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2080 तक मकर संक्रांति का त्योहार 14 या 15 जनवरी को मनाया जाएगा, 2081 मे तारीख बदलेगी

मकर संक्रांति
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 15, 2026 9:34 अपराह्न
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मकर संक्रांति के पर्व की तारीखों में होने वाला बदलाव केवल एक धार्मिक विषय नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा खगोलीय विज्ञान (Astronomy) और गणितीय गणना (Mathematical Calculation) है।

मकर संक्रांति और खगोल विज्ञान  तारीख बदलने का मुख्य कारण

मकर संक्रांति का अर्थ है सूर्य का मकर राशि में प्रवेश। सामान्यतः हिंदू त्योहार चंद्रमा की स्थिति पर आधारित होते हैं, लेकिन मकर संक्रांति एक सौर उत्सव (Solar Festival) है।

तारीख बदलने के पीछे तीन मुख्य वैज्ञानिक कारण हैं|

1. पृथ्वी का अक्षीय अयन (Precession of Equinoxes)

पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमते समय एक लट्टू की तरह थोड़ा डगमगाती है। इसे ‘अयन चलन’ कहा जाता है। इस कारण ‘विषुवत बिंदु’ (Equinoxes) हर साल लगभग 50.26 सेकंड पीछे खिसक जाते हैं।

2. निरयण और सायन गणना (Sidereal vs Tropical Year)

  • सायन वर्ष (Tropical Year) –  वह समय जो पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर लगाने में लेती है (लगभग 365.2422 दिन)।
  • निरयण वर्ष (Sidereal Year) –  वह समय जो सूर्य किसी विशेष तारे के सापेक्ष उसी स्थान पर लौटने में लेता है (लगभग 365.2563 दिन)।

भारतीय पंचांग निरयण पद्धति पर आधारित है। इन दोनों वर्षों के बीच लगभग 20 मिनट का अंतर होता है। यह 20 मिनट हर 72 साल में एक दिन (24 घंटे) के बराबर हो जाते हैं।

2081 में तारीख क्यों बदलेगी?

इतिहास गवाह है कि मकर संक्रांति की तारीखें स्थिर नहीं रही हैं|

  • 16वीं शताब्दी (मुगल काल) –  मकर संक्रांति 10 या 11 जनवरी को पड़ती थी।
  • 19वीं शताब्दी (ब्रिटिश काल) –  यह 12 या 13 जनवरी को होने लगी।
  • वर्तमान समय – अभी हम इसे 14 या 15 जनवरी को मनाते हैं।

इस प्रकार काम करता है गणित 

चूंकि हर 72 साल में संक्रांति का समय 1 दिन आगे बढ़ जाता है, इसलिए

  • 2016 से 2080 तक –  संक्रांति मुख्य रूप से 14 या 15 जनवरी के बीच झूलती रहेगी।
  • वर्ष 2081 –  खगोलीय गणना के अनुसार, सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का समय 15 जनवरी की देर रात या 16 जनवरी की सुबह होगा। शास्त्रानुसार, यदि संक्रांति सूर्यास्त के बाद हो, तो उसका पुण्यकाल अगले दिन माना जाता है।
  • 2081 से 2153 तक – इस 72 वर्षों के चक्र में यह पर्व 16 जनवरी को मनाया जाएगा।

संक्रांति चक्र का ऐतिहासिक और भविष्य का विवरण

कालखंड (वर्ष)  मकर संक्रांति की संभावित तिथि 
1700- 177211 – 12 जनवरी 
1773 – 1845 12 – 13 जनवरी 
1846 – 1917 13 – 14 जनवरी 
1918 – 1990 14 जनवरी 
1991 – 2080 14 – 15 जनवरी 
2081 – 2153 16 जनवरी 
2154 – 2226 17 जनवरी 

क्या इसे रोका जा सकता है?

यह ब्रह्मांडीय गति है, जिसे बदला नहीं जा सकता। आधुनिक विज्ञान जिसे ‘Precession’ कहता है, भारतीय ऋषियों ने उसे हजारों साल पहले पहचान लिया था। यही कारण है कि भारतीय पंचांग दुनिया के सबसे सटीक गणना तंत्रों में से एक है।

महत्वपूर्ण बिंदु

लीप वर्ष का प्रभाव –  हर चौथे साल लीप वर्ष आने से यह तारीख 1 दिन पीछे खिसकने की कोशिश करती है, लेकिन 20 मिनट का वार्षिक अंतर अंतत – इसे आगे धकेल देता है।

धार्मिक महत्व –  भले ही तारीख बदल जाए, लेकिन त्योहार का आधार ‘सूर्य का राशि परिवर्तन’ ही रहेगा।

2081 में तारीख का बदलना कोई अंधविश्वास नहीं बल्कि खगोल विज्ञान की एक निरंतर प्रक्रिया है। यह हमारे सौर मंडल की गतिशीलता का प्रमाण है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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