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मैदान के साइलेंट जज: कैसे बनते हैं क्रिकेट अंपायर और कितनी होती है उनकी कमाई 

कैसे बनते हैं क्रिकेट अंपायर और कितनी होती है उनकी कमाई 
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 30, 2025 6:45 अपराह्न
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कैसे बनते हैं क्रिकेट अंपायर और कितनी होती है उनकी कमाई-क्रिकेट को “जेंटलमैन गेम” कहा जाता है, लेकिन इस खेल की निष्पक्षता और गरिमा को बनाए रखने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी अंपायरों के कंधों पर होती है। खिलाड़ी मैदान में रन और विकेट के लिए संघर्ष करते हैं, जबकि अंपायर हर गेंद पर नियमों की कसौटी पर फैसले सुनाते हैं। आज के समय में क्रिकेट अंपायरिंग केवल शौक नहीं, बल्कि एक सम्मानजनक और पेशेवर करियर विकल्प बन चुका है। कई युवा यह जानना चाहते हैं कि क्रिकेट अंपायर कैसे बना जाए और इस क्षेत्र में कमाई कितनी होती है।

क्रिकेट अंपायर बनने के लिए योग्यता और बुनियादी आवश्यकताएँ

क्रिकेट अंपायर बनने के लिए सबसे पहली आवश्यकता है क्रिकेट के नियमों की गहरी समझ। अंपायर को केवल आउट और नॉट आउट ही नहीं, बल्कि खेल से जुड़े हर तकनीकी पहलू जैसे LBW, नो-बॉल, वाइड, फील्डिंग प्रतिबंध, पावरप्ले, और डीआरएस के नियमों की भी पूरी जानकारी होनी चाहिए।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो आमतौर पर किसी विशेष डिग्री की अनिवार्यता नहीं होती, लेकिन कम से कम 10+2 पास होना लाभदायक माना जाता है। इसके साथ ही व्यक्ति की दृष्टि (आंखों की रोशनी) अच्छी होनी चाहिए और शारीरिक रूप से वह लंबे समय तक मैदान में खड़े रहने में सक्षम हो।

ईमानदारी, निष्पक्षता, आत्मविश्वास और दबाव में सही निर्णय लेने की क्षमता अंपायर के लिए बेहद जरूरी गुण हैं। हजारों दर्शकों और कैमरों के सामने फैसला देना आसान नहीं होता, इसलिए मानसिक मजबूती भी इस पेशे की बुनियाद है।

अंपायर बनने की प्रक्रिया: जिला से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर

अंपायर बनने की यात्रा आमतौर पर जिला स्तर से शुरू होती है। इच्छुक उम्मीदवार सबसे पहले अपने राज्य या जिला क्रिकेट संघ से संपर्क करते हैं। वहां अंपायरिंग से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम और परीक्षाएँ आयोजित की जाती हैं।

प्रशिक्षण के बाद लिखित और प्रायोगिक परीक्षा होती है, जिसमें नियमों की जानकारी और मैदान पर निर्णय क्षमता को परखा जाता है। सफल उम्मीदवारों को स्थानीय और जिला स्तर के मैचों में अंपायरिंग का मौका मिलता है।

इसके बाद प्रदर्शन के आधार पर अंपायर राज्य स्तरीय टूर्नामेंट में नियुक्त किए जाते हैं। राज्य स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले अंपायरों को राष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षाओं में बैठने का अवसर मिलता है।

राष्ट्रीय स्तर पर चयन के बाद अंपायर रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जैसे बड़े घरेलू टूर्नामेंटों में अंपायरिंग करते हैं। यहीं से अंतरराष्ट्रीय अंपायर बनने का रास्ता खुलता है।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट अंपायर बनने की चुनौती और प्रतिष्ठा

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट अंपायर बनना बेहद कठिन लेकिन उतना ही प्रतिष्ठित लक्ष्य होता है। इसके लिए अंपायर को कई वर्षों तक घरेलू क्रिकेट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना पड़ता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चयन के लिए उम्मीदवार को फिटनेस टेस्ट, नियमों की उन्नत परीक्षा और व्यवहारिक मूल्यांकन से गुजरना होता है। इसके बाद उन्हें विदेशी दौरों और अंतरराष्ट्रीय मैचों में तैनाती मिलती है।

अंतरराष्ट्रीय अंपायर सिर्फ मैच का संचालन नहीं करते, बल्कि वे क्रिकेट की वैश्विक छवि के प्रतिनिधि भी होते हैं। एक गलत निर्णय पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन सकता है, इसलिए यहाँ जिम्मेदारी और दबाव दोनों अत्यधिक होते हैं।

इस स्तर पर अंपायरों को आधुनिक तकनीक, डीआरएस सिस्टम, तीसरे अंपायर और वीडियो एनालिसिस के साथ तालमेल बैठाना पड़ता है। अनुभव के साथ-साथ निरंतर सीखते रहना इस पेशे का हिस्सा है।

क्रिकेट अंपायर की कमाई: शौक से प्रोफेशन तक

कमाई के लिहाज से क्रिकेट अंपायरिंग धीरे-धीरे एक आकर्षक करियर बन चुकी है। जिला स्तर पर अंपायरों को प्रति मैच कुछ हजार रुपये का मानदेय मिलता है। यह राशि अनुभव और मैच के स्तर के अनुसार बढ़ती जाती है।

राज्य स्तर पर अंपायरों की कमाई प्रति मैच 10 से 20 हजार रुपये तक हो सकती है। घरेलू बड़े टूर्नामेंटों में यह राशि और अधिक हो जाती है।

राष्ट्रीय स्तर के अंपायरों को सालाना कई लाख रुपये की कमाई हो जाती है, खासकर जब वे नियमित रूप से बड़े टूर्नामेंटों में नियुक्त होते हैं।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट अंपायर इस पेशे के सबसे उच्च स्तर पर होते हैं। एक टेस्ट मैच, वनडे या टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के लिए उन्हें अच्छी-खासी फीस मिलती है। इसके अलावा यात्रा, ठहरने और अन्य सुविधाएँ अलग से प्रदान की जाती हैं। अनुभवी अंतरराष्ट्रीय अंपायर सालाना करोड़ों रुपये तक की कमाई कर सकते हैं।

क्रिकेट अंपायर बनना आसान नहीं, लेकिन यह एक सम्मानजनक, स्थिर और रोमांचक करियर है। यह पेशा उन लोगों के लिए आदर्श है जिन्हें क्रिकेट से गहरा प्रेम है, जो निष्पक्ष निर्णय लेने की क्षमता रखते हैं और दबाव में भी शांत रह सकते हैं।

यदि कोई व्यक्ति धैर्य, अनुशासन और निरंतर सीखने की भावना के साथ इस राह पर चलता है, तो क्रिकेट अंपायरिंग न केवल पहचान दिलाती है बल्कि आर्थिक रूप से भी एक मजबूत भविष्य सुनिश्चित कर सकती है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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