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बढ़ती GDP के साथ जापान को शिकस्त देकर भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना 

जापान को शिकस्त देकर भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 1, 2026 1:46 अपराह्न
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जापान को पीछे छोड़ चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का सफर-हाल के वर्षों में वैश्विक आर्थिक मंच पर भारत की धमक स्पष्ट रूप से सुनाई दे रही है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष IMF और विभिन्न रेटिंग एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार भारत ने अपनी विकास दर के दम पर जापान को पीछे छोड़ते हुए विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की उपलब्धि की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। यह केवल एक संख्यात्मक बदलाव नहीं है बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन में एक बड़े बदलाव का संकेत है।

कौन कहाँ खड़ा है

​वर्तमान में वैश्विक जीडीपी नॉमिनल के आधार पर शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं का क्रम इस प्रकार है|

  • ​अमेरिका USA –  लगभग $28 ट्रिलियन के साथ पहले स्थान पर।
  • ​चीन China –  लगभग $18.5 ट्रिलियन के साथ दूसरे स्थान पर।
  • ​जर्मनी Germany – लगभग $4.5 ट्रिलियन के साथ तीसरे स्थान पर हाल ही में जापान को पीछे छोड़ा।
  • ​भारत India –  लगभग $3.9 – $4 ट्रिलियन के साथ चौथे स्थान की ओर अग्रसर।
  • ​जापान Japan – लगभग $4.1 ट्रिलियन धीमी वृद्धि और मुद्रा अवमूल्यन के कारण नीचे खिसकता हुआ।
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भारत ने जापान को कैसे दी शिकस्त

​भारत का जापान से आगे निकलना दो मुख्य कारकों का परिणाम है- 

  • भारत की तीव्र वृद्धि और जापान की संरचनात्मक चुनौतियाँ।
  • ​भारत की ताकत

​जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend)

भारत की औसत आयु 28-29 वर्ष है जबकि जापान दुनिया के सबसे बुजुर्ग देशों में से एक है। भारत के पास विशाल कार्यबल है जो उत्पादन और उपभोग दोनों को बढ़ावा देता है।

​डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर 

डिजिटल इंडिया और UPI जैसे नवाचारों ने असंगठित क्षेत्र को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ा है जिससे पारदर्शिता और उत्पादकता बढ़ी है।

​सरकारी निवेश और सुधार मेक इन इंडिया PLI प्रौद्योगिकी-लिंक्ड प्रोत्साहन योजनाएं और बुनियादी ढांचे सड़क रेलवे पोर्ट्स पर भारी खर्च ने विकास की गति को तेज किया है।

​जापान की कमजोरी

  • ​येन का अवमूल्यन-डॉलर के मुकाबले जापानी येन में भारी गिरावट आई है। चूंकि जीडीपी की गणना डॉलर में होती है, इसलिए जापान की अर्थव्यवस्था का आकार छोटा दिखने लगा है।
  • ​जनसंख्या में गिरावट -जापान की कार्यशील जनसंख्या कम हो रही है जिससे वहां मांग और उत्पादन दोनों में ठहराव (Stagnation) आ गया है।

जीडीपी विकास दर का तुलनात्मक विश्लेषण

​भारत और जापान की विकास दर में जमीन-आसमान का अंतर है-

मानदंड भारत (India)जापान (Japan)
वार्षिक वृद्धि दर7% से 8.2% दुनिया में सबसे तेज0.5% से 1.2% (धीमी गति)
मुद्रा स्थिति रुपया स्थिर है और घरेलू निवेश मजबूत हैयेन कमजोर है और मंदी का खतरा है
मुख्य चालक सेवा क्षेत्र निर्माण और युवा उपभोक्ताउच्च तकनीक और निर्यात लेकिन मांग की कमी

भारत की जीडीपी जहाँ पिछले कुछ वर्षों में लगातार 7% से ऊपर की दर से बढ़ रही है वहीं जापान की वृद्धि दर 1% के आसपास संघर्ष कर रही है। यही कारण है कि भारत ने बहुत कम समय में जापान के साथ $500 बिलियन के अंतर को पाट दिया है।

भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

​भारत के इस उत्थान के पीछे कुछ प्रमुख स्तंभ हैं जिन्हें समझना आवश्यक है|

  • ​ विनिर्माण हब (Manufacturing Hub)-चीन से दुनिया की निर्भरता कम होने China Plus One Strategy का सीधा लाभ भारत को मिल रहा है। एप्पल सैमसंग और माइक्रोन जैसी दिग्गज कंपनियां अब भारत में अपने प्लांट लगा रही हैं।
  • ​विदेशी मुद्रा भंडार और FDI-भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $600 बिलियन से अधिक है जो वैश्विक अस्थिरता के समय सुरक्षा कवच प्रदान करता है। साथ ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश FDI के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष आकर्षक गंतव्यों में से एक है।
  • ​मध्यम वर्ग का विस्तार-​भारत में एक विशाल मध्यम वर्ग उभर रहा है जिसकी क्रय शक्ति Purchasing Power बढ़ रही है। यह घरेलू मांग को जीवित रखता है जिससे वैश्विक मंदी का भारत पर कम असर पड़ता है।

$5 ट्रिलियन का लक्ष्य

​भारत का अगला लक्ष्य 2027-28 तक $5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनना और 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करना है। इसके लिए भारत को निम्नलिखित क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा

  • ​कौशल विकास –  युवाओं को भविष्य की नौकरियों AI डेटा साइंस के लिए तैयार करना।
  • ​कृषि सुधार – कृषि उत्पादकता बढ़ाकर ग्रामीण आय में वृद्धि करना।
  • ​ऊर्जा संक्रमण – आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन और सौर ऊर्जा पर जोर।

​जापान को पछाड़कर चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बनना भारत के लिए एक मील का पत्थर है लेकिन यात्रा यहीं समाप्त नहीं होती। जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरा स्थान प्राप्त करना अब केवल कुछ वर्षों की बात रह गई है। भारत की यह प्रगति न केवल आर्थिक है बल्कि यह करोड़ों लोगों के जीवन स्तर को सुधारने की एक सामूहिक यात्रा है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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