व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

भारत हमारे साथ ऐसा नहीं कर सकता’, ये क्यों बोले डोनाल्ड ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 10, 2025 12:28 पूर्वाह्न
Follow Us:

ट्रंप के बयान ने क्यों बढ़ाई हलचल?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया बयान— “भारत हमारे साथ ऐसा नहीं कर सकता” —तेज़ी से वैश्विक सुर्खियों में आ गया है। यह बयान उस समय सामने आया जब भारत-अमेरिका के बीच व्यापार, वीज़ा नीति और रक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर नई बहस चल रही है। ट्रंप का यह कहना कि भारत “अमेरिका के साथ अनुचित व्यवहार कर रहा है”, एक बार फिर यह संकेत देता है कि वे अपनी पुरानी ट्रेड-पॉलिसी की लाइन पर ही आगे बढ़ रहे हैं, जिसमें उन्होंने भारत को कई बार “टैरिफ किंग” कहा था।
हालांकि यह बयान ऐसे समय आया है जब वर्तमान अमेरिकी प्रशासन भारत के साथ संबंधों को इतिहास के सबसे मजबूत स्तर पर ले जाने की बात करता है। लेकिन ट्रंप की टिप्पणी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर वे भविष्य में फिर से सत्ता में आते हैं, तो भारत-अमेरिका संबंधों पर इसका क्या प्रभाव पड़ सकता है।

भारत हमारे साथ ऐसा नहीं कर सकता

ट्रंप का आरोप: असमान व्यापार और ‘कड़ा जवाब’

ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि भारत कई अमेरिकी उत्पादों पर अत्यधिक आयात शुल्क लगाता है, जबकि अमेरिकी बाज़ार भारतीय उत्पादों के लिए काफी खुला है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इतने बड़े और लाभकारी बाज़ार होने के बावजूद “फेयर डील” नहीं पा रहा। उनके अनुसार भारत अमेरिकी कंपनियों के साथ “अनुचित प्रतिस्पर्धा” कर रहा है और अमेरिका इसका “कड़ा जवाब” देने में सक्षम है। ट्रंप का संदर्भ मुख्य रूप से स्टील, टेक्सटाइल, मोटरसाइकिल, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सर्विसेज जैसे क्षेत्रों से जुड़ा माना जा रहा है। खासकर हार्ले-डेविडसन मोटरसाइकिलों पर लगने वाले आयात शुल्क को वे कई बार मुद्दा बना चुके हैं।
उनका कहना है कि यदि भारत 100% से अधिक टैरिफ लगाता है, तो अमेरिका को भी इसी प्रकार की जवाबी नीति अपनानी चाहिए। इस बयान से यह स्पष्ट झलकता है कि व्यापार संतुलन ट्रंप के लिए 2025-26 की संभावित चुनावी रणनीति का बड़ा मुद्दा है।

भारत की तरफ़ से संभावित प्रतिक्रिया क्या?

भारत ने आधिकारिक रूप से ट्रंप के इस बयान पर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन नीति-विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी व्यापार नीति को “सामरिक स्वायत्तता” के सिद्धांत के तहत संचालित करता है।

भारत का तर्क सामान्यतः यह होता है कि: विकासशील देश होने के नाते कुछ सेक्टरों को सुरक्षा देना ज़रूरी है। अमेरिकी कंपनियाँ भारत के तेज़ी से बढ़ते बाज़ार में बड़े स्तर पर मुनाफा कमा रही हैं। तकनीक, रक्षा और आईटी सहयोग ने दोनों देशों के संबंधों को पहले से अधिक संतुलित बनाया है। भारत की कोशिश रहती है कि ट्रंप जैसे बयानों को चुनावी भाषणों के रूप में देखा जाए और रणनीतिक रिश्तों को उस आधार पर प्रभावित न होने दिया जाए।

क्या बदल सकता है अमेरिका–भारत समीकरण?

