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बांग्लादेश में शेख हसीना विरोधी –  नेता मोहम्मद मोतालेब को घर में घुसकर मारी गोली हालत गंभीर

मोहम्मद मोतालेब
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 22, 2025 6:48 अपराह्न
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बांग्लादेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति विशेष रूप से शेख हसीना के इस्तीफे और देश छोड़ने के बाद से काफी अस्थिर बनी हुई है। अवामी लीग के विरोधियों और समर्थकों के बीच हिंसा की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। ​मोहम्मद मोतालेब जो शेख हसीना और अवामी लीग के विरोधी गुट से जुड़े रहे हैं उन पर हुआ हमला बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक प्रतिशोध की गहराई को दर्शाता है।

मोहम्मद मोतालेब

​बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा का नया दौर 

​5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे और देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश एक ऐतिहासिक संक्रमण काल से गुजर रहा है। जहाँ एक ओर अंतरिम सरकार देश को पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है वहीं दूसरी ओर ज़मीनी स्तर पर राजनीतिक हिंसा की आग ठंडी होने का नाम नहीं ले रही है। इसी क्रम में शेख हसीना के कट्टर विरोधी और स्थानीय नेता मोहम्मद मोतालेब पर उनके घर में घुसकर हुआ जानलेवा हमला देश की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।​

घर में घुसकर बरसाईं गोलियां

​घटना की रात मोहम्मद मोतालेब अपने घर पर मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार हमलावरों की एक टोली हथियारों से लैस होकर उनके आवास में दाखिल हुई। हमलावरों ने बिना किसी चेतावनी के मोतालेब को निशाना बनाकर फायरिंग शुरू कर दी। ​हमले का तरीका हमलावरों ने बेहद सुनियोजित तरीके से घर की घेराबंदी की थी ताकि मोतालेब को भागने का मौका न मिले। ​घायल अवस्था उन्हें कई गोलियां लगीं जिसके बाद उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।​

अफरा-तफरी का माहौल

हमले के वक्त घर में मौजूद परिवार के सदस्य भी दहशत में आ गए। हमलावर घटना को अंजाम देकर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार होने में सफल रहे।

​मोहम्मद मोतालेब कौन हैं

​मोहम्मद मोतालेब बांग्लादेश की राजनीति में एक ऐसे चेहरे के रूप में जाने जाते हैं जो लंबे समय से शेख हसीना सरकार की नीतियों के मुखर आलोचक रहे हैं।

​विपक्ष की आवाज़

वे स्थानीय स्तर पर विपक्ष को संगठित करने और अवामी लीग के कथित दमनकारी शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व करने के लिए जाने जाते थे।

​छात्र आंदोलन में भूमिका 

हाल ही में हुए छात्र आंदोलन कोटा सुधार आंदोलन जिसने बाद में सरकार विरोधी आंदोलन का रूप ले लिया उसमें भी उनकी सक्रियता देखी गई थी।

​टारगेट लिस्ट 

जानकारों का मानना है कि उनकी सक्रियता और शेख हसीना के खिलाफ उनके कड़े रुख के कारण वे लंबे समय से कुछ गुटों की आंखों की किरकिरी बने हुए थे।

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​हमले के पीछे के संभावित कारण

​बांग्लादेश की राजनीति वर्तमान में प्रतिशोध की राजनीति Politics of Retribution के दौर से गुजर रही है। इस हमले के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं

​राजनीतिक रंजिश

शेख हसीना के जाने के बाद अवामी लीग के कई कार्यकर्ता और समर्थक भूमिगत हो गए हैं या फिर बदले की कार्रवाई का शिकार हो रहे हैं। मोतालेब पर हमला इसी श्रृंखला की एक कड़ी हो सकता है जहाँ सत्ता से बेदखल हुए गुट अपने विरोधियों को निशाना बना रहे हैं।

