व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

​रवींद्रनाथ टैगोर जयंती 2026 –  एक युगपुरुष की विरासत और ‘पोचीश बोइशाख’ का महत्व​

​रवींद्रनाथ टैगोर जयंती 2026 -  एक युगपुरुष की विरासत और 'पोचीश बोइशाख' का महत्व​
नवजोत कौर सिद्धू
On: मई 6, 2026 2:08 अपराह्न
Follow Us:

​9 मई 2026 को भारत और विश्व भर के कला प्रेमी, साहित्यकार और विचारक मानवतावाद के सबसे बड़े पैरोकार, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती मनाएंगे। वह न केवल एक कवि थे बल्कि एक दार्शनिक, संगीतकार, चित्रकार और शिक्षाविद् भी थे जिन्होंने भारतीय साहित्य और संस्कृति को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दी।

​टैगोर जयंती  जिसे बंगाली कैलेंडर के अनुसार ‘पोचीश बोइशाख’ (25वां वैशाख) के रूप में मनाया जाता है केवल एक तिथि नहीं है यह उस विचार का उत्सव है जिसने “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को अपनी कविताओं में पिरोया।

​तिथि और कैलेंडर का गणित – 2026 का विशेष महत्व

​गुरुदेव का जन्म 7 मई 1861 को हुआ था लेकिन बंगाल में उनकी जयंती ‘बंगाली पंचांग’ के अनुसार मनाई जाती है।

  • ग्रेगोरियन कैलेंडर – 9 मई 2026 (शनिवार)
  • बंगाली कैलेंडर – 25 वैशाख 1433

​यह दिन पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश और दुनिया भर के बंगाली समुदायों के लिए एक सांस्कृतिक पर्व की तरह होता है। शनिवार का दिन होने के कारण इस वर्ष उत्सव की भव्यता और भी अधिक होने की उम्मीद है क्योंकि लोग अवकाश के दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले सकेंगे।

read more :

​प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि

​कोलकाता के ‘जोड़ासांको ठाकुरबाड़ी’ में जन्मे रवींद्रनाथ, महर्षि देवेंद्रनाथ टैगोर और शारदा देवी की 14वीं संतान थे। उनका परिवार बंगाल पुनर्जागरण का केंद्र था।

  • शिक्षा –  उन्हें स्कूली शिक्षा के चार दीवारी वाले माहौल से नफरत थी। वे प्रकृति की गोद में सीखना पसंद करते थे।
  • लंदन यात्रा –  उनके पिता उन्हें कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड भेजना चाहते थे लेकिन रवींद्रनाथ का मन तो शेक्सपियर और अंग्रेजी साहित्य में था। वे बिना डिग्री लिए वापस आ गए लेकिन उनके पास अनुभवों का एक विशाल खजाना था।

 विश्वकवि की साहित्यिक यात्रा

​टैगोर ने 8 वर्ष की आयु में कविता लिखना शुरू किया और 16 वर्ष की आयु में ‘भानुसिंह’ उपनाम से अपनी पहली रचना प्रकाशित की।

​गीतांजलि और नोबेल पुरस्कार

​वर्ष 1913 में रवींद्रनाथ टैगोर अपनी कविताओं के संग्रह ‘गीतांजलि’ के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले गैर-यूरोपीय बने। उनकी कविताओं में आध्यात्मिकता, प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं का जो संगम है वह अद्वितीय है।

​प्रमुख रचनाएँ

  • उपन्यास –  गोरा, घरे-बाइरे (The Home and the World), चोखेर बाली।
  • नाटक – विसर्जन, डाकघर, रक्ता करबी।
  • संगीत –  उन्होंने 2000 से अधिक गीतों की रचना की, जिन्हें ‘रवींद्र संगीत’ कहा जाता है।

​ दो देशों के राष्ट्रगान के रचयिता

​दुनिया के इतिहास में रवींद्रनाथ टैगोर अकेले ऐसे कवि हैं जिनकी रचनाओं को दो देशों ने अपने राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया

  • जन गण मन – भारत का राष्ट्रगान।
  • आमार शोनार बांग्ला –  बांग्लादेश का राष्ट्रगान।

 नोट – श्रीलंका के राष्ट्रगान पर भी उनकी शैली और शिक्षाओं का गहरा प्रभाव माना जाता है।

