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भारतीय वायुसेना (IAF) का फाइटर जेट सुखोई Su-30MKI असम के पास क्रैश हादसे में वायुसेना के दोनों पायलट की मौत 

भारतीय वायुसेना (IAF) का फाइटर जेट सुखोई Su-30MKI असम के पास क्रैश हादसे में वायुसेना के दोनों पायलट की मौत 
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 6, 2026 2:49 अपराह्न
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सुखोई Su-30MKI भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जाता है। असम और उत्तर-पूर्वी भारत की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यह विमान सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह विमान हादसा भारतीय वायुसेना के इतिहास की एक हृदयविदारक घटना है।

भारतीय वायुसेना सुखोई Su-30MKI हादसा 

भारतीय वायुसेना का ‘सुखोई Su-30MKI’ एक द्वि-इंजन वाला बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है। असम के जोरहाट वायुसेना स्टेशन से नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर निकले एक विमान का रडार से संपर्क टूट गया था। बाद में घने जंगलों में इसका मलबा मिला और यह पुष्टि हुई कि इस दुर्घटना में वायुसेना के दो जांबाज अधिकारियों ने अपनी जान गंवा दी।

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घटनाक्रम – उड़ान से दुर्घटना तक

  • टेक-ऑफ –  विमान ने असम के जोरहाट एयरबेस से सुबह अपनी नियमित ट्रेनिंग उड़ान भरी थी।
  • संपर्क टूटना –  उड़ान भरने के लगभग 40-50 मिनट बाद विमान का रेडियो और रडार संपर्क अचानक टूट गया। विमान उस समय जोरहाट से लगभग 60 किमी उत्तर में था।
  • खोज अभियान – भारतीय वायुसेना, सेना और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत बड़े पैमाने पर ‘सर्च एंड रेस्क्यू’ (SAR) ऑपरेशन शुरू किया। असम की कठिन भौगोलिक स्थिति और खराब मौसम ने इस कार्य में बड़ी बाधा उत्पन्न की।
  • मलबे की प्राप्ति –  कई दिनों की सघन तलाशी के बाद विमान का ब्लैक बॉक्स और मलबा अरुणाचल प्रदेश के घने जंगलों में पाया गया।

शहीद पायलटों का सर्वोच्च बलिदान

इस दुर्घटना में हमने दो होनहार अधिकारियों को खो दिया। वायुसेना के प्रोटोकॉल के अनुसार पायलट अंतिम क्षण तक विमान को सुरक्षित क्षेत्र में ले जाने या उसे बचाने का प्रयास करते हैं। जांच में यह पाया गया कि पायलटों को ‘इजेक्शन’ विमान से बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका जो इस बात का संकेत है कि तकनीकी खराबी बहुत ही अचानक और गंभीर रही होगी।

​यहाँ उन दोनों जांबाज पायलटों का संक्षिप्त विवरण दिया गया है

वीर पायलटों का परिचय

नामपद (Rank)पृष्ठभूमि
अनुजस्क्वाड्रन लीडरएक अनुभवी पायलट जो सुखोई जैसे जटिल विमान को उड़ाने में माहिर थे।
पूर्वेश दुरागकरफ्लाइट लेफ्टिनेंटनागपुर, महाराष्ट्र के निवासी। युवा और ऊर्जावान अधिकारी जिन्होंने कम समय में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई थी।

सुखोई Su-30MKI –  तकनीकी विवरण

सुखोई की जटिलता को समझना महत्वपूर्ण है ताकि हादसे के संभावित कारणों का विश्लेषण किया जा सके।

  • इंजन –  इसमें दो AL-31FP टर्बोफैन इंजन लगे होते हैं।
  • फ्लाई-बाय-वायर (FBW) –” यह विमान पूरी तरह से डिजिटल कंट्रोल सिस्टम पर आधारित है।
  • थ्रस्ट वेक्टरिंग –  इसकी विशेषता इसकी चपलता है जो इसे हवा में किसी भी दिशा में मुड़ने की क्षमता देती है।

दुर्घटना के संभावित कारण – एक गहन जांच

वायुसेना की ‘कोर्ट ऑफ इंक्वायरी’ (CoI) आमतौर पर निम्नलिखित पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करती है-

कारकविवरण
तकनीकी खराबीक्या विमान के फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम में कोई शॉर्ट सर्किट या सॉफ्टवेयर ग्लिच था?
मानवीय चूकक्या पायलटों को स्थानिक भटकाव (Spatial Disorientation) का सामना करना पड़ा?
मौसम की स्थितिअसम और अरुणाचल के पहाड़ों में अचानक आने वाले घने बादल और कम दृश्यता अक्सर घातक सिद्ध होती है।
बर्ड हिटकम ऊंचाई पर उड़ते समय पक्षियों से टकराने की संभावना।

