उत्तर कोरिया जैसे बंद देश से आने वाली खबरें अक्सर अपुष्ट होती हैं, लेकिन जनवरी 2026 की हालिया रिपोर्टों और उत्तर कोरियाई राज्य मीडिया (KCNA) के संकेतों के आधार पर, यांग सुंग-हो (Yang Sung-ho) की बर्खास्तगी सत्ता के गलियारों में एक बड़ी घटना मानी जा रही है।
बर्खास्तगी की पृष्ठभूमि – जनवरी 2026 की बैठक
जनवरी 2026 के मध्य में प्योंगयांग में आयोजित वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया (WPK) की एक महत्वपूर्ण प्लेनरी मीटिंग के दौरान किम जोंग-उन ने आर्थिक विफलताओं पर कड़ा रुख अपनाया। इसी बैठक के दौरान कैबिनेट के डिप्टी पीएम यांग सुंग-हो को उनके पद से मुक्त करने की घोषणा की गई।
बर्खास्तगी का मुख्य कारण
आधिकारिक तौर पर उत्तर कोरिया ने हमेशा की तरह “अक्षमता” और “कर्तव्य के प्रति लापरवाही” जैसे शब्दों का प्रयोग किया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के अनुसार इसके तीन मुख्य कारण थे|
- आर्थिक विकास की ’20×10 नीति’ में विफलता – किम जोंग-उन ने 2024 में एक योजना शुरू की थी जिसका लक्ष्य 10 वर्षों में 20 जिलों के जीवन स्तर को सुधारना था। यांग सुंग-हो इस परियोजना के लॉजिस्टिक्स और संसाधन प्रबंधन के प्रभारी थे। 2025 के अंत तक कई क्षेत्रों में निर्माण कार्य अधूरा रहने और सामग्री की कमी के कारण उन्हें दोषी ठहराया गया।
- कृषि और वितरण प्रणाली में खामियां – उत्तर कोरिया वर्तमान में खाद्य वितरण प्रणाली को पूरी तरह से राज्य के नियंत्रण में लाने की कोशिश कर रहा है। यांग सुंग-हो इस संक्रमण को सुचारू रूप से लागू करने में विफल रहे, जिससे स्थानीय बाजारों में असंतोष पैदा हुआ।
- अनुशासनहीनता का आरोप – रिपोर्टों के अनुसार, उन पर “औपचारिक व्यवहार” (Formalism) का आरोप लगाया गया, जिसका अर्थ है कि उन्होंने केवल कागजों पर काम दिखाया और जमीनी हकीकत की अनदेखी की।
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वह भाषण जिसने ‘शुद्धिकरण’ (Purge) की शुरुआत की
किम जोंग-उन ने “पार्टी की आर्थिक नीतियों के कार्यान्वयन में क्रांतिकारी बदलाव” विषय पर एक लंबा भाषण दिया। इस भाषण के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे
“कैबिनेट के अधिकारी केवल आदेशों का इंतजार करते हैं और जिम्मेदारी लेने से डरते हैं। यदि कोई अधिकारी जनता के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।”
इस भाषण के तुरंत बाद ही यांग सुंग-हो सहित कई अन्य अधिकारियों के नामों की घोषणा की गई जिन्हें उनके पदों से हटा दिया गया था।
पिछले सप्ताह के तबादले और बर्खास्तगी
यांग सुंग-हो की बर्खास्तगी कोई अकेली घटना नहीं थी। पिछले एक सप्ताह में उत्तर कोरियाई प्रशासन में बड़े पैमाने पर फेरबदल देखा गया है|
| अधिकारी का क्षेत्र | कार्रवाई | संभावित कारण |
| प्रांतीय पार्टी समितियाँ | 3 सचिवों का तबादला | स्थानीय कृषि उत्पादन में कमी |
| रक्षा उद्योग मंत्रालय | वरिष्ठ निदेशक की बर्खास्तगी | नई मिसाइल तकनीकों के परीक्षण में देरी |
| कैबिनेट सचिवालय | कई मध्य-स्तरीय अधिकारियों का निष्कासन | भ्रष्टाचार और ‘अधिकारियों जैसा व्यवहार’ (Bureaucratism) |
क्यों कर रहे हैं ऐसा किम जोंग-उन
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 की शुरुआत में यह “शुद्धिकरण अभियान” किम जोंग-उन की एक सोची-समझी रणनीति है|
- बलि का बकरा बनाना – जब आर्थिक नीतियां विफल होती हैं, तो तानाशाह अक्सर निचले अधिकारियों को दोषी ठहराकर जनता का ध्यान भटकाते हैं।
- सत्ता पर नियंत्रण – नए अधिकारियों की नियुक्ति से किम जोंग-उन यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रशासन में कोई भी व्यक्ति इतना शक्तिशाली न हो जाए कि वह उनके लिए खतरा बने।
- चेतावनी – यह अन्य अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि वफादारी के साथ-साथ परिणाम देना भी अनिवार्य है।
भविष्य के संकेत
यांग सुंग-हो की बर्खास्तगी के बाद, उनकी जगह एक युवा तकनीकी विशेषज्ञ (Technocrat) को लाने की संभावना है जो आधुनिक प्रबंधन तकनीकों से परिचित हो। हालांकि, उत्तर कोरिया की कठोर नीतियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच, केवल चेहरों को बदलने से आर्थिक स्थिति में सुधार आना कठिन लगता है।
नोट – उत्तर कोरिया की खबरें अक्सर राज्य द्वारा नियंत्रित मीडिया से छनकर आती हैं। यांग सुंग-हो के वर्तमान ठिकाने के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है, जो उत्तर कोरियाई राजनीति की क्रूर वास्तविकता को दर्शाता है।
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