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​नवरात्रि डिटॉक्स और ऋतु परिवर्तन- नवरात्रि के दौरान ‘डिटॉक्स डाइट’ और बदलते मौसम में कैसे रखें सेहत का ख्याल 

नवरात्रि के दौरान 'डिटॉक्स डाइट' और बदलते मौसम में कैसे रखें सेहत का ख्याल
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 21, 2026 7:31 अपराह्न
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नवरत्रि का पावन पर्व न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का समय है बल्कि यह बदलते मौसम के साथ शरीर को ‘डिटॉक्स’ (विषहरण) करने का एक बेहतरीन अवसर भी प्रदान करता है। मार्च-अप्रैल (चैत्र नवरात्रि) के दौरान हम शीत ऋतु से ग्रीष्म ऋतु की ओर बढ़ रहे होते हैं। इस संधि काल में हमारा मेटाबॉलिज्म बदलता है जिससे शरीर को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।

​उपवास और डिटॉक्स का विज्ञान

​भारतीय परंपरा में उपवास केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि एक गहरी स्वास्थ्य पद्धति है। आयुर्वेद के अनुसार, बदलते मौसम में शरीर के दोष (वात, पित्त, कफ) असंतुलित हो जाते हैं। चैत्र नवरात्रि के दौरान कफ का शमन और पित्त का संचयन होता है। उपवास के जरिए हम पाचन तंत्र को आराम देते हैं, जिससे शरीर अपनी ऊर्जा संचित ‘विषाक्त पदार्थों’ (Toxins) को बाहर निकालने में लगा पाता है।

डाइट चार्ट – क्या खाएं 

भूखा रहना नहीं बल्कि सही खाद्य पदार्थों का चयन है।

​सुबह की शुरुआत (Detox Drinks)

  • नींबू-शहद पानी –  गुनगुने पानी में नींबू और एक चम्मच शहद।
  • नारियल पानी – इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने के लिए।
  • तुलसी अर्क –  रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाने के लिए।

चैत्र नवरात्रि गुड़ी पड़वा और विक्रम संवत 2083

​मुख्य आहार (Main Course)

  • कुट्टू और सिंघाड़ा – इनमें मैग्नीशियम और फाइबर भरपूर होता है। कुट्टू शरीर में गर्मी पैदा करता है, जबकि सिंघाड़ा उसे ठंडा रखता है। इनका मिश्रण सर्वोत्तम है।
  • साबूदाना –  यह कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत है, लेकिन इसे तलने के बजाय खिचड़ी के रूप में लें।
  • मखाना –  यह कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट का खजाना है। इसे हल्का भूनकर स्नैक्स के रूप में लें।

​फल और सब्जियां

  • सब्जियाँ –  लौकी, कद्दू, अरबी और आलू (सीमित मात्रा में)। लौकी पचने में सबसे हल्की और पानी से भरपूर होती है।
  • फल –  पपीता, सेब, तरबूज और खरबूजा। ये शरीर को हाइड्रेटेड रखते हैं।

​ बदलते मौसम (ऋतु संधि) में सावधानियां

​अभी का मौसम ‘दोमुंहा’ होता है: सुबह-शाम ठंड और दिन में तेज धूप। इस समय ‘कफ’ संबंधी बीमारियाँ जैसे सर्दी-खाँसी और ‘पित्त’ संबंधी समस्याएं जैसे एसिडिटी आम हैं।

स्वास्थ्य टिप्स

  • तापमान का संतुलन – पसीने में एकदम से एसी या कूलर के सामने न आएं।
  • ठंडे पानी से परहेज – मटके के पानी का उपयोग करें, सीधे फ्रिज का बहुत ठंडा पानी गले और पाचन के लिए हानिकारक हो सकता है।
  • नींद का महत्व –  डिटॉक्स प्रक्रिया तब सबसे प्रभावी होती है जब आप 7-8 घंटे की गहरी नींद लेते हैं।

