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बांग्लादेश में यूनुस सरकार का ‘ऑपरेशन डेविल हंट-2’ शुरू, हिंसा पर आलोचना के बाद 24 घंटे में 663 गिरफ्तार

ऑपरेशन डेविल हंट-2
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 25, 2025 11:17 पूर्वाह्न
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हिंसा और अराजकता के बीच यूनुस सरकार पर बढ़ता दबाव

बांग्लादेश में लगातार बढ़ती हिंसा और कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के बीच अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस एक बार फिर सख्त रुख अपनाने को मजबूर हुए हैं। देश के कई हिस्सों में हाल के दिनों में आगजनी, तोड़फोड़, राजनीतिक हिंसा और प्रशासन पर हमलों की घटनाओं ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे। विपक्षी दलों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी यूनुस सरकार की आलोचना तेज हो गई थी कि वह हालात पर नियंत्रण नहीं रख पा रही है।

ऑपरेशन डेविल हंट-2

इसी दबाव के बीच सरकार ने ‘ऑपरेशन डेविल हंट-2’ की शुरुआत की है। यह अभियान पहले चलाए गए ऑपरेशन का विस्तारित और ज्यादा सख्त रूप बताया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इसका मकसद हिंसा फैलाने वाले संगठनों, उपद्रवियों और कानून को चुनौती देने वाले तत्वों पर निर्णायक कार्रवाई करना है। इस ऑपरेशन के तहत महज 24 घंटे के भीतर 663 लोगों की गिरफ्तारी ने यह संकेत दे दिया है कि सरकार अब नरमी के बजाय सख्ती के रास्ते पर चलने के मूड में है। सरकारी बयान के मुताबिक, देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डालने वालों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई जाएगी। यूनुस सरकार यह भी संदेश देना चाहती है कि हिंसा के जरिए दबाव बनाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

‘ऑपरेशन डेविल हंट-2’: क्या है सरकार की रणनीति

‘ऑपरेशन डेविल हंट-2’ को पहले अभियान से ज्यादा व्यापक और संगठित माना जा रहा है। इसमें पुलिस, अर्धसैनिक बलों और खुफिया एजेंसियों को एक साथ सक्रिय किया गया है। राजधानी ढाका के साथ-साथ संवेदनशील जिलों में रातभर छापेमारी, चेकिंग और संदिग्ध ठिकानों पर कार्रवाई की गई। गिरफ्तार किए गए लोगों में हिंसक प्रदर्शनों में शामिल आरोपी, आपराधिक गिरोहों से जुड़े तत्व और कुछ राजनीतिक संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता भी शामिल बताए जा रहे हैं।सरकार का कहना है कि बीते कुछ हफ्तों में हुई हिंसा कोई स्वतःस्फूर्त घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे संगठित साजिश थी, जिसका मकसद देश में अस्थिरता फैलाना और अंतरिम सरकार को कमजोर दिखाना था। इसी कारण इस बार अभियान को “मिशन मोड” में चलाया जा रहा है।

हालांकि मानवाधिकार संगठनों ने इस ऑपरेशन को लेकर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां यह आशंका पैदा करती हैं कि कहीं निर्दोष लोगों को भी निशाना न बनाया जा रहा हो। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी कार्रवाई कानूनी दायरे में की जा रही है और केवल ठोस सबूतों के आधार पर ही गिरफ्तारी हो रही है।

यूनुस सरकार के करीबी सूत्रों का मानना है कि अगर हालात पर जल्दी नियंत्रण नहीं पाया गया, तो देश की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय छवि दोनों को गंभीर नुकसान हो सकता है। इसी वजह से ‘ऑपरेशन डेविल हंट-2’ को निर्णायक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

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राजनीतिक संदेश और आगे की राह ‘ऑपरेशन डेविल हंट-2’

केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। अंतरिम सरकार पर पहले ही यह आरोप लगते रहे हैं कि वह प्रभावी नेतृत्व देने में असफल रही है। ऐसे में यह ऑपरेशन यूनुस सरकार की ताकत और इरादों को दिखाने का प्रयास भी माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां करके सरकार एक स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि वह किसी भी तरह की अराजकता को बर्दाश्त नहीं करेगी। यह संदेश न केवल हिंसा में शामिल तत्वों के लिए है, बल्कि उन राजनीतिक ताकतों के लिए भी है जो सड़कों पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रही हैं।

हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या केवल सख्ती से हालात लंबे समय तक काबू में रह पाएंगे। बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता की जड़ें गहरी हैं और अंतरिम सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती विश्वास बहाली की है। अगर ‘ऑपरेशन डेविल हंट-2’ के बाद भी संवाद और राजनीतिक समाधान की कोशिश नहीं की गई, तो असंतोष फिर उभर सकता है।

फिलहाल यूनुस सरकार इस अभियान को अपनी साख बचाने की आखिरी बड़ी कोशिश के तौर पर देख रही है। 24 घंटे में 663 गिरफ्तारियां यह दिखाती हैं कि सरकार पूरी ताकत झोंक चुकी है। अब आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह सख्ती देश में शांति और स्थिरता लौटाने में सफल होती है या फिर बांग्लादेश की राजनीति में तनाव का एक नया अध्याय जोड़ देती है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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