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15 फरवरी को मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय बचपन कैंसर दिवस 

15 फरवरी को मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय बचपन कैंसर दिवस 
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 15, 2026 1:49 अपराह्न
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हर साल 15 फरवरी को दुनिया भर में ‘अंतर्राष्ट्रीय बचपन कैंसर दिवस’ मनाया जाता है। यह दिन उन बच्चों और किशोरों के प्रति एकजुटता दिखाने का है जो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे हैं, साथ ही उन सर्वाइवर्स और उनके परिवारों को सम्मानित करने का है जिन्होंने इस जंग को जीता है।

इतिहास और महत्व

इस दिवस की शुरुआत वर्ष 2002 में चाइल्डहुड कैंसर इंटरनेशनल (CCI) द्वारा की गई थी। CCI 90 से अधिक देशों के 170 से अधिक नेटवर्क का एक वैश्विक संघ है।

  • उद्देश्य-  बचपन के कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
  • समानता-  यह सुनिश्चित करना कि दुनिया के हर बच्चे को, चाहे उसकी आर्थिक स्थिति या भौगोलिक स्थिति कुछ भी हो, सर्वोत्तम उपचार मिले।
  • समर्थन – उन परिवारों को मनोवैज्ञानिक और सामाजिक सहायता प्रदान करना जो इस कठिन दौर से गुजर रहे हैं।

बचपन के कैंसर के आँकड़े-  एक वैश्विक नज़र

बचपन का कैंसर वयस्कों के कैंसर से काफी अलग होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार-

  • हर साल दुनिया भर में लगभग 4,00,000 बच्चे और किशोर (0-19 वर्ष) कैंसर से पीड़ित होते हैं।
  • उच्च आय वाले देशों में उपचार की सफलता दर 80% से अधिक है।
  • इसके विपरीत, निम्न और मध्यम आय वाले देशों में जीवित रहने की दर केवल 20% के आसपास रह जाती है।

बचपन के कैंसर के मुख्य प्रकार

बच्चों में होने वाले कैंसर वयस्कों की तरह जीवनशैली या पर्यावरण से सीधे जुड़े नहीं होते। सबसे आम प्रकार निम्नलिखित हैं

  • ल्यूकेमिया (Leukemia) – यह रक्त का कैंसर है और बच्चों में सबसे आम है। यह अस्थि मज्जा (Bone Marrow) को प्रभावित करता है।
  • मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर (Brain Tumors)-  यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।
  • लिम्फोमा (Lymphoma) – यह लसीका प्रणाली (Lymph system) को प्रभावित करता है।
  • न्यूरोब्लास्टोमा (Neuroblastoma) – यह आमतौर पर अधिवृक्क ग्रंथियों (Adrenal glands) में शुरू होता है।
  • विल्म्स ट्यूमर (Wilms Tumor) –  यह किडनी (गुर्दे) का कैंसर है।
  • रेटिनोब्लास्टोमा (Retinoblastoma) –  यह आँखों का कैंसर है जो शुरुआती बचपन में पाया जाता है।

प्रारंभिक लक्षण और पहचान (Early Warning Signs)

बचपन के कैंसर का जल्द पता चलना ही जीवन बचाने की कुंजी है। माता-पिता को इन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए

  • अचानक वजन कम होना-  बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन का गिरना।
  • हड्डियों में दर्द-  विशेष रूप से रात के समय जोड़ों या हड्डियों में लगातार दर्द।
  • गांठ या सूजन –  शरीर के किसी भी हिस्से (गर्दन, पेट, बगल) में बिना दर्द वाली गांठ।
  • दृष्टि में बदलाव – आँखों की पुतली में सफेद चमक (Flashlight में सफेद दिखना)।
  • अत्यधिक थकान – बच्चा खेलने-कूदने के बजाय हमेशा थका हुआ महसूस करे।
  • बुखार – लंबे समय तक रहने वाला बुखार जो सामान्य दवाओं से ठीक न हो।
  • त्वचा में बदलाव – बार-बार चोट के निशान पड़ना या मसूड़ों से खून आना।

उपचार की आधुनिक विधियाँ

आज चिकित्सा विज्ञान ने काफी प्रगति की है। मुख्य उपचारों में शामिल हैं

  • कीमोथेरेपी (Chemotherapy) –  कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए शक्तिशाली दवाओं का उपयोग।
  • सर्जरी (Surgery) –  ट्यूमर को शरीर से बाहर निकालना।
  • रेडियोथेरेपी (Radiotherapy) –  उच्च ऊर्जा वाली किरणों का उपयोग।
  • इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy) – शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर से लड़ने के लिए सक्रिय करना।
  • अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण (Bone Marrow Transplant) –  क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को स्वस्थ कोशिकाओं से बदलना।

चुनौतियाँ और समाधान

चुनौतियाँ

  • देर से निदान – ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण बीमारी अंतिम चरणों में पता चलती है।
  • महंगा इलाज –  कैंसर का उपचार बहुत खर्चीला होता है, जिससे गरीब परिवार पीछे हट जाते हैं।
  • मानसिक स्वास्थ्य-  बीमारी का बच्चे और माता-पिता के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

समाधान

  • सरकारी योजनाएं – आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से मुफ्त इलाज।
  • एनजीओ की भूमिका – कई संस्थाएं रहने, खाने और दवाइयों में सहायता करती हैं।
  • परामर्श (Counseling) – बच्चों के लिए प्ले थेरेपी और माता-पिता के लिए मनोवैज्ञानिक सत्र।

 समाज की जिम्मेदारी-  हम क्या कर सकते हैं?

  • रक्तदान-  कैंसर के मरीजों को अक्सर प्लेटलेट्स और रक्त की आवश्यकता होती है।
  • फंडिंग-  मान्यता प्राप्त संस्थाओं को दान दें।
  • जागरूकता फैलाएं—सोशल मीडिया और समुदायों में लक्षणों के बारे में जानकारी साझा करें।
  • सर्वाइवर्स का साथ –  कैंसर को मात देने वाले बच्चों को समाज में बिना किसी भेदभाव के अपनाएं।

अंतर्राष्ट्रीय बचपन कैंसर दिवस केवल एक कैलेंडर तिथि नहीं है, बल्कि यह एक संकल्प है। कोई भी बच्चा कैंसर से मरने के लिए पैदा नहीं हुआ है। यदि हम सही समय पर सही इलाज और प्यार प्रदान करें, तो अधिकांश बच्चों को एक स्वस्थ भविष्य दिया जा सकता है।

“कैंसर एक शब्द है, कोई सजा नहीं। साहस और विज्ञान के साथ हम इसे बदल सकते हैं।”

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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