वैश्विक और घरेलू मोर्चे पर कमजोर संकेतों के चलते इस सप्ताह भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में एक बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बीते कुछ समय से लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई को छू रहे इन कीमती धातुओं के दामों में आई इस अचानक कमी ने निवेशकों और आम उपभोक्ताओं दोनों को चौंका दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं और घरेलू बाजार में मांग के रुख में बदलाव के कारण इस हफ्ते सोने और चांदी दोनों के भाव धड़ाम से नीचे आ गए हैं।
सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट- 24 कैरेट का ताजा हाल
घरेलू बाजार में इस सप्ताह सोने की कीमतों में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। हफ्ते के दौरान सोने के दाम में करीब 1500 रुपए से 2000 रुपए प्रति 10 ग्राम की सीधी गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद अलग-अलग सर्राफा बाजारों में 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव फिसलकर लगभग 1.59 रुपए लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है।
सोने की कीमतों में आई इस नरमी से उन लोगों को बड़ी राहत मिली है जो आगामी शादियों के सीजन या व्यक्तिगत निवेश के लिए खरीदारी की योजना बना रहे थे। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सोने के भाव में यह सुधार (Correction) लंबे समय से प्रतीक्षित था क्योंकि कीमतें लगातार ऊपरी स्तरों पर टिकी हुई थीं।
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चांदी की कीमतों में भारी मुनाफावसूली- सोने से भी तेज गिरावट
अगर चांदी की बात करें तो इस सप्ताह चांदी के बाजार में सोने की तुलना में कहीं अधिक तेज और आक्रामक गिरावट देखी गई। औद्योगिक मांग में कमी और वैश्विक स्तर पर धातुओं के दामों में आई कमजोरी के कारण चांदी इस हफ्ते 6000 रुपए से लेकर 8000 रुपए प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो गई है।
इस भारी गिरावट के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में एक किलोग्राम चांदी का भाव घटकर लगभग 2.57 रुपए लाख से 2.64 रुपए लाख प्रति किलो के दायरे में पहुंच गया है। चांदी की कीमतों में आई इस तेज गिरावट के पीछे सट्टेबाजों द्वारा की गई भारी मुनाफावसूली (Profit Booking) को एक मुख्य कारण माना जा रहा है।
कीमतों में गिरावट के मुख्य कारण
सोने और चांदी के दामों में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं। मुख्य कारणों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है
| क्र.सं. | प्रमुख कारण | बाजार पर प्रभाव |
| 1. | अंतरराष्ट्रीय मंदी के संकेत | वैश्विक बाजारों में कमजोर मांग के कारण दोनों धातुओं पर दबाव बना। |
| 2. | डॉलर इंडेक्स में मजबूती | अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की खरीदारी महंगी होती है, जिससे मांग घटती है। |
| 3. | घरेलू बाजार में सुस्ती | स्थानीय स्तर पर त्योहारी सीजन के बाद मांग में आई अस्थायी कमी से कीमतों को सहारा नहीं मिल सका। |
| 4. | मुनाफावसूली (Profit Booking) | ऊंचे स्तरों पर निवेशकों ने अपना मुनाफा काटना शुरू किया, जिससे बाजारों में बिकवाली बढ़ी। |
निवेशकों और आम खरीदारों पर क्या होगा असर?
सर्राफा बाजार में आई इस गिरावट के दोतरफा प्रभाव देखने को मिल रहे हैं
- आम उपभोक्ताओं के लिए अवसर- जो लोग गहने खरीदने का मन बना रहे थे उनके लिए यह गिरावट एक बेहतरीन मौका लेकर आई है। प्रति 10 ग्राम पर 2000 रुपए तक की बचत बजट को काफी राहत देने वाली है।
- लंबी अवधि के निवेशकों के लिए नजरिया- कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने और चांदी की बुनियादी स्थिति (Fundamentals) अभी भी मजबूत है। बाजार में आई इस तरह की गिरावट को ‘बाय ऑन डिप्स’ (गिरावट में खरीदारी) के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक बदलावों के बीच सोना हमेशा एक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माना जाता है।
आगे कैसा रहेगा बाजार का रुख?
बाजार के जानकारों के अनुसार आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतें काफी हद तक केंद्रीय बैंकों की नीतियों, ब्याज दरों में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेंगी। यदि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव दोबारा बढ़ता है तो कीमतों में फिर से तेजी आ सकती है। हालांकि अल्पकालिक अवधि (Short-term) में बाजार में कुछ समय के लिए स्थिरता या थोड़ी और नरमी देखने को मिल सकती है जिससे खरीदारों के पास खरीदारी के अच्छे मौके बने रहेंगे।
महत्वपूर्ण नोट- सर्राफा बाजार में सोने और चांदी के भाव रोजाना बदलते हैं। इसके साथ ही अलग-अलग राज्यों, शहरों और ज्वैलर्स के स्तर पर स्थानीय टैक्स, मेकिंग चार्ज और जीएसटी (GST) के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है। कृपया किसी भी प्रकार का लेनदेन या निवेश करने से पहले अपने स्थानीय बाजार या अधिकृत सलाहकार से ताजा दरों की पुष्टि अवश्य कर लें।