​ विस्तृत डाइट चार्ट

समयआहार विकल्पलाभ
सुबह (Early Morning)गुनगुना पानी + नींबू या भिगोए हुए बादाम/अखरोटमेटाबॉलिज्म को किक-स्टार्ट करता है।
नाश्ता (Breakfast)सामा के चावल की खिचड़ी या फलों का सलादऊर्जा प्रदान करता है।
दोपहर का भोजन (Lunch)सिंघाड़े के आटे की रोटी + लौकी की सब्जी + दहीप्रोबायोटिक्स पाचन में सुधार करते हैं।
शाम का स्नैक (Evening)मखाना (रोस्टेड) या ग्रीन टीअस्वास्थ्यकर क्रेविंग को रोकता है।
रात का भोजन (Dinner)कद्दू का सूप या उबली हुई सब्जियां

क्या खाएं और क्या न खाएं (Do’s and Don’ts)

क्या करें

  • ​सेंधा नमक का ही प्रयोग करें, यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है।
  • ​सब्जियों में लौकी, कद्दू, खीरा और अरबी को प्राथमिकता दें।
  • ​नारियल तेल या शुद्ध घी का सीमित मात्रा में उपयोग करें।

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क्या न करें’ (Avoid These Mistakes)

  • तले-भुने भोजन से बचें –  अक्सर लोग व्रत के नाम पर आलू के चिप्स, पूड़ियाँ और पकौड़े ज्यादा खाते हैं। यह डिटॉक्स के उद्देश्य को खत्म कर देता है और सुस्ती बढ़ा देता है।
  • कैफीन की अधिकता –  खाली पेट बार-बार चाय या कॉफी पीने से एसिडिटी और डिहाइड्रेशन हो सकता है।
  • सफेद चीनी का प्रयोग –  मीठे के लिए चीनी के बजाय गुड़ या प्राकृतिक खजूर का उपयोग करें।
  • अति (Overeating) –  व्रत खोलने के समय एक साथ बहुत ज्यादा न खाएं। इससे पाचन बिगड़ सकता है।

विशेष स्वास्थ्य सुझाव (Health Tips)

स्थितिक्या करें
डायबिटीजलंबे समय तक भूखे न रहें। हर 2-3 घंटे में मखाना या फल लें।
एसिडिटीठंडे दूध का सेवन करें और ज्यादा मिर्च-मसालों से बचें।
कमजोरीमुट्ठी भर भीगे हुए बादाम और अखरोट का सेवन करें।

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग

​केवल आहार से डिटॉक्स पूरा नहीं होता। इसके साथ निम्नलिखित क्रियाएं आवश्यक हैं

  • प्राणायाम –  कपालभाति और अनुलोम-विलोम शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाते हैं।
  • भ्रामरी –  मानसिक शांति और तनाव मुक्ति के लिए।
  • हल्की स्ट्रेचिंग –  उपवास के दौरान भारी व्यायाम के बजाय योग करें।

जीवनशैली में बदलाव

​डिटॉक्स केवल भोजन तक सीमित नहीं है। नवरात्रि के नौ दिनों में ये तीन अभ्यास भी जरूरी हैं

  • पर्याप्त नींद –  शरीर की मरम्मत के लिए 7-8 घंटे की नींद अनिवार्य है।
  • हल्का व्यायाम –  योग और प्राणायाम (विशेषकर अनुलोम-विलोम) रक्त परिसंचरण में सुधार करते हैं।
  • मानसिक शांति –  ध्यान (Meditation) तनाव को कम करता है, जो शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

​नवरात्रि में डिटॉक्स डाइट और बदलते मौसम की चुनौतियों का सामना करने का सबसे अच्छा तरीका ‘संतुलन’ है। यदि आप सात्विक भोजन, पर्याप्त हाइड्रेशन और संयमित जीवनशैली अपनाते हैं, तो ये नौ दिन आपके शरीर को पुनर्जीवित (Rejuvenate) कर देंगे।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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