हमारे देश में औषधियों का अद्भुत खजाना है। और शायद हू किसी रोग की औषधि हो जो भारत की धरती में न मिलती हो। लेकिन इसकी पहचान और उपयोग जानना आवश्यक है। कुछ ऐसी ही एक औषधि है कीड़ाजड़ी जी हां बहुत कुछ नाम से ही अपनें स्वरुप को पदर्शित करनें वाली यह जड़ी दुर्लभ होनें के साथ साथ काफी कीमती है।

बात करें तो यह जड़ी सोनें से भी ज्यादा कीमती है। कीड़ा जड़ी हिमालय के बर्फ वाले चारागाहों में पाई जाती है और यही कारण है कि जैसे जैसे बर्फ पिघलने लगती है, ऊंचाई वाले इलाकों के लोग कीड़ा जड़ी की खोज में निकल जाते हैं। यह हिमालय के 3000 मीटर से ऊपर के हिस्सों में पाई जाती है और यह तब बनती है, जब कैटरपिलर एक घास खाता है।
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हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में कई नायाब जड़ी बूटियां मौजूद हैं, जो किसी खजाने में से कम नहीं हैं।उनमें से एक है यारसा गंबू, जिसे कीड़ा जड़ी भी कहा जाता है. यह प्रायः एक कीड़े के अंदर पाई जाती है, जो सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है और यही कारण है कि इसकी कीमत काफी ज्यादा है. कीड़ा जड़ी को कैटरपिलर फंगस और हिमालयन वियाग्रा के नाम से भी जाना जाता है, जो पीले कैटरपिलर्स और एक मशरूम से मिलकर बनती है। क्योंकि यह घोस्ट मॉथ लार्वा के सिर से निकलता है, इसलिए इसे ‘कैटरपिलर फंगस’ कहा जाता है।
ऐसा कहा जाता है कि कीड़ा जड़ी हिमालय के बर्फ वाले चारागाहों में पाई जाती है और यही कारण है कि जैसे जैसे बर्फ पिघलने लगती है, ऊंचाई वाले इलाकों के लोग कीड़ा जड़ी की खोज में निकल जाते हैं। यह हिमालय के 3000 मीटर से ऊपर के हिस्सों में पाई जाती है और यह तब बनती है, जब कैटरपिलर एक घास खाता है और घास खाकर उसकी मौत हो जाती है। कैटरपिलर्स की मौत के बाद उसके अंदर एक खास जड़ी बूटी उगती है।क्योंकि यह कीड़े के अंदर से जड़ी उगती है, जिस कारण इसे कीड़ा जड़ी कहा जाता है।
‘कॉर्डिसेप्स साइनेसिस’ जो कैटरपिलर्स कीड़े पर उगता है
कॉर्डिसेप्स साइनेसिस’ जो कैटरपिलर्स कीड़े पर उगता है। उसका नाम है ‘हैपिलस फैब्रिकस’. इस फंगस में प्रोटीन, पेपटाइड्स, अमीनो एसिड, विटामिन बी-1, बी-2 और बी-12 जैसे पोषक तत्व बहुतायत में पाए जाते हैं, जो तत्काल रूप में ताकत देते हैं और खिलाड़ियों का जो डोपिंग टेस्ट किया जाता है, उसमें ये पकड़ा नहीं जाता है।
चीनी-तिब्बती परंपरागत चिकित्सा पद्धति में इसके और भी उपयोग हैं, साथ ही फेफड़ों और किडनी के इलाज में इसे जीवन रक्षक दवा माना गया है।पिथौरागढ़ के उच्च हिमालय में पोटिंग ग्लेशियर क्षेत्र, लास्पा, बुर्फू, रालम,नागनीधुरा, महोरपान, दर्ती ग्वार, छिपलाकेदार, दारमा घाटी, व्यास घाटी के अलावा चमोली और उत्तरकाशी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भी कीड़ा जड़ी पाई जाती है। कीड़ा जड़ी का उपयोग शक्तिवर्धक और कैंसर की दवाओं को बनाने के लिए किया जाता है।यारसा गंबू की मांग भारत के साथ-साथ चीन, सिंगापुर और हांगकांग तक में है. विदेशों में कीड़ा जड़ी की कीमत करीब 50 लाख रुपये प्रति किलो तक है।यह कीमत इसकी उपलब्धता के हिसाब से घटती-बढ़ती भी रहती है।






