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जर्मनी ने ट्रंप के होर्मुज मिशन से दूरी बनाई अमेरिकी प्रस्ताव में शामिल होने से इनकार कर दिया

जर्मनी ने ट्रंप के होर्मुज मिशन से दूरी बनाई अमेरिकी प्रस्ताव में शामिल होने से इनकार कर दिया
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 17, 2026 12:43 अपराह्न
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जर्मनी ने होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है। जर्मन विदेश मंत्री जोहान वेडफुल ने ARD टेलीविजन को दिए एक इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा कि बर्लिन फिलहाल इस क्षेत्र में कोई सक्रिय सैन्य भूमिका नहीं निभाएगा। वेडफुल ने पूछा, “क्या हम जल्द ही इस संघर्ष का सक्रिय हिस्सा बनेंगे? नहीं है।उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा केवल बातचीत और कूटनीतिक समाधान से ही मिल सकती है। उन्हें यूरोपीय संघ के मौजूदा नौसैनिक मिशन, “ऑपरेशन एस्पाइड्स” पर भी सवाल उठाया और इसे होर्मुज तक बढ़ाने पर भी संदेह जताया। 

इस निर्णय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मिशन पर नई बहस शुरू हो गई है। बहुत से देशों ने भी इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है और सैन्य सहयोग करने से तुरंत बच रहे हैं।

ट्रंप ने सुरक्षा मिशन में मदद मांगी

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। इस मार्ग से बहुत सारा गैस और तेल निकलता है। हाल के समय में इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव और जहाजों की सुरक्षा की चिंता के कारण अमेरिका ने सहयोगी देशों से मदद मांगी है। 

डोनाल्ड ट्रंप ने कई देशों से अपील की है कि वे समुद्री मार्ग की सुरक्षा में सहयोग करने के लिए अपने युद्धपोत इस क्षेत्र में भेजें। उनका मानना है कि इस रास्ते से गुजरने वाले देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भी इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी देनी चाहिए।

अमेरिका का कहना है कि यह मिशन सिर्फ सुरक्षा के लिए बनाया गया है, ताकि व्यापार और ऊर्जा की आपूर्ति प्रभावित न हो।

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जर्मनी ने मिशन में हिस्सा नहीं लिया

जर्मनी ने इस प्रस्ताव पर संदेह व्यक्त करते हुए इस मिशन में भाग नहीं लेगी। जर्मन अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के सैन्य अभियान में भाग लेने से पहले कई बातों पर ध्यान देना चाहिए।

जर्मनी का मानना है कि किसी भी नए सैन्य मिशन से तनाव बढ़ सकता है क्योंकि क्षेत्र की स्थिति पहले से ही संवेदनशील है। इसलिए देश ने इस योजना से फिलहाल दूरी बनाए रखने का निर्णय लिया है।

अमेरिका की पहल को यूरोपीय देशों का समर्थन चाहिए था, इसलिए जर्मनी का यह रुख अमेरिका को चुनौती देता था।

यूरोपीय देश भी सतर्क हैं

तुरंत निर्णय लेने से कई देशों ने बचाव किया है, जर्मनी भी शामिल है। कई देशों का कहना है कि पहले स्थिति का पूरी तरह विश्लेषण करना होगा।

यूरोप के कुछ देशों का मानना है कि सैन्य कार्रवाई से पहले कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका मानना है कि क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति को बढ़ाना तनाव को बढ़ा सकता है।

इसलिए बहुत से देशों ने इस प्रस्ताव को खुलकर समर्थन देने से इनकार कर दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का सैन्य महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व भर में ऊर्जा की आपूर्ति के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चा तेल दुनिया के कई बड़े तेल उत्पादक देशों से आता है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार इस क्षेत्र की किसी भी अस्थिरता से सीधे प्रभावित होता है। इसलिए इस मार्ग की सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय हमेशा चिंतित रहता है।

क्षेत्र में बढ़ते तनाव और समुद्री गतिविधियों के कारण कई देशों ने अपने जहाजों की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की है। यही कारण है कि इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर कई देशों में बहस छिड़ गई है।

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भविष्य में क्या हो सकता है?

जर्मनी के निर्णय से सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका अपने सहयोगी देशों को इस मिशन में शामिल कर पाएगा। विभिन्न विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में अधिक चर्चा हो सकती है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह संभावना जताई जा रही है कि समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए किसी अन्य उपाय पर विचार किया जा सकता है।

हालाँकि, जर्मनी के पीछे हटने से ट्रंप की योजनाओं को भारी नुकसान हुआ है। अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ अभी भी बातचीत कर रहा है। आने वाले समय में यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस प्रस्तावित मिशन को कितने देशों का समर्थन मिलेगा और समुद्री सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या नई रणनीतियां विकसित होंगी

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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