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जानिए क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का पर्व

जानिए क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का पर्व
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 13, 2026 2:08 अपराह्न
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लोहड़ी का पर्व उत्तर भारत विशेषकर पंजाब और हरियाणा में बहुत ही धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार न केवल फसलों की कटाई से जुड़ा है बल्कि यह आपसी भाईचारे, खुशियों और नई शुरुआत का भी प्रतीक है।

  • प्रमुख कारण क्यों मनाई जाती है लोहड़ी-लोहड़ी मनाने के पीछे कई धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक कारण हैं|
  • शरद ऋतु की विदाई और सूर्य का उत्तरायण-लोहड़ी मुख्य रूप से सर्दियों के अंत और वसंत के आगमन का प्रतीक है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस समय सूर्य ‘मकर राशि’ में प्रवेश करने की तैयारी करता है। इसके बाद से दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं।
  • फसलों का त्योहार-यह किसानों के लिए सबसे बड़ा उत्सव है। इस समय रबी की फसल (जैसे गेहूं और सरसों) लहलहाने लगती है। गन्ने की कटाई भी इसी समय होती है। किसान अपनी अच्छी फसल के लिए भगवान और अग्नि देव को धन्यवाद देने के लिए लोहड़ी मनाते हैं।

दुल्ला भट्टी की कहानी (बच्चों के लिए विशेष)

लोहड़ी के गीतों में ‘दुल्ला भट्टी’ का नाम प्रमुखता से आता है। बच्चों को यह कहानी बहुत पसंद आती है-  

कहानी – मुगल काल के दौरान पंजाब में दुल्ला भट्टी नाम के एक नायक थे। उन्हें ‘पंजाब का रॉबिनहुड’ कहा जाता था। उस समय कुछ दुष्ट व्यापारी गरीब लड़कियों को अमीर लोगों को बेच देते थे। दुल्ला भट्टी ने न केवल उन लड़कियों को मुक्त कराया बल्कि उनकी शादी भी करवाई और उन्हें अपनी बेटी की तरह विदा किया। ‘सुंदर मुंदरिये’ गीत इन्हीं की याद में गाया जाता है।

लोहड़ी मनाने की परंपराएँ

  • अग्नि पूजन –  शाम के समय खुले स्थान पर लकड़ियों और उपलों का ढेर लगाकर आग जलाई जाती है। लोग अग्नि के चारों ओर चक्कर (परिक्रमा) काटते हैं।
  • आहुति देना – आग में तिल, गुड़, रेवड़ी, मूंगफली और मक्का (खील) डाली जाती है। इसे ‘अन्न देव’ को अर्पित किया गया भोग माना जाता है।
  • लोक गीत और नृत्य –  पुरुष ‘भांगड़ा’ करते हैं और महिलाएं ‘गिद्धा’ डालती हैं। ढोल की थाप पर पारंपरिक लोक गीत गाए जाते हैं।
  • लोहड़ी के विशेष खान-पान-लोहड़ी के स्वाद के बिना यह त्योहार अधूरा है|
  • सरसों का साग और मक्के की रोटी –  यह पंजाब का पारंपरिक भोजन है।
  • तिल और गुड़ –  तिल की गजक और गुड़ की रेवड़ी शरीर को गर्माहट देती है।
  • मूंगफली और पॉपकॉर्न – इन्हें प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।

बच्चों को सीख

आप अपने बच्चों को इस पर्व के माध्यम से निम्नलिखित मूल्य सिखा सकते हैं

  • प्रकृति का सम्मान –  हम अग्नि, सूर्य और पृथ्वी का आभार व्यक्त करते हैं क्योंकि वे हमें अन्न और जीवन देते हैं।
  • मिलजुलकर रहना –  लोहड़ी अकेले नहीं बल्कि पूरे मोहल्ले और परिवार के साथ मिलकर मनाई जाती है जो एकता का संदेश देती है।
  • मदद की भावना – दुल्ला भट्टी की कहानी से बच्चों को दूसरों की मदद करने की प्रेरणा मिलती है।

लोहड़ी का त्योहार हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने और जीवन में मिठास (गुड़ की तरह) घोलने का संदेश देता है। यह नई ऊर्जा और उत्साह का पर्व है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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