ट्रंप का बयान केवल ट्रेड तक सीमित नहीं है; यह उन व्यापक बदलावों की ओर भी इशारा करता है जो उनकी संभावित नीतियों में देखने को मिल सकते हैं। अगर वे दोबारा सत्ता में आते हैं, तो:

  1. संरक्षणवादी व्यापार नीति की वापसी
    ट्रंप ने एक बार फिर संकेत दिया है कि वे अमेरिकी उद्योग को बचाने के नाम पर उच्च टैरिफ और कठोर व्यापार प्रतिबंधों की नीति अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे। भारत पर इसका सीधा असर पड़ सकता है क्योंकि भारत अमेरिका को बड़े पैमाने पर फार्मा, टेक्सटाइल, स्टील और आईटी सर्विसेज निर्यात करता है।
  2. वीज़ा और H-1B पॉलिसी में सख्ती
    ट्रंप प्रशासन के दौरान भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए वीज़ा नियम काफी कड़े हुए थे। उनके बयान से यह आशंका फिर पैदा हुई है कि वे H-1B वीज़ा को “अमेरिकियों की नौकरियाँ बचाने” का मुद्दा बनाकर फिर सख्ती की नीति लागू कर सकते हैं।
  3. रक्षा-सहयोग पर सीमित प्रभाव
    हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका ने रक्षा क्षेत्र में बड़े समझौते किए हैं—ड्रोन डील, जेट इंजन ट्रांसफर, और स्पेस-टेक साझेदारी सहित। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के बयान से इन समझौतों पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा, लेकिन उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति कई क्षेत्रों में बातचीत को कठिन बना सकती है।

Also read – Europe Economic Crisis: यूरोप में आर्थिक अस्थिरता पर बढ़ती चिंता

ट्रंप ऐसा क्यों कह रहे हैं? चुनावी वजहें और घरेलू राजनीति

डोनाल्ड ट्रंप अपने चुनावी भाषणों में अक्सर विदेशी देशों के साथ अमेरिका के व्यापार संबंधों को मुद्दा बनाते रहे हैं। चीन, मैक्सिको, कनाडा, यूरोपीय यूनियन—सभी को उन्होंने कभी न कभी निशाने पर लिया।

भारत पर टिप्पणी के पीछे प्रमुख कारण माना जा रहा है:

  • अमेरिकी उद्योगपतियों और किसानों का दबाव
  • घरेलू नौकरियों की चिंता
  • चुनावी राज्यों में औद्योगिक मतदाताओं को आकर्षित करना
  • विदेशी व्यापार घाटे को बड़ा मुद्दा बनाना

ट्रंप जब कहते हैं कि “भारत हमारे साथ ऐसा नहीं कर सकता,” तो वे अपने समर्थकों को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे अमेरिका को “कमज़ोर समझने वाले देशों” के खिलाफ कड़े कदम उठाएंगे।

भारत-अमेरिका संबंधों की हकीकत: साझेदारी मजबूत लेकिन संवेदनशील

बयान का प्रभाव बड़ा, लेकिन संबंध स्थिर

ट्रंप का यह बयान उनके पुराने व्यापारिक रुख की ही निरंतरता है। वे जिस तरह चीन पर दबाव बनाते रहे, उसी तरह भारत की व्यापार नीति को भी चुनौती दे रहे हैं। हालाँकि, भारत अपने रणनीतिक हितों को समझते हुए इन बयानों को सतर्कता से देख रहा है। बड़े विशेषज्ञों का मानना है कि: यह बयान तत्काल तनाव पैदा नहीं करेगा, लेकिन आने वाले महीनों में व्यापार वार्ता के स्वर बदल सकते हैं। भारत-अमेरिका संबंध चुनावी राजनीति के प्रभाव से अछूते नहीं रहेंगे।

ट्रंप का एक वाक्य—“भारत हमारे साथ ऐसा नहीं कर सकता”— भविष्य की कूटनीति और व्यापार रणनीति को समझने का एक संकेत है, जिसे दोनों देशों को बेहद सावधानी से पढ़ना होगा।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment