नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से आम जनता के बीच एक बड़ी चिंता बनी हुई थी कि क्या पेट्रोल और डीजल के दाम फिर से बढ़ने वाले हैं। खासकर सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें तैर रही थीं कि सरकार प्रीमियम पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी इजाफा करने की तैयारी में है। इन चर्चाओं ने मध्यम वर्ग और वाहन मालिकों को परेशानी में डाल दिया था।
लेकिन अब केंद्र सरकार ने इन सभी अटकलों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि प्रीमियम ईंधन की कीमतों को बढ़ाने का फिलहाल कोई भी प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है। अधिकारियों ने कहा है कि बाजार में चल रही ऐसी खबरें पूरी तरह से भ्रामक हैं और जनता को इनसे भ्रमित होने की जरूरत नहीं है।
अफवाहों पर लगा विराम
बीते हफ्ते से ही फेसबुक, व्हाट्सएप और कई अन्य प्लेटफॉर्म्स पर यह दावा किया जा रहा था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी की वजह से सरकार अब प्रीमियम पेट्रोल-डीजल महंगा करने जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स में तो यहां तक कह दिया गया था कि इसकी फाइल कैबिनेट तक पहुंच चुकी है। मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विभाग के स्तर पर ऐसी किसी भी बढ़ोतरी पर चर्चा नहीं हो रही है।
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ईंधन की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य
कीमतों के साथ-साथ एक और अफवाह जो तेजी से फैली, वह थी देश में तेल की किल्लत की बात,मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है।रिफाइनरियों से लेकर तेल डिपो तक और वहां से पेट्रोल पंपों तक की सप्लाई चेन एकदम दुरुस्त है। किसी भी राज्य में तेल की कोई कमी नहीं है और न ही भविष्य में ऐसी कोई आशंका है। अधिकारियों का कहना है कि लोग घबराहट में आकर तेल का स्टॉक न करें, क्योंकि बाजार में ईंधन की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।
वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन दिनों कच्चे तेल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। खासकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध जैसे हालात बनते हैं, तो कच्चे तेल के दाम ऊपर भागने लगते हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब अस्सी प्रतिशत से ज्यादा तेल विदेशों से खरीदता है, इसलिए वहां की कीमतों का असर हमारे यहां पड़ना तय है। इसके बावजूद, भारत सरकार की रणनीति यह रही है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की महंगाई का पूरा बोझ देश के आम उपभोक्ताओं पर न डाला जाए। सरकार वैश्विक कीमतों पर पैनी नजर रखे हुए है और कोशिश कर रही है कि घरेलू स्तर पर कीमतें स्थिर रहें ताकि आम आदमी का बजट न बिगड़े।
तेल कंपनियों पर पड़ रहा दबाव
कीमतों को स्थिर रखने का एक बड़ा असर सरकारी तेल कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम पर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है और देश में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ते, तो कंपनियों को घाटा उठाना पड़ता है। कई बार कंपनियों को अपनी लागत से भी कम कीमत पर तेल बेचना पड़ता है। हालांकि, सरकार का मानना है कि तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति फिलहाल इतनी मजबूत है कि वे इस अस्थाई दबाव को झेल सकें। सरकार का मुख्य उद्देश्य महंगाई को काबू में रखना है, क्योंकि अगर पेट्रोल-डीजल महंगा होता है, तो ट्रांसपोर्टेशन का खर्चा बढ़ जाता है। इससे फल, सब्जी, दूध और अनाज जैसी हर जरूरी चीज के दाम बढ़ जाते हैं। इसी ‘महंगाई चक्र’ को रोकने के लिए सरकार तेल की कीमतों को नियंत्रित रखने की नीति पर चल रही है।
चुनाव के बाद बढ़ोतरी की अटकलें भी खारिज
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म थी कि चुनाव के बाद प्रीमियम पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे। सरकार ने इन दावों को भी गलत बताया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि तेल की कीमतों का फैसला किसी राजनीतिक कैलेंडर को देखकर नहीं, बल्कि आर्थिक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार की हकीकत को देखकर लिया जाता है। सरकार ने दोहराया है कि उसका फोकस केवल आम उपभोक्ताओं को राहत देने पर है और वह किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव में आकर फैसला नहीं लेती। फिलहाल सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि देश की अर्थव्यवस्था स्थिर रहे और लोगों पर महंगाई की मार न पड़े।
कुल मिलाकर, सरकार की ओर से आई इस सफाई ने साफ कर दिया है कि पेट्रोल-डीजल की महंगाई को लेकर फैलाई जा रही खबरें केवल मनगढ़ंत थीं। देश में न तो तेल की कोई कमी है और न ही कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी होने वाली है। सरकार ने एक बार फिर आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर आने वाले किसी भी बिना सिर-पैर के मैसेज पर विश्वास न करें। किसी भी जानकारी की पुष्टि के लिए हमेशा आधिकारिक सरकारी वेबसाइटों या भरोसेमंद समाचार माध्यमों का ही सहारा लें। फिलहाल जनता के लिए अच्छी खबर यही है कि उन्हें तेल की महंगाई से अभी कोई खतरा नहीं है और सप्लाई पूरी तरह सुचारु बनी रहेगी। सरकार आने वाले समय में भी अंतरराष्ट्रीय हालात पर नजर रखते हुए जनता के हित में फैसले लेती रहेगी।







