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International Mother Language Day- 21 फरवरी को विश्व भर में मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस   

International Mother Language Day- 21 फरवरी को विश्व भर में मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस   
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 19, 2026 6:04 अपराह्न
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भाषा केवल संवाद का साधन नहीं है, बल्कि यह किसी भी समाज की संस्कृति, इतिहास और उसकी पहचान का आधार होती है। 21 फरवरी को दुनिया भर में मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (International Mother Language Day) इसी महत्व को रेखांकित करता है।

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (International Mother Language Day) का परिचय

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस हर साल 21 फरवरी को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देना और मातृभाषाओं के प्रति जागरूकता फैलाना है।

  • घोषणा –  यूनेस्को (UNESCO) द्वारा 17 नवंबर, 1999 को।
  • औपचारिक स्वीकृति – संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2002 के अपने प्रस्ताव में इसका स्वागत किया।
  • प्रथम आयोजन – वर्ष 2000 में पहली बार इसे वैश्विक स्तर पर मनाया गया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि –  ढाका से पेरिस तक

इस दिवस को मनाने के पीछे एक लंबा और बलिदानपूर्ण संघर्ष छिपा है। इसकी जड़ें बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) के ‘भाषा आंदोलन’ से जुड़ी हैं।

भाषा आंदोलन (1952)

1947 में विभाजन के बाद पाकिस्तान के दो हिस्से थे पश्चिमी और पूर्वी। 1948 में तत्कालीन सरकार ने ‘उर्दू’ को एकमात्र आधिकारिक भाषा घोषित कर दिया, जबकि पूर्वी पाकिस्तान की बहुसंख्यक आबादी बांग्ला बोलती थी।

21 फरवरी 1952 को, ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों और कार्यकर्ताओं ने अपनी मातृभाषा ‘बांग्ला’ के सम्मान के लिए विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस की गोलीबारी में कई प्रदर्शनकारी (जैसे रफ़ीक, बरकत, जब्बार और सलाम) शहीद हो गए। यह दुनिया के इतिहास में संभवतः इकलौता उदाहरण है जहाँ लोगों ने अपनी भाषा के लिए प्राण त्यागे।

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यूनेस्को की मान्यता

कनाडा में रहने वाले दो अनिवासी बांग्लादेशी, रफीकुल इस्लाम और अब्दुस सलाम ने 1998 में तत्कालीन संयुक्त राष्ट्र महासचिव को पत्र लिखकर भाषाई अधिकारों की रक्षा के लिए एक अंतरराष्ट्रीय दिवस की मांग की। अंततः यूनेस्को ने 21 फरवरी को इस ऐतिहासिक बलिदान की याद में ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ के रूप में चुन लिया।

मातृभाषा का महत्व –  क्यों जरूरी है यह?

मातृभाषा वह पहली भाषा है जिसे बच्चा अपने परिवार और परिवेश से सीखता है। यह उसके संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) का आधार है।

महत्व का क्षेत्र व विवरण 

  • शिक्षा  –  शोध बताते हैं कि बच्चे अपनी मातृभाषा में अवधारणाओं (Concepts) को अधिक तेज़ी से और गहराई से समझते हैं। 
  • सांस्कृतिक पहचान  – भाषा में लोकगीत, मुहावरे और परंपराएं जीवित रहती हैं। भाषा खत्म होने का अर्थ है एक पूरी संस्कृति का विलुप्त होना। 
  • बौद्धिक विकास  –  बहुभाषावाद (Multilingualism) मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। 
  • समावेशी विकास  – मातृभाषा में जानकारी मिलने पर समाज का अंतिम व्यक्ति भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ पाता है। 

वैश्विक भाषा संकट – चिंताजनक आँकड़े

दुनिया में लगभग 7,000 से अधिक भाषाएं बोली जाती हैं, लेकिन इनमें से कई अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं।

  • विलुप्ति की कगार पर – यूनेस्को के अनुसार, दुनिया की लगभग 43% भाषाएं लुप्तप्राय (Endangered) हैं।
  • डिजिटल डिवाइड –  इंटरनेट पर मौजूद सामग्री का एक बड़ा हिस्सा मात्र कुछ ही भाषाओं (जैसे अंग्रेजी, चीनी, स्पेनिश) तक सीमित है।
  • हर दो हफ्ते में एक भाषा की मृत्यु –  औसतन, हर 15 दिनों में एक भाषा दुनिया से गायब हो जाती है, और उसके साथ ही उससे जुड़ी एक अद्वितीय मौखिक विरासत भी खत्म हो जाती है।

भारत का परिदृश्य –  भाषाई विविधता का महासागर

भारत दुनिया के सबसे अधिक भाषाई विविधता वाले देशों में से एक है। भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में वर्तमान में 22 प्रमुख भाषाओं को स्थान दिया गया है, लेकिन यहाँ सैकड़ों बोलियां और मातृभाषाएं हैं।

पीपुल्स लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया (PLSI) –  इसके अनुसार भारत में लगभग 780 भाषाएं हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 –  भारत सरकार ने शिक्षा में मातृभाषा के महत्व को स्वीकार करते हुए प्राथमिक शिक्षा (कम से कम कक्षा 5 तक) मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में देने पर जोर दिया है।

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (International Mother Language Day) की वार्षिक थीम

यूनेस्को हर साल एक विशेष थीम निर्धारित करता है ताकि विशिष्ट मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। पिछले कुछ वर्षों की थीम इस प्रकार रही हैं:

  • बहुभाषी शिक्षा –  यह सुनिश्चित करना कि बच्चे अपनी भाषा में सीखें।
  • प्रौद्योगिकी का उपयोग –  भाषाओं के संरक्षण में तकनीक (जैसे AI और अनुवाद टूल्स) की भूमिका।
  • स्वदेशी भाषाएं – आदिवासी और अल्पसंख्यक भाषाओं का संरक्षण।

भाषाओं के संरक्षण के उपाय

मातृभाषा को बचाने के लिए केवल एक दिन का उत्सव पर्याप्त नहीं है। इसके लिए ठोस प्रयासों की आवश्यकता है

  • पारिवारिक जिम्मेदारी – माता-पिता को चाहिए कि वे घर पर बच्चों से अपनी मातृभाषा में बात करें।
  • डिजिटल उपस्थिति – स्थानीय भाषाओं में वेबसाइट, ऐप्स और सोशल मीडिया कंटेंट को बढ़ावा देना।
  • साहित्यिक प्रोत्साहन –  क्षेत्रीय लेखकों और कवियों को सम्मानित करना और उनके कार्यों का अनुवाद करना।
  • सरकारी नीतियां – अदालतों, प्रशासन और रोजगार में स्थानीय भाषाओं के उपयोग को अनिवार्य या प्रोत्साहित करना।

“अपनी भाषा, अपना मान।” अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस हमें याद दिलाता है कि विविधता ही मानवता की असली सुंदरता है। जब एक भाषा मरती है, तो दुनिया उस नज़रिए को खो देती है जिससे उस समुदाय ने प्रकृति और जीवन को देखा था। हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व करना चाहिए और साथ ही दूसरों की भाषाओं का सम्मान करना चाहिए।

विशेष नोट –  इस लेख की सामग्री मौलिक है और भाषाई अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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