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ब्रिक्स मंच पर भारत की कूटनीतिक बढ़त पाकिस्तान के करीबी देश से बदले समीकरण

ब्रिक्स मंच पर भारत की कूटनीतिक बढ़त पाकिस्तान के करीबी देश से बदले समीकरण
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 10, 2026 8:40 अपराह्न
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दुनिया की राजनीति तेजी से बदल रही है और इसी बदलते परिदृश्य में भारत ने एक बार फिर यह संकेत दे दिया है कि वह अब केवल प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं रहा, बल्कि घटनाओं की दिशा तय करने की क्षमता भी रखता है। पाकिस्तान के जिस मित्र देश को लंबे समय तक दक्षिण एशिया की राजनीति में भारत-विरोधी खेमे का अहम हिस्सा माना जाता रहा, उसी के साथ भारत ने नए सिरे से संवाद और सहयोग का रास्ता खोल दिया है। इस पूरी प्रक्रिया के केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वह कूटनीतिक सोच है, जिसे अब ‘ब्रिक्स वाली चाल’ के रूप में देखा जा रहा है। यह चाल न तो अचानक थी और न ही भावनाओं से प्रेरित, बल्कि इसके पीछे गहरी रणनीति और दीर्घकालिक लक्ष्य छिपे हुए हैं।

ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंच ने भारत को यह अवसर दिया कि वह वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूती से रखे और उन देशों के साथ नए समीकरण बनाए, जो अब तक किसी एक ध्रुव के प्रभाव में माने जाते थे। इसी मंच का उपयोग करते हुए भारत ने यह संदेश दिया कि वह सहयोग और विकास की राजनीति में विश्वास करता है, न कि पुराने गुटबाजी वाले नजरिये में। यही कारण है कि पाकिस्तान के करीबी माने जाने वाले देश के साथ भी भारत के रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू होता दिख रहा है। यह बदलाव केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे क्षेत्रीय संतुलन पर पड़ता नजर आ रहा है।

ब्रिक्स मंच पर मोदी की रणनीतिक चाल

ब्रिक्स अब केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं का मंच भर नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाला एक अहम मंच बन चुका है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मंच का इस्तेमाल बेहद संतुलित और व्यावहारिक तरीके से किया। उन्होंने विकास, व्यापार, निवेश और वैश्विक दक्षिण के साझा हितों की बात करते हुए उन देशों को भी भरोसे में लिया, जो पारंपरिक रूप से भारत के बहुत नजदीक नहीं माने जाते थे। इसी रणनीति के तहत पाकिस्तान के मित्र देश के साथ संवाद का दायरा बढ़ाया गया।

यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे भारत ने अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान की कूटनीतिक बढ़त को सीमित कर दिया। जिस देश को पाकिस्तान अपने रणनीतिक समर्थन के तौर पर पेश करता रहा, उसी के साथ भारत का बढ़ता संवाद यह संकेत देता है कि वैश्विक राजनीति अब केवल पुराने दोस्त-दुश्मन के फ्रेम में नहीं चल रही। ब्रिक्स मंच पर भारत ने यह दिखाया कि वह आर्थिक सहयोग और विकास की भाषा में बात करता है, जो आज के दौर में सबसे प्रभावी कूटनीतिक हथियार बन चुका है।

मोदी की इस चाल में आक्रामकता की जगह संतुलन दिखाई देता है। उन्होंने किसी देश को सीधे चुनौती देने के बजाय सहयोग का प्रस्ताव रखा। यही वजह है कि यह कूटनीति ज्यादा असरदार साबित होती नजर आ रही है। ब्रिक्स के माध्यम से भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थक है, जहां हर देश को अपने विकास का अवसर मिले और किसी एक शक्ति का वर्चस्व न हो।

क्षेत्रीय राजनीति पर असर और पाकिस्तान की असहजता

भारत की इस कूटनीतिक पहल का सबसे बड़ा असर क्षेत्रीय राजनीति पर पड़ता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान के लिए यह स्थिति असहज करने वाली है, क्योंकि जिस देश को वह लंबे समय से अपना भरोसेमंद मित्र मानता रहा, वही अब भारत के साथ नए समीकरण बनाने को तैयार नजर आ रहा है। इससे पाकिस्तान की उस रणनीति को झटका लगा है, जिसमें वह भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घेरने की कोशिश करता रहा है।

दक्षिण एशिया और उससे जुड़े क्षेत्रों में भारत की बढ़ती सक्रियता यह दिखाती है कि वह अब केवल अपनी सीमाओं तक सीमित सोच नहीं रखता, बल्कि व्यापक भू-राजनीतिक नजरिये के साथ आगे बढ़ रहा है। ब्रिक्स के जरिए भारत ने यह संदेश भी दिया कि विकास और सहयोग की राजनीति में शामिल होने वाले देशों को ज्यादा लाभ मिल सकता है। यह संदेश उन देशों के लिए भी है, जो अब तक पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता देते आए हैं।

इस पूरी प्रक्रिया में भारत ने यह सावधानी भी बरती है कि वह किसी को सार्वजनिक रूप से अपमानित या अलग-थलग न करे। यही उसकी कूटनीति की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरती है। सहयोग की भाषा, साझा विकास के लक्ष्य और बहुपक्षीय मंचों का सही इस्तेमाल—इन तीनों ने मिलकर भारत को एक मजबूत स्थिति में खड़ा कर दिया है।

कुल मिलाकर, पाकिस्तान के दोस्त को साधने की यह कहानी केवल एक देश के साथ रिश्तों तक सीमित नहीं है। यह उस नई भारतीय कूटनीति का संकेत है, जिसमें आत्मविश्वास, रणनीति और वैश्विक सोच साफ नजर आती है। प्रधानमंत्री मोदी की ‘ब्रिक्स वाली चाल’ ने यह दिखा दिया है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति में केवल दर्शक नहीं, बल्कि एक सक्रिय और प्रभावशाली खिलाड़ी की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। आने वाले समय में इस चाल का असर और गहराता दिख सकता है, और दक्षिण एशिया से लेकर वैश्विक मंचों तक इसके दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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