चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार एंड्रयू कुओमो को हराकर-न्यूयॉर्क शहर के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। भारतीय मूल के ज़ोहरान ममदानी (Zohran Mamdani) ने एक अभूतपूर्व जीत हासिल करते हुए न्यूयॉर्क के 112वें मेयर के रूप में शपथ ली है। उन्होंने न केवल अनुभवी राजनीतिज्ञों को पछाड़ा बल्कि तीन बार के गवर्नर रहे एंड्रयू कुओमो (Andrew Cuomo) को भी करारी शिकस्त दी।
ऐतिहासिक जीत- कब और कैसे बने मेयर?
ज़ोहरान ममदानी ने 4 नवंबर, 2025 को आयोजित न्यूयॉर्क मेयर चुनाव के मुख्य मुकाबले में जीत हासिल की। उन्होंने 1 जनवरी 2026 को आधिकारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। इस चुनाव की सबसे बड़ी बात यह थी कि ममदानी ने एंड्रयू कुओमो को दो बार हराया-
पहली हार (जून 2025)
डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में ममदानी ने कुओमो को लगभग 13 अंकों के अंतर से हराकर पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार बनने का गौरव प्राप्त किया।
दूसरी हार (नवंबर 2025)-
प्राइमरी में हारने के बाद कुओमो ने ‘निर्दलीय’ (Independent) उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा लेकिन आम चुनाव में भी ममदानी ने उन्हें 50% से अधिक वोट हासिल कर पराजित किया।
किस पार्टी से हैं और उम्र क्या है?
पार्टी- ज़ोहरान ममदानी डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य हैं। वे खुद को एक ‘डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट’ (Democratic Socialist) के रूप में पहचानते हैं।
उम्र- मेयर बनते समय उनकी उम्र मात्र 34 वर्ष (जन्म- 18 अक्टूबर, 1991) थी। वे न्यूयॉर्क शहर के इतिहास के सबसे युवा मेयरों में से एक और पिछली एक सदी के सबसे कम उम्र के मेयर बन गए हैं।
भारतीय मूल और पारिवारिक पृष्ठभूमि
ज़ोहरान ममदानी का संबंध भारत और युगांडा दोनों से है-
माता-पिता- उनकी माँ विश्व प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक मीरा नायर (Mira Nair) हैं और पिता प्रसिद्ध शिक्षाविद और कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर महमूद ममदानी हैं।
जन्म और नागरिकता- उनका जन्म युगांडा के कंपाला में हुआ था। वे 7 साल की उम्र में अपने परिवार के साथ न्यूयॉर्क आए।
उन्होंने साल 2018 में अमेरिका की नागरिकता प्राप्त की।
राजनीतिक सफर – एक कार्यकर्ता से मेयर तक
ममदानी की राजनीति की शुरुआत ज़मीनी स्तर के संघर्षों से हुई-
- शुरुआती काम-राजनीति में आने से पहले वे एक ‘हाउजिंग काउंसलर’ के रूप में काम करते थे जहाँ वे गरीब लोगों को उनके घर खाली कराए जाने (Foreclosure) से बचाने में मदद करते थे।
- स्टेट असेंबली –साल 2020 में वे पहली बार क्वींस (Queens) के एस्टोरिया इलाके से न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के लिए चुने गए। वे वहां से लगातार तीन बार विधायक रहे।
- मुद्दे-उनका पूरा अभियान ‘एफोर्डेबिलिटी’ (किफायती जीवन) पर केंद्रित था। उन्होंने “Fast and Free Bus” (मुफ्त बस सेवा) और “Rent Freeze” (किराया न बढ़ाना) जैसे वादों से युवाओं और कामकाजी वर्ग का दिल जीता।
शपथ ग्रहण समारोह से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
कुरान पर शपथ -ज़ोहरान न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर हैं। उन्होंने न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी की ऐतिहासिक ‘कुरान’ पर हाथ रखकर शपथ ली।
अनोखी जगह-उन्होंने अपना निजी शपथ ग्रहण समारोह मैनहट्टन के एक पुराने, बंद पड़े सबवे स्टेशन (Old City Hall Station) में किया जो न्यूयॉर्क के बुनियादी ढांचे और कामकाजी लोगों के प्रति उनके सम्मान का प्रतीक था।
डोनाल्ड ट्रंप से मुकाबला
चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें “कम्युनिस्ट” कहकर उनकी आलोचना की थी और न्यूयॉर्क का फंड रोकने की धमकी दी थी लेकिन ममदानी ने इन चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया।
राजनीतिक विचारधारा और चुनौतियां
ज़ोहरान ममदानी की जीत न्यूयॉर्क में एक वैचारिक बदलाव का संकेत है। उनके मुख्य एजेंडे में शामिल हैं
- किराया नियंत्रण- न्यूयॉर्क के लाखों किरायेदारों के लिए किराए को स्थिर रखना।
- सार्वजनिक परिवहन- बस यात्रा को मुफ्त और तेज बनाना।
- अमीर वर्ग पर टैक्स- शहर की जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए बड़े कॉर्पोरेशन और अमीरों पर अधिक टैक्स लगाने का प्रस्ताव।
ज़ोहरान ममदानी की जीत केवल एक चुनाव की जीत नहीं है बल्कि यह न्यूयॉर्क की राजनीति में “राजनीतिक वंशवाद” (Cuomo परिवार जैसे) के अंत और “जन आंदोलन” की शुरुआत मानी जा रही है। एक भारतीय मूल के अप्रवासी का दुनिया के सबसे शक्तिशाली शहर का मेयर बनना वैश्विक स्तर पर गौरव की बात है।
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