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दिल्ली शराब घोटाला- पूर्व CM अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को मिली राहत कोर्ट ने कहां CBI के पास कोई सबूत नही

पूर्व CM अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को मिली राहत कोर्ट ने कहां CBI के पास कोई सबूत नही
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 27, 2026 4:34 अपराह्न
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भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में कुछ क्षण ऐसे होते हैं जो न केवल कानूनी रूप से बल्कि मानवीय संवेदनाओं के लिहाज से भी यादगार बन जाते हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के लिए वह पल कुछ ऐसा ही था जब महीनों की कानूनी जद्दोजहद और जेल की सलाखों के पीछे वक्त गुजारने के बाद कोर्ट ने उन्हें बड़ी राहत प्रदान की।

 कोर्ट का फैसला – जब साक्ष्यों के अभाव में ढहा केस

लंबी सुनवाई और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों के गहन अध्ययन के बाद अदालत ने एक ऐतिहासिक टिप्पणी की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि CBI के पास आरोपियों के खिलाफ ठोस और पुख्ता सबूतों का अभाव है।

इस मामले में केवल केजरीवाल और सिसोदिया ही नहीं, बल्कि 23 अन्य आरोपियों को भी राहत मिली है। कोर्ट ने माना कि महज बयानों और अनुमानों के आधार पर किसी को लंबे समय तक दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कानूनी सिद्धांत बेगुनाह तब तक है जब तक दोष सिद्ध न हो जाए। इस फैसले का मुख्य आधार बना।

एक भावुक दृश्य – केजरीवाल के आंसू और सिसोदिया का साथ

जैसे ही अदालत ने फैसला सुनाया कोर्ट रूम का माहौल पूरी तरह बदल गया। भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से निकले नेता अरविंद केजरीवाल जो अपनी मजबूती के लिए जाने जाते हैं भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए और फूट-फूट कर रो पड़े।

  • सत्य की जीत का भार – केजरीवाल के आंसू केवल निजी राहत के नहीं थे बल्कि उन पर लगे बेईमानी के दाग के धुलने का सुकून था।
  •  सिसोदिया की भूमिका – संकट के समय के सबसे भरोसेमंद साथी मनीष सिसोदिया ने आगे बढ़कर केजरीवाल को संभाला। सिसोदिया जो खुद इस मामले में एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ चुके हैं ने केजरीवाल के कंधे पर हाथ रखकर उन्हें ढांढस बंधाया। यह दृश्य राजनीतिक गलियारों में दोस्ती और विश्वास की एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

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यह मामला 2021-22 की दिल्ली आबकारी नीति से शुरू हुआ था। मुख्य आरोप निम्नलिखित थे

  लाइसेंस शुल्क में रियायत –  आरोप था कि चुनिंदा कारोबारियों को अनुचित लाभ पहुँचाया गया।

  •   रिश्वत का आरोप – जांच एजेंसियों का दावा था कि नीति के बदले 100 करोड़ रुपये की रिश्व  किकबैक ली गई।
  •   चुनाव में इस्तेमाल – एजेंसियों ने कहा कि इस पैसे का इस्तेमाल गोवा चुनाव में किया गया।

हालांकि बचाव पक्ष ने हमेशा इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया और कोर्ट में दलील दी कि शराब नीति से दिल्ली सरकार का राजस्व बढ़ा था कोई घोटाला नहीं हुआ।

 23 अन्य आरोपियों की रिहाई के मायने

कोर्ट द्वारा अन्य 23 आरोपियों पर केस खत्म करना यह दर्शाता है कि जांच की बुनियाद कमजोर थी। इनमें अधिकारी कारोबारी और राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल थे। केस खत्म होने का मतलब है

  • व्यवसायियों की वापसी – कई कारोबारी जिनका करियर इस केस की वजह से रुका हुआ था अब दोबारा मुख्यधारा में आ सकेंगे।
  • प्रशासनिक राहत – संबंधित अधिकारियों पर से कानूनी तलवार हट गई है।
  • राजनीतिक प्रभाव – आप का पुनरुत्थान

इस फैसले ने दिल्ली और पंजाब की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है।

  • नैतिक जीत –  आम आदमी पार्टी (AAP) अब इसे ईमानदारी का सर्टिफिकेट बताकर जनता के बीच जाएगी।
  • विपक्ष पर हमला – अब आप केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप और मजबूती से लगाएगी।
  • आगामी चुनाव –  दिल्ली में होने वाले आगामी चुनावों में यह मुद्दा सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।

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 न्यायपालिका में अटूट विश्वास

यह मामला हमें सिखाता है कि लोकतंत्र में न्यायपालिका ही वह अंतिम स्तंभ है जहाँ सत्य की परख होती है। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के लिए यह केवल जेल से बाहर आने या केस खत्म होने की बात नहीं है बल्कि उनकी उस कट्टर ईमानदारी की छवि की वापसी है जिस पर इस विवाद ने सवाल खड़े कर दिए थे।

“सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।” यह उक्ति आज दिल्ली की राजनीति के संदर्भ में बिल्कुल सटीक बैठती है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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