डेलीबार्ता,मध्यप्रदेश। डिंडौरी जिले ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक नया और प्रेरणादायी इतिहास रच दिया है। जिले में एक ही दिन में 48 हजार से अधिक बालिकाओं और महिलाओं का हीमोग्लोबिन परीक्षण कर एक ऐसा रिकॉर्ड स्थापित किया गया है, जिसने न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस अभूतपूर्व उपलब्धि के लिए डिंडौरी जिले का नाम Asia Book of Records और India Book of Records में दर्ज किया गया है। यह उपलब्धि खास इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि यह कार्य एक जनजातीय बहुल और कई दुर्गम क्षेत्रों वाले जिले में किया गया, जहां आज भी नेटवर्क और संसाधनों की सीमाएं चुनौती बनी रहती हैं।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि की औपचारिक जानकारी कन्या शिक्षा परिसर, रयपुरा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से साझा की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की ओर से मौजूद प्रतिनिधि भानु प्रताप सिंह ने रिकॉर्ड का सत्यापन किया और इसे अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड प्रोटोकॉल के अनुसार प्रमाणित किया।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के तहत नवाचार अभियान
यह रिकॉर्ड बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत संचालित नवाचार अभियान “सुगध टूरी – आज स्वस्थ, कल सशक्त” के तहत हासिल किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं और महिलाओं में एनीमिया की पहचान करना, उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समय रहते उपचार की दिशा में कदम उठाना है।
एनीमिया आज भी ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में महिलाओं और किशोरियों की एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। कम हीमोग्लोबिन न केवल शारीरिक विकास को प्रभावित करता है, बल्कि शिक्षा, कार्यक्षमता और मातृत्व स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है। डिंडौरी प्रशासन ने इस समस्या को जड़ से समझते हुए एक दिन में बड़े पैमाने पर हीमोग्लोबिन जांच का निर्णय लिया और इसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
620 विद्यालयों और 9 महाविद्यालयों में एक साथ अभियान
इस महाअभियान को जिले के 620 शासकीय विद्यालयों और 9 महाविद्यालयों में एक साथ संचालित किया गया। सुबह से ही स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीमों ने समन्वय के साथ काम शुरू कर दिया। छात्राओं, किशोरियों और महिलाओं में इस अभियान को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। विद्यालयों में पढ़ने वाली बालिकाओं के साथ-साथ महाविद्यालयों की छात्राओं और आसपास की महिलाओं ने भी इस जांच में बढ़-चढ़कर भाग लिया। स्वास्थ्यकर्मियों ने मौके पर ही हीमोग्लोबिन की जांच की, परिणाम बताए और जरूरत के अनुसार परामर्श भी दिया।
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नो-नेटवर्क और जनजातीय क्षेत्रों में भी हुआ परीक्षण
इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि जिले के कई नो-नेटवर्क और दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में भी हीमोग्लोबिन परीक्षण किए गए। इन इलाकों में डिजिटल कनेक्टिविटी न होने के कारण वहां किए गए परीक्षणों का डाटा अभी अपलोड होना शेष है। अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक आंकड़ों में ही 48 हजार से अधिक परीक्षण दर्ज हो चुके हैं, लेकिन जब शेष डाटा भी शामिल किया जाएगा, तो कुल परीक्षणों की संख्या 50 हजार से अधिक होने की संभावना है।
यही कारण है कि यह उपलब्धि पहले से भी कहीं ज्यादा बड़ी और महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर जांच कर पाना प्रशासनिक क्षमता और जमीनी स्तर पर काम करने वाली टीमों के समर्पण को दर्शाता है।
रिकॉर्ड का औपचारिक सत्यापन
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भानु प्रताप सिंह ने बताया कि एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में हीमोग्लोबिन परीक्षण किया जाना अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड का सत्यापन अंतरराष्ट्रीय मानकों और प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया है और सभी आवश्यक दस्तावेजों, आंकड़ों और प्रक्रियाओं की जांच के बाद ही इसे प्रमाणित किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि डिंडौरी जिले का यह प्रयास न केवल रिकॉर्ड बनाने तक सीमित है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल के रूप में भी देखा जाएगा।
विभागों के सामूहिक प्रयास का परिणाम
इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, जनजातीय कार्य विभाग और जनसंपर्क विभाग की अहम भूमिका रही। सभी विभागों ने आपसी समन्वय के साथ जिम्मेदारियां निभाईं और अभियान को सफल बनाया।
शिक्षा विभाग ने विद्यालयों और महाविद्यालयों में व्यवस्थाएं संभाली, स्वास्थ्य विभाग ने जांच और परामर्श की जिम्मेदारी निभाई, महिला एवं बाल विकास विभाग ने समुदाय से जुड़ाव और जागरूकता बढ़ाने का काम किया, वहीं जनजातीय कार्य विभाग ने दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच सुनिश्चित की। जनसंपर्क विभाग ने अभियान के प्रचार-प्रसार और सूचना संकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रहे ये अधिकारी उपस्थित
कन्या शिक्षा परिसर, रयपुरा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला पंचायत सीईओ, संबंधित एसडीएम, सीएमएचओ, जिला कार्यक्रम अधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने इस उपलब्धि को जिले के लिए गर्व का विषय बताया और इसे टीमवर्क का परिणाम करार दिया।
अधिकारियों ने कहा कि यह रिकॉर्ड केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह जिले की बालिकाओं और महिलाओं के बेहतर भविष्य की ओर उठाया गया एक मजबूत कदम है। स्वास्थ्य से सशक्तिकरण की ओर डिंडौरी जिले की यह उपलब्धि यह संदेश देती है कि यदि स्वास्थ्य पर सही समय पर ध्यान दिया जाए, तो सशक्तिकरण की राह अपने आप खुलती है। स्वस्थ बालिकाएं और महिलाएं न केवल अपने परिवार, बल्कि समाज और देश के विकास में भी अहम भूमिका निभाती हैं।
“सुगध टूरी – आज स्वस्थ, कल सशक्त”
इस अभियान ने यह साबित कर दिया है कि सरकारी योजनाएं यदि नवाचार, समर्पण और जमीनी स्तर पर मजबूत क्रियान्वयन के साथ लागू हों, तो बड़े बदलाव संभव हैं।
जनजातीय अंचलों के लिए मिसाल
स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह उपलब्धि सिर्फ डिंडौरी जिले तक सीमित नहीं है। यह उन सभी जनजातीय और दूरस्थ अंचलों के लिए एक मिसाल है, जहां संसाधनों की कमी के बावजूद इच्छाशक्ति और सही रणनीति से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। डिंडौरी ने यह दिखा दिया है कि जनजातीय क्षेत्रों में भी नवाचार, समर्पण और सामूहिक प्रयासों से अंतरराष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
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गर्व का क्षण, प्रेरणा का स्रोत
कुल मिलाकर, एक ही दिन में 48 हजार से अधिक बालिकाओं और महिलाओं का हीमोग्लोबिन परीक्षण कर एशिया और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराना डिंडौरी जिले के लिए ऐतिहासिक और गर्व का क्षण है। यह उपलब्धि आने वाले समय में अन्य जिलों और राज्यों को भी इसी तरह के नवाचार और अभियानों के लिए प्रेरित करेगी।
डिंडौरी का यह कदम न केवल स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने वाला है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि स्वस्थ समाज ही सशक्त समाज की नींव होता है।