​ शांतिनिकेतन और विश्व भारती विश्वविद्यालय

​टैगोर का मानना था कि शिक्षा केवल जानकारी प्राप्त करना नहीं है बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाना है। उन्होंने 1901 में शांतिनिकेतन की स्थापना की जो बाद में विश्व भारती विश्वविद्यालय बना।

  • ​यहाँ कक्षाएं पेड़ों के नीचे लगती थीं।
  • ​यह भारत की ‘गुरुकुल’ परंपरा और आधुनिक विचारों का मेल था।
  • ​2023 में यूनेस्को ने शांतिनिकेतन को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया जो 2026 की जयंती पर गर्व का एक अतिरिक्त विषय होगा।

​सामाजिक और राजनीतिक विचार

​टैगोर का राष्ट्रवाद संकीर्ण नहीं था। उन्होंने ‘राष्ट्रवाद’ से ऊपर ‘मानवतावाद’ को रखा।

  • जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919) –  इस नरसंहार के विरोध में उन्होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा दी गई ‘नाइटहुड’ (सर) की उपाधि लौटा दी थी।
  • महात्मा गांधी के साथ संबंध –  उन्होंने ही मोहनदास करमचंद गांधी को ‘महात्मा’ की उपाधि दी थी जबकि गांधी जी उन्हें ‘गुरुदेव’ कहकर संबोधित करते थे। हालांकि कई मुद्दों पर दोनों के बीच वैचारिक मतभेद भी थे जो उनकी बौद्धिक स्वतंत्रता को दर्शाते हैं।

​टैगोर एक चित्रकार के रूप में

​हैरानी की बात यह है कि टैगोर ने अपनी चित्रकला की यात्रा 60 वर्ष की आयु के बाद शुरू की। उनके चित्रों में एक अजीब सी रहस्यमयता और आधुनिकता थी। उनके स्केच और पेंटिंग्स आज भी दुनिया भर की दीर्घाओं में शोध का विषय हैं।

​2026 में उत्सव का स्वरूप –  कैसे मनाएं?

​2026 की टैगोर जयंती को आप निम्नलिखित तरीकों से यादगार बना सकते हैं

​सांस्कृतिक कार्यक्रम

​स्कूलों और कॉलेजों में ‘रवींद्र संगीत’ की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा सकती हैं। उनके नाटकों जैसे ‘चंडालिका’ या ‘चित्रांगदा’ का मंचन नई पीढ़ी को उनकी जड़ों से जोड़ सकता है।

​डिजिटल सेलिब्रेशन

​चूँकि 2026 तक तकनीक और विकसित होगी वर्चुअल रियलिटी (VR) के माध्यम से शांतिनिकेतन की यात्रा या ऑनलाइन कविता पाठ के वैश्विक सत्र आयोजित किए जा सकते हैं।

​टैगोर के साहित्य का अध्ययन

​इस दिन संकल्प लें कि आप उनकी कम से कम एक पुस्तक पढ़ेंगे। “गोरा” राष्ट्रवाद और धर्म पर आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी 100 साल पहले थी।

​ टैगोर के अनमोल विचार (Quotes for 2026)

  • ​”प्रसन्न रहना बहुत सरल है, लेकिन सरल होना बहुत कठिन है।”
  • ​”सिर्फ खड़े होकर पानी देखने से आप समुद्र पार नहीं कर सकते।”
  • ​”फूल की पंखुड़ियों को तोड़कर आप उसकी सुंदरता इकट्ठा नहीं करते।”
  • ​”आस्था वह पक्षी है जो भोर के अंधेरे में भी प्रकाश को महसूस करता है और गाता है।”

​उपसंहार –  टैगोर की प्रासंगिकता

​आज के दौर में जहाँ दुनिया युद्ध, कट्टरता और पर्यावरणीय समस्याओं से जूझ रही है, टैगोर के विचार एक मशाल की तरह हैं। उनका ‘Universalism’ (विश्व-बंधुत्व) हमें सिखाता है कि हम पहले इंसान हैं, बाद में किसी देश या धर्म के नागरिक।

​2026 में उनकी 165वीं जयंती मनाते समय, हमारा उद्देश्य केवल उनकी तस्वीर पर माला चढ़ाना नहीं होना चाहिए बल्कि उनके उस ‘स्वप्न के भारत’ को बनाने का प्रयास करना चाहिए जहाँ

“चित्त जहाँ भयशून्य हो, और मस्तक जहाँ ऊँचा हो…”

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment