिन लड़ी जाएगी। कार्यकर्ताओं को बूथों पर डटे रहने के निर्देश दिए गए हैं। पूरे देश की निगाहें अब 4 मई पर टिकी हैं, जब सुबह से ही रुझान आने शुरू हो जाएंगे और दोपहर तक पांचों राज्यों की नई सरकारों का चेहरा साफ हो जाएगा। तब तक के लिए केवल कयासों और दावों का दौर जारी रहेगा, क्योंकि लोकतंत्र में असली ताकत तो जनता के हाथ में है और उसने अपना फैसला पहले ही सुरक्षित कर दिया है।