इससे पहले हुए प्रमुख सुखोई (Su-30MKI) क्रैश

​5 मार्च 2026 की घटना से पहले भी सुखोई विमानों के कुछ हादसे हुए हैं। पिछले 2-3 वर्षों की मुख्य घटनाएं इस प्रकार हैं

नासिक, महाराष्ट्र (4 जून 2024)

  • विवरण –  एक सुखोई Su-30MKI विमान महाराष्ट्र के नासिक जिले के शिरसगांव के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
  • पायलट –  सुखद बात यह रही कि इसमें मौजूद दोनों पायलट सुरक्षित रूप से इजेक्ट कर गए थे।
  • कारण –  यह विमान HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) द्वारा ओवरहॉलिंग के बाद परीक्षण उड़ान पर था।

​ मुरैना, मध्य प्रदेश (28 जनवरी 2023)

  • विवरण –  ग्वालियर एयरबेस से उड़ान भरने के बाद मध्य प्रदेश के मुरैना में एक सुखोई-30 और एक मिराज-2000 विमान आपस में टकरा (Mid-air collision) गए थे।
  • परिणाम –  सुखोई के दोनों पायलट सुरक्षित इजेक्ट कर गए थे, लेकिन मिराज के पायलट शहीद हो गए थे।

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​तेजपुर, असम (मई 2017)

  • विवरण –  इससे पहले भी असम के तेजपुर के पास एक सुखोई विमान क्रैश हुआ था, जिसमें दो पायलट शहीद हुए थे। उस समय भी खराब मौसम और तकनीकी कारणों को जांच का विषय बनाया गया था।

सुखोई Su-30MKI का संक्षिप्त इतिहास

​भारत के पास लगभग 260+ सुखोई विमानों का बेड़ा है। हालांकि कुछ हादसे हुए हैं लेकिन विमान की संख्या और उड़ान के घंटों के अनुपात में इसका सुरक्षा रिकॉर्ड काफी बेहतर माना जाता है।

  • निर्माता –  रूस (डिजाइन) और HAL (भारत में निर्मित)।
  • खासियत –  यह “4.5 जनरेशन” का मल्टीरोल फाइटर जेट है जो हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमला करने में सक्षम है।

नोट –  वायुसेना हर हादसे के बाद ‘कोर्ट ऑफ इंक्वायरी’ (Court of Inquiry) का आदेश देती है ताकि दुर्घटना के सटीक कारणों (तकनीकी खराबी या मानवीय चूक) का पता लगाया जा सके।

असम और उत्तर-पूर्व का सामरिक महत्व

तेजपुर एयरबेस चीन की सीमा (LAC) के करीब होने के कारण भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ सुखोई की तैनाती का उद्देश्य त्वरित प्रतिक्रिया (Quick Reaction) सुनिश्चित करना है। इस तरह के हादसों से न केवल जनहानि होती है बल्कि वायुसेना की परिचालन क्षमता पर भी अस्थायी प्रभाव पड़ता है।

कारकविवरण
तकनीकी खराबीक्या विमान के फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम में कोई शॉर्ट सर्किट या सॉफ्टवेयर ग्लिच था?
मानवीय चूकक्या पायलटों को स्थानिक भटकाव (Spatial Disorientation) का सामना करना पड़ा?
मौसम की स्थितिअसम और अरुणाचल के पहाड़ों में अचानक आने वाले घने बादल और कम दृश्यता अक्सर घातक सिद्ध होती है।
बर्ड हिटकम ऊंचाई पर उड़ते समय पक्षियों से टकराने की संभावना।

सुरक्षा उपाय और भविष्य की राह

इस हादसे के बाद भारतीय वायुसेना ने कई कदम उठाए हैं

  • फ्लीट निरीक्षण – सभी सुखोई विमानों की तकनीकी जांच का विशेष अभियान।
  • रखरखाव में सुधार –  ‘हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड’ (HAL) के साथ मिलकर इंजन और एवियोनिक्स की सर्विसिंग को और कड़ा करना।
  • ट्रेनिंग सिमुलेटर –  पायलटों को आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए और अधिक उन्नत सिमुलेटर ट्रेनिंग देना।

असम में हुआ यह सुखोई हादसा हमें याद दिलाता है कि शांति काल में भी हमारे सैनिक और पायलट अपनी जान जोखिम में डालकर देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अभ्यास करते हैं। शहीद पायलटों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा क्योंकि हर जांच से प्राप्त सबक भविष्य की उड़ानों को सुरक्षित बनाने में मदद करता है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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