व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

Rajasthan News: इस्लामपुर का नाम बदलकर श्रीरामपुर करने की सिफारिश, ग्रामीणों का विरोध

Rajasthan News: इस्लामपुर का नाम बदलकर श्रीरामपुर करने की सिफारिश, ग्रामीणों का विरोध
नवजोत कौर सिद्धू
On: जून 23, 2026 1:39 अपराह्न
Follow Us:

राजस्थान के झुंझुनूं जिले का इस्लामपुर गांव इन दिनों नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को लेकर चर्चा में है। गांव का नाम बदलकर श्रीरामपुर करने की सिफारिश के बाद जहां एक ओर विरोध तेज हो गया है, वहीं कुछ ग्रामीण इस प्रस्ताव का समर्थन भी कर रहे हैं। प्रशासन फिलहाल दस्तावेजों और तथ्यों की जांच में जुटा है।

नाम बदलने की सिफारिश से शुरू हुआ विवाद

इस्लामपुर गांव झुंझुनूं जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर स्थित है। सरकारी रिकॉर्ड, स्कूल और हाईवे के साइनबोर्ड पर गांव का नाम इस