यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक विषय है। 11 फरवरी को दुनिया भर में “विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस” (International Day of Women and Girls in Science) के रूप में मनाया जाता है।
विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस – एक विस्तृत विश्लेषण
विज्ञान और तकनीक किसी भी सभ्यता की प्रगति के स्तंभ होते हैं। सदियों से मानवता ने प्रकृति के रहस्यों को सुलझाने के लिए जिज्ञासा का सहारा लिया है। हालांकि, इतिहास के पन्नों को पलटें तो विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को अक्सर हाशिए पर रखा गया या उन्हें उचित श्रेय नहीं दिया गया। इसी असमानता को पाटने और विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्रों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हर साल 11 फरवरी को यह विशेष दिवस मनाया जाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और घोषणा
इस दिवस की स्थापना का सफर संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रयासों से शुरू हुआ।
- घोषणा – 22 दिसंबर 2015 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने संकल्प 70/212 पारित किया।
- उद्देश्य – विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महिलाओं और लड़कियों की पूर्ण और समान पहुंच और भागीदारी को बढ़ावा देना।
- प्रथम आयोजन – यह पहली बार 11 फरवरी 2016 को मनाया गया।
- संचालन – यह दिवस मुख्य रूप से UNESCO और UN-Women द्वारा विभिन्न सरकारों, नागरिक समाज और निजी संगठनों के सहयोग से आयोजित किया जाता है।
यह दिवस क्यों मनाया जाता है? (मुख्य कारण)
इस दिवस को मनाने के पीछे कई ठोस सामाजिक और आर्थिक कारण हैं
1. लैंगिक अंतराल (Gender Gap) को समाप्त करना
दुनिया भर में शोधकर्ताओं में महिलाओं की संख्या 30% से भी कम है। उच्च शिक्षा में, STEM क्षेत्रों में महिला नामांकन दर मात्र 35% के आसपास है। इस दिवस का उद्देश्य इस खाई को भरना है।
2. रूढ़िवादिता को तोड़ना
समाज में यह धारणा घर कर गई थी कि ‘विज्ञान और गणित पुरुषों के विषय हैं’। यह दिवस समाज को यह याद दिलाता है कि मेधा और बुद्धि का लिंग से कोई संबंध नहीं है।
3. सतत विकास लक्ष्य (SDG) की प्राप्ति
संयुक्त राष्ट्र के ‘सतत विकास लक्ष्य 5’ (लैंगिक समानता) और ‘लक्ष्य 9’ (नवाचार और बुनियादी ढांचा) को प्राप्त करने के लिए विज्ञान में महिलाओं का होना अनिवार्य है।
STEM क्षेत्र में महिलाओं की वर्तमान स्थिति
STEM का अर्थ है Science, Technology, Engineering, and Mathematics। वर्तमान डेटा के अनुसार –
| क्षेत्र | महिलाओं की भागीदारी (अनुमानित) |
| वैश्विक शोधकर्ता | ~33% |
| इंजीनियरिंग स्नातक | ~28% |
| आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) | ~22% |
| कंप्यूटर विज्ञान | ~19% |
यह आंकड़े बताते हैं कि प्रगति तो हुई है, लेकिन गंतव्य अभी भी दूर है।
विज्ञान में महिलाओं के सामने प्रमुख चुनौतियाँ
आखिर क्यों महिलाएं विज्ञान के क्षेत्र से दूर रह जाती हैं? इसके कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं
- लीकी पाइपलाइन (Leaky Pipeline) – कई लड़कियां स्कूल में विज्ञान चुनती हैं, लेकिन कॉलेज या करियर तक पहुंचते-पहुंचते पारिवारिक दबाव या सामाजिक अपेक्षाओं के कारण क्षेत्र बदल लेती हैं।
- ग्लास सीलिंग (Glass Ceiling) – कार्यस्थलों पर महिलाओं को उच्च पदों (जैसे CEO या लैब हेड) तक पहुंचने में अदृश्य बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
- वेतन विसंगति – समान योग्यता और पद के बावजूद, कई देशों में महिला वैज्ञानिकों को उनके पुरुष समकक्षों की तुलना में कम वेतन मिलता है।
- रोल मॉडल की कमी – पाठ्यपुस्तकों में महिला वैज्ञानिकों (जैसे मैरी क्यूरी के अलावा अन्य) का उल्लेख कम होना, जिससे लड़कियों को प्रेरणा कम मिल पाती है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य – महिला वैज्ञानिकों का गौरवशाली इतिहास
भारत ने विज्ञान के क्षेत्र में कई महान विदुषियों को जन्म दिया है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई:
- आनंदीबाई जोशी – भारत की पहली महिला डॉक्टर।
- असीमा चटर्जी – रसायन विज्ञान में डॉक्टरेट पाने वाली पहली भारतीय महिला, जिन्होंने मलेरिया रोधी दवाओं पर काम किया।
- जानकी अम्माल – एक प्रसिद्ध वनस्पति शास्त्री (Botanist)।
- टेसी थॉमस – जिन्हें भारत की ‘मिसाइल वुमन’ कहा जाता है।
- रितु करिधाल और मुथैया वनिता -. इसरो के ‘चंद्रयान-2’ और ‘मंगलयान’ मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली महिलाएं।
यह दिवस किस प्रकार खास है?
यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक कॉल-टू-एक्शन (Call to Action) है।
- जागरूकता अभियान – इस दिन दुनिया भर में सेमिनार, कार्यशालाएं और विज्ञान प्रदर्शनियां आयोजित की जाती हैं।
- छात्रवृत्ति की घोषणा – कई सरकारें और विश्वविद्यालय इस दिन छात्राओं के लिए विशेष STEM छात्रवृत्ति (Scholarships) शुरू करते हैं।
- मेंटरशिप प्रोग्राम – अनुभवी महिला वैज्ञानिक युवा छात्राओं का मार्गदर्शन करती हैं।
सरकार और संगठनों की भूमिका
STEM में महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं
- किरण (KIRAN) योजना – महिला वैज्ञानिकों को अनुसंधान के अवसर प्रदान करना।
- विज्यान ज्योति – छात्राओं को STEM करियर की ओर आकर्षित करने के लिए एक विशेष पहल।
- GATI (Gender Advancement for Transforming Institutions) – संस्थानों में लैंगिक समानता का आकलन करने के लिए।
भविष्य की राह – हम क्या कर सकते हैं?
विज्ञान में महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है
- प्रारंभिक शिक्षा – बचपन से ही लड़कियों को खिलौनों और गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान के प्रति प्रेरित करना।
- सुरक्षित कार्यस्थल – शोध संस्थानों और प्रयोगशालाओं में महिलाओं के अनुकूल नीतियां बनाना।
- कहानियों का प्रसार – अधिक से अधिक महिला वैज्ञानिकों की सफलता की कहानियों को साझा करना।
11 फरवरी हमें याद दिलाता है कि विज्ञान को “पूर्ण” होने के लिए विविधता की आवश्यकता है। जब एक महिला वैज्ञानिक किसी समस्या का समाधान ढूंढती है, तो वह केवल एक सूत्र नहीं खोजती, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक नया रास्ता बनाती है। मानवता की समस्याओं (जैसे जलवायु परिवर्तन, महामारियां) का समाधान तभी संभव है जब दुनिया की आधी आबादी यानी महिलाएं भी अनुसंधान की मेज पर पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बैठें।
“विज्ञान के पास कोई लिंग नहीं होता, लेकिन विज्ञान को महिलाओं की ज़रूरत है।”







