उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहां बेतवा नदी पर बन रहे एक बड़े निर्माणाधीन पुल का एक हिस्सा अचानक तेज आंधी-तूफान और खराब मौसम के कारण भरभराकर ढह गया। इस भीषण हादसे के वक्त पुल के नीचे और आसपास कई मजदूर काम कर रहे थे, जो सीधे तौर पर भारी-भरकम मलबे की चपेट में आ गए। इस हृदयविदारक घटना में अब तक 6 मजदूरों की मलबे में दबकर मौके पर ही दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद से ही इलाके में चीख-पुकार और अफरातफरी का माहौल बना हुआ है।
कैसे और कब हुआ यह भीषण हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय प्रशासन से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, हमीरपुर क्षेत्र में अचानक मौसम ने करवट बदली और देखते ही देखते आसमान में काले बादल छा गए। इसके तुरंत बाद तेज हवाओं के साथ भीषण आंधी-तूफान और बारिश का दौर शुरू हो गया। तूफान की रफ्तार इतनी तेज थी कि बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का एक बड़ा हिस्सा (स्पैन और शटरिंग) इसे बर्दाश्त नहीं कर सका और अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया।
जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय पुल निर्माण कार्य में जुटे मजदूर अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन कंक्रीट और लोहे का भारी मलबा इतनी तेजी से नीचे गिरा कि उन्हें संभलने का मौका ही नहीं मिला। कई मजदूर मलबे के नीचे पूरी तरह से दफन हो गए।
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राहत और बचाव कार्य – पुलिस और SDRF की मुस्तैदी
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। जिला मजिस्ट्रेट (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) तुरंत भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। मामले की गंभीरता और मलबे के विशाल आकार को देखते हुए तुरंत ‘स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स’ (SDRF) की टीमों को बुलाकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
मलबे को हटाने और दबे हुए लोगों को बाहर निकालने के लिए कई जेसीबी (JCB) मशीनों, क्रेन और आधुनिक कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। नदी का किनारा होने और खराब मौसम के चलते शुरुआत में रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन अंधेरा होने के बावजूद फ्लड लाइट्स की मदद से बचाव कार्य को युद्ध स्तर पर जारी रखा गया। घायलों को तुरंत एम्बुलेंस के जरिए नजदीकी जिला अस्पताल और ट्रामा सेंटर भेजा गया है, जहां डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। कुछ मजदूरों की हालत नाजुक होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया संज्ञान
लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हमीरपुर के इस भीषण हादसे का तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति की प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे मौके पर रहकर राहत और बचाव कार्य की खुद निगरानी करें।
मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि मलबे में फंसे हर एक व्यक्ति को सुरक्षित निकालना और घायलों को त्वरित व उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके साथ ही सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे घायलों के समुचित इलाज में किसी भी तरह की कोताही न बरतें।
निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि आंधी-तूफान काफी तेज था, लेकिन एक निर्माणाधीन पुल का हिस्सा इस तरह पूरी तरह ढह जाना सीधे तौर पर निर्माण सामग्री की खराब गुणवत्ता या इंजीनियरिंग की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।
क्या पुल के शटरिंग और सपोर्ट सिस्टम को मौसम के इन थपेड़ों को झेलने के लिए सही तरीके से डिजाइन नहीं किया गया था? क्या काम के दौरान मजदूरों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम (जैसे सेफ्टी हेलमेट, बेल्ट या आपातकालीन निकास) मौजूद थे? इन सभी बिंदुओं पर अब विस्तृत जांच की मांग उठ रही है। राज्य सरकार ने भी इस मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराने के संकेत दिए हैं, ताकि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।
हमीरपुर में बेतवा नदी पर हुआ यह हादसा केवल एक प्राकृतिक आपदा या मौसम की मार नहीं है, बल्कि यह उन गरीब मजदूरों के जीवन की सुरक्षा के प्रति बरती गई लापरवाही का भी नतीजा है जो अपने घरों से दूर खून-पसीना बहाकर देश का निर्माण करते हैं। 6 परिवारों के चिराग इस हादसे में हमेशा के लिए बुझ गए हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि सरकार और संबंधित विभाग न केवल पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा और सहायता प्रदान करें, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं में सुरक्षा ऑडिट (Safety Audit) को अनिवार्य बनाएं।