​शक्ति का शून्य Power Vacuum सरकार गिरने के बाद पुलिस और सुरक्षा बलों का मनोबल गिरा है और कई जगहों पर प्रशासन निष्क्रिय है। इस स्थिति का फायदा अपराधी और कट्टरपंथी तत्व उठा रहे हैं।

​आंतरिक गुटबाजी  विपक्ष के भीतर भी नेतृत्व और प्रभाव को लेकर खींचतान चल रही है। यह हमला आपसी वर्चस्व की लड़ाई का परिणाम भी हो सकता है।

​बांग्लादेश में अस्थिरता का वर्तमान परिदृश्य

​शेख हसीना के 15 साल के शासन के अंत के बाद बांग्लादेश में जो बदलाव आए हैं वे काफी जटिल हैं|

​राजनीतिक नेतृत्व और ढांचागत परिवर्तन

​अंतरिम सरकार का गठन शेख हसीना के जाने के बाद नोबेल शांति पुरस्कार विजेता डॉ. मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार बनाई गई है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में लोकतांत्रिक सुधार करना और निष्पक्ष चुनाव संभावित रूप से फरवरी 2026 में आयोजित करना है।​

आवामी लीग पर प्रतिबंध

हसीना की पार्टी आवामी लीग और उसके छात्र संगठन छात्र लीग पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। पार्टी के अधिकांश शीर्ष नेता या तो जेल में हैं छिपे हुए हैं या देश छोड़ चुके हैं। ​हसीना को मृत्युदंड नवंबर 2025 में बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को उनकी अनुपस्थिति में मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

​सामाजिक उथल-पुथल और कट्टरपंथ का उदय

​कट्टरपंथी संगठनों की सक्रियता हिफ़ाज़त-ए-इस्लाम और जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों का प्रभाव बढ़ा है जो पहले हाशिए पर थे। छात्र राजनीति का स्वरूप भी बदल गया है।

​अल्पसंख्यकों की सुरक्षा शासन परिवर्तन के बाद से हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरें निरंतर चर्चा में रही हैं। इस्कॉन ISKCON जैसे संगठनों के नेताओं की गिरफ्तारी और हिंदू समुदायों के खिलाफ हिंसा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा की है।  ​हालिया अस्थिरता दिसंबर 2025 में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद ढाका में फिर से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और आगजनी की घटनाएं हुई हैं।​

भारत-बांग्लादेश संबंधों में बदलाव

​तनावपूर्ण संबंध  शेख हसीना के भारत में शरण लेने के कारण दोनों देशों के रिश्तों में अब तक की सबसे बड़ी खटास आई है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने आधिकारिक तौर पर हसीना के प्रत्यर्पण Extradition की मांग की है।​

भारत-विरोधी स्वर

बांग्लादेश की सड़कों और सोशल मीडिया पर इंडिया आउट जैसे अभियान और भारत-विरोधी बयानबाजी में तेजी देखी गई है।

​पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकी

हाल के महीनों में बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच राजनयिक और सैन्य स्तर पर गतिविधियां बढ़ी हैं जिसे भारत अपनी सुरक्षा के लिए चुनौती के रूप में देख रहा है।​

हमले के बाद की प्रतिक्रियाएं

​इस घटना के बाद बांग्लादेश की राजनीति में उबाल आ गया है|​अवामी लीग का पक्ष विदेश में मौजूद पार्टी प्रवक्ताओं ने इसे लोकतंत्र की हत्या और अवामी लीग को मिटाने की साजिश करार दिया है। उन्होंने मांग की है कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस पर संज्ञान लें।

​अंतरिम सरकार का रुख 

सरकार ने हमले की निंदा की है और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। हालांकि अभी तक किसी बड़ी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

​आम जनता की राय

जनता के बीच डर का माहौल है। आम नागरिकों का मानना है कि यदि एक हाई-प्रोफाइल नेता सुरक्षित नहीं है तो आम आदमी की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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