ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल (Trump 2.0) में अमेरिकी वीजा नियमों में आए क्रांतिकारी बदलावों और बड़े पैमाने पर हुए वीजा रद्दीकरण (Visa Revocation) पर यह एक विस्तृत रिपोर्ट है।
ट्रंप 2.0 – अमेरिकी वीजा नियमों में कड़ाई और लाखों वीजा रद्दीकरण का संपूर्ण विश्लेषण
जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता संभालने के बाद अमेरिका की इमिग्रेशन और वीजा नीतियों में ‘भूकंप’ जैसी स्थिति देखी गई है। “अमेरिका फर्स्ट” और “नेशनल सिक्योरिटी” के नारों के साथ ट्रंप प्रशासन ने उन नियमों को लागू किया है जो दशकों में सबसे सख्त माने जा रहे हैं।
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मुख्य आंकड़े – कितने वीजा हुए रद्द? (Statistics)
ताजा आधिकारिक आंकड़ों (जनवरी 2026 तक) के अनुसार
- कुल रद्दीकरण – ट्रंप प्रशासन ने 2025 से अब तक 1,00,000 (1 लाख) से अधिक वीजा रद्द किए हैं।
- तुलना – यह आंकड़ा 2024 (बाइडन प्रशासन) की तुलना में दोगुने से भी अधिक है, जब लगभग 40,000 वीजा रद्द हुए थे।
- प्रमुख श्रेणियां – छात्र वीजा (F-1) – लगभग 8,000 छात्र वीजा रद्द किए गए।
- विशेषज्ञ कार्य वीजा (H-1B/L-1) – लगभग 2,500 वीजा रद्द किए गए।
- पर्यटक और व्यवसाय वीजा (B1/B2): सबसे बड़ी संख्या में रद्दीकरण इसी श्रेणी में हुए हैं, मुख्य रूप से ‘वीजा ओवरस्टे’ (अवधि खत्म होने के बाद भी रुकना) के कारण।
वीजा रद्दीकरण के मुख्य कारण (Reasons for Revocation)
अमेरिकी विदेश विभाग (State Department) ने स्पष्ट किया है कि वीजा देना कोई ‘अधिकार’ नहीं बल्कि एक ‘सुविधा’ है। रद्दीकरण के पीछे ये 4 प्रमुख कारण रहे हैं
आपराधिक गतिविधियां – इनमें DUI (शराब पीकर गाड़ी चलाना), चोरी, हमला, धोखाधड़ी और ड्रग्स से जुड़े मामले शामिल हैं।
सोशल मीडिया जांच – अब वीजा आवेदन के समय पिछले 5 वर्षों के सोशल मीडिया हैंडल देना अनिवार्य है। ट्रंप प्रशासन ने ‘एंटी-अमेरिकन’ पोस्ट या संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर हजारों वीजा रद्द या रोके हैं।
पब्लिक चार्ज रूल (Public Charge) – यदि यह पाया जाता है कि कोई विदेशी नागरिक अमेरिकी सरकारी सुविधाओं (कल्याणकारी योजनाओं) पर निर्भर हो सकता है, तो उनका वीजा रद्द किया जा रहा है।
लगातार वेटिंग (Continuous Vetting) – नया सिस्टम अब वीजा मिलने के बाद भी व्यक्ति की निगरानी करता है। अमेरिका में रहने के दौरान अगर कोई छोटा सा कानून भी टूटता है तो सिस्टम तुरंत वीजा रद्द कर देता है।
वीजा नियमों में 5 बड़े बदलाव (Key Policy Changes)
H-1B वीजा में ‘लॉटरी’ का अंत-अब किस्मत नहीं, काबिलियत और वेतन तय करेगा कि किसे वीजा मिलेगा। 27 फरवरी 2026 से प्रभावी नए नियम के तहत अधिकतम वेतन (Highest Salary) पाने वाले आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे भारतीय आईटी कंपनियों (TCS, Infosys, Wipro) के लिए लागत बढ़ जाएगी।
इंटरव्यू छूट (Waiver) का खात्मा-सितंबर 2025 से ‘ड्रॉपबॉक्स’ या इंटरव्यू छूट की सुविधा को बहुत सीमित कर दिया गया है। अब पहली बार आवेदन करने वालों और अधिकांश नवीनीकरण (Renewal) आवेदकों को व्यक्तिगत रूप से दूतावास जाना अनिवार्य है।
स्टूडेंट वीजा पर 4 साल की सीमा-पहले छात्र जब तक पढ़ाई करते थे उनका वीजा वैध रहता था। अब नए नियमों के तहत छात्र वीजा की अधिकतम अवधि 4 साल तय करने का प्रस्ताव है। इसके बाद उन्हें दोबारा आवेदन या विस्तार के लिए कड़ी प्रक्रिया से गुजरना होगा।
‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ और नई फीस-अक्टूबर 2025 से एक नई $250 की ‘इंटीग्रिटी फीस’ लागू की गई है। इसके अलावा H-1B वीजा के लिए $100,000 तक की फीस के प्रस्तावों ने नियोक्ताओं में खलबली मचा दी है।
39 देशों पर यात्रा प्रतिबंध (Travel Ban)-1 जनवरी 2026 से ट्रंप प्रशासन ने 20 देशों पर पूर्ण और 19 देशों पर आंशिक यात्रा प्रतिबंध लगाया है। इसमें अफगानिस्तान, वेनेजुएला, सीरिया और हैती जैसे देश शामिल हैं।
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भारतीयों पर प्रभाव (Impact on Indians)
भारत अमेरिका के लिए गैर-प्रवासी वीजा का सबसे बड़ा स्रोत है। इन बदलावों का भारतीयों पर गहरा असर पड़ा है
आईटी प्रोफेशनल – ऊंचे वेतन की शर्त के कारण मध्यम स्तर के सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के लिए अमेरिका जाना कठिन हो गया है।
छात्र – सख्त स्क्रीनिंग और वीजा मिलने में देरी के कारण 2025 में भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है।
H-4 वीजा धारक – H-1B वीजा धारकों के जीवनसाथी (Spouses) के वर्क परमिट पर फिर से तलवार लटक गई है।
भविष्य की राह – आपको क्या करना चाहिए?
यदि आप या आपके परिचित अमेरिका जाने की योजना बना रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें|
- सोशल मीडिया को क्लीन रखें – कोई भी विवादित या कट्टरपंथी पोस्ट आपके वीजा के लिए खतरा बन सकती है।
- कानून का पालन – अमेरिका में छोटे से ट्रैफिक उल्लंघन या झगड़े को भी हल्के में न लें।
- दस्तावेजों की पारदर्शिता – आय और कौशल से जुड़े सभी दस्तावेज पूरी तरह पारदर्शी होने चाहिए।
ट्रंप प्रशासन की नई नीतियां यह संदेश देती हैं कि अमेरिका अब केवल उन्हीं को बुलाना चाहता है जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं उच्च कुशल (Highly Skilled) हैं और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।







