डेलीबार्ता।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। दरअसल संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से 81 हजार टन कच्चा तेल लेकर चला ‘जग लाडकी’ टैंकर सुरक्षित तरीके से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जल डमरू मध्य (Strait of Hormuz) को पार कर चुका है और अब भारत की ओर रास्ते में है। अनुमान है कि यह टैंकर आज गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंच जायेगा।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस जहाज पर भारतीय ध्वज तिरंगा लहरा रहा है और इसमें सवार सभी भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं।
तनाव के बीच भारत के लिये राहत भरी खबर
ऐसे समय में जब मिडिल-ईस्ट में तनाव के कारण समुद्री व्यापार प्रभावित हो रहा है और कई देशों में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता जताई जा रही है, यह खबर भारत के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।
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14 मार्च को UAE से रवाना हुआ था जग लाडकी
सरकारी अधिकारियों के अनुसार ‘जग लाडकी’ नाम का यह टैंकर 14 मार्च को संयुक्त अरब अमीरात से रवाना हुआ था। जहाज में Murban क्रूड ऑयल लदा हुआ है, जो कि मध्य-पूर्व में उत्पादित उच्च गुणवत्ता वाला कच्चा तेल माना जाता है।
यह जहाज अब सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ रहा है और अनुमान है कि आज गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचेगा। जहाज के सुरक्षित रूप से होर्मुज जल डमरू मध्य पार करने की खबर के बाद भारतीय ऊर्जा क्षेत्र और शिपिंग सेक्टर में राहत की देखी जा रही है।
शिपिंग मंत्रालय के अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि जहाज और उस पर मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। मंत्रालय की ओर से बताया गया कि भारत सरकार लगातार होर्मुज जल डमरू मध्य से गुजरने वाले जहाजों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से निपटा जा सके।
तनाव के बीच बढ़ गई थी चिंता
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव के कारण समुद्री व्यापार को लेकर कई तरह की आशंकाएं सामने आई थीं। इस क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण तेल मार्ग हैं, जिनसे दुनिया के कई देशों को ऊर्जा आपूर्ति होती है।
तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका जताई जा रही थी। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि यदि स्थिति बिगड़ती है तो वैश्विक स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
ऐसे माहौल में भारत के लिए 81 हजार टन कच्चा तेल लेकर टैंकर का सुरक्षित पहुंचना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जानिये क्यों अहम है Strait of Hormuz ?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा व्यापार की धुरी माना जाता है।
दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। कई प्रमुख तेल उत्पादक देश जैसे सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, इराक और ईरान अपने कच्चे तेल का निर्यात इसी रास्ते से करते हैं।
इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव, संघर्ष या सुरक्षा जोखिम सीधे वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है। इसके परिणामस्वरूप तेल की कीमतों में तेजी, आपूर्ति में बाधा और ऊर्जा संकट जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
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भारत के लिए और भी ज्यादा महत्वपूर्ण
भारत के लिए Strait of Hormuz का महत्व और भी ज्यादा है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयातित कच्चे तेल पर निर्भर करता है। भारत अपनी कुल तेल आवश्यकता का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसमें भी सबसे बड़ा हिस्सा मध्य-पूर्व के देशों से आता है। यही कारण है कि पश्चिम एशिया में किसी भी तरह का तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर सकता है।
भारत की अधिकांश रिफाइनरियों तक पहुंचने वाला कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। इसलिए इस मार्ग की सुरक्षा और निर्बाध आवाजाही भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कई भारतीय जहाज समुद्र में
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और मिडिल-ईस्ट के बीच समुद्री मार्ग में अभी भी कई भारतीय जहाज मौजूद हैं। इन जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार कूटनीतिक स्तर पर लगातार प्रयास कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ जहाजों को चरणबद्ध तरीके से इस क्षेत्र से गुजरने की अनुमति भी दी जा रही है। भारतीय नौवहन और सुरक्षा एजेंसियां भी जहाजों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं।
फिलहाल देश में पर्याप्त तेल भंडार
सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल देश में कच्चे तेल की पर्याप्त उपलब्धता है और रिफाइनरियां सामान्य रूप से काम कर रही हैं।
ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि भारत के पास रणनीतिक और वाणिज्यिक दोनों तरह के तेल भंडार मौजूद हैं, जिससे किसी भी अल्पकालिक आपूर्ति संकट से निपटा जा सकता है।
81 हजार टन कच्चा तेल लेकर आ रहा यह टैंकर भी देश की ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करने में मदद करेगा और तत्काल दबाव को कम करेगा।
राष्ट्रीय खपत में 3 घंटे के बराबर तेल
आंकड़ों के मुताबिक 81 हजार टन कच्चा तेल भारत की लगभग तीन घंटे की राष्ट्रीय खपत के बराबर है।
भारत की कुल तेल मांग लगभग 5.5 से 6 मिलियन बैरल प्रतिदिन के आसपास है। इसे टन में परिवर्तित करें तो देश में प्रतिदिन करीब 8 लाख टन कच्चे तेल की खपत होती है।
हालांकि एक टैंकर से आने वाला तेल देश की कुल मांग का बहुत बड़ा हिस्सा नहीं होता, लेकिन संकट या तनाव के दौर में ऐसी आपूर्ति ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
ऊर्जा बाजार पर नजर
पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति को देखते हुए भारत सरकार, तेल कंपनियां और शिपिंग एजेंसियां वैश्विक ऊर्जा बाजार पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में भारत जैसे बड़े आयातक देशों को अपनी ऊर्जा रणनीति और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाए रखना जरूरी होगा।
फिलहाल ‘जग लाडकी’ टैंकर का सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ना इस बात का संकेत है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था अभी भी काम कर रही है और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में सतर्क और सक्रिय है।







