बिहार की राजनीति में चल रहे बड़े उथल-पुथल और नीतीश कुमार के इस्तीफे (resignations) की खबर ने एक बार फिर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह केवल एक मुख्यमंत्री का इस्तीफा नहीं है, बल्कि बिहार में एक लंबे युग के अंत और एक नई राजनीतिक शुरुआत का संकेत है।
नीतीश कुमार ने छोड़ी कुर्सी और नई सरकार का रास्ता साफ
बिहार की राजनीति में मार्च-अप्रैल 2026 एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है।
- कब हुआ इस्तीफा? – नीतीश कुमार ने मार्च 2026 की शुरुआत में अपनी मंशा साफ की और राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया।
- संसदीय बदलाव – 30 मार्च, 2026 को उन्होंने बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दिया।
- शपथ और विदाई – 10 अप्रैल, 2026 को वह राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने के लिए दिल्ली जा रहे हैं जिसके तुरंत बाद वह आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री पद का त्याग कर देंगे।
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आखिर इस्तीफा क्यों?
नीतीश कुमार के इस औचक फैसले के पीछे कई गहरे राजनीतिक और व्यक्तिगत कारण माने जा रहे हैं
- राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका – नीतीश कुमार अब बिहार की सक्रिय राजनीति से हटकर केंद्र की राजनीति में अपनी भूमिका देख रहे हैं। राज्यसभा जाना उनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय होने का एक मार्ग है।
- सपना पूरा करना – उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि उनके राजनीतिक करियर की इच्छा थी कि वह देश के चारों सदनों (लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद) के सदस्य रहें। राज्यसभा का सदस्य बनकर वह अपनी इस इच्छा को पूरा कर रहे हैं।
- बीजेपी के साथ नया समीकरण – 2025 के विधानसभा चुनाव में NDA (BJP + JDU) को प्रचंड बहुमत (200 से अधिक सीटें) मिला। इस जीत के बाद, गठबंधन के भीतर सत्ता के नए संतुलन और उत्तराधिकार योजना पर सहमति बनी है।
- लंबे कार्यकाल का अंत – वह लगभग 20 वर्षों तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं। अब वह “मार्गदर्शक” की भूमिका में आकर नई पीढ़ी को सत्ता सौंपना चाहते हैं।
नई सरकार का गठन – अब कौन बनेगा मुख्यमंत्री?
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) का मुख्यमंत्री बनने की प्रबल संभावना है।
- प्रमुख नाम – मुख्यमंत्री पद की रेस में सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय जैसे नेताओं के नाम सबसे आगे चल रहे हैं।
- गठबंधन का स्वरूप – सरकार अभी भी NDA की ही रहेगी, जिसमें JDU और BJP प्रमुख सहयोगी होंगे, लेकिन नेतृत्व का चेहरा बदल जाएगा।
- शपथ ग्रहण – माना जा रहा है कि अप्रैल के मध्य तक बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल जाएगा।
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नीतीश कुमार के ‘U-Turns’ का इतिहास (एक नज़र में)
नीतीश कुमार को भारतीय राजनीति में “पलटू राम” या “चाणक्य” जैसे नामों से नवाजा गया है। उनके पिछले कुछ वर्षों के बड़े बदलाव इस प्रकार हैं
| वर्ष | गठबंधन | मुख्य घटना |
| 2013 | NDA से बाहर | मोदी को PM उम्मीदवार बनाने के विरोध में गठबंधन तोड़ा। |
| 2015 | महागठबंधन | RJD और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई। |
| 2017 | वापसी NDA में | भ्रष्टाचार के मुद्दों का हवाला देकर RJD का साथ छोड़ा और BJP के साथ आए। |
| 2022 | फिर महागठबंधन | BJP पर जेडीयू को तोड़ने का आरोप लगाकर वापस RJD के साथ गए। |
| 2024 (जनवरी) | घर वापसी (NDA) | लोकसभा चुनाव से पहले दोबारा BJP के साथ गठबंधन किया। |
| 2025 | विधानसभा जीत | NDA के नेतृत्व में भारी जीत हासिल की और 10वीं बार CM बने। |
| 2026 | राज्यसभा प्रस्थान | CM पद छोड़ केंद्र की राजनीति का रुख किया। |
बिहार की राजनीति पर इसका प्रभाव
नीतीश कुमार का जाना बिहार की राजनीति में एक सत्ता निर्वात (Power Vacuum) पैदा कर सकता है।
- JDU का भविष्य – बिना नीतीश के JDU क्या अपनी पहचान बरकरार रख पाएगी? यह एक बड़ा सवाल है।
- BJP का वर्चस्व – बिहार में पहली बार BJP पूर्ण रूप से ड्राइविंग सीट पर होगी।
- विपक्ष की रणनीति – RJD और तेजस्वी यादव इस बदलाव को बिहार की “संप्रभुता पर हमला” बता रहे हैं और इसे दिल्ली/गुजरात से संचालित सरकार कह रहे हैं।
नीतीश कुमार का इस्तीफा बिहार के लिए एक “युग का अंत” है। उन्होंने ‘सुशासन बाबू’ की छवि के साथ बिहार को विकास की राह पर लाने का प्रयास किया, लेकिन उनके बार-बार गठबंधन बदलने की नीति ने उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए। अब देखना यह है कि नई सरकार बिहार की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।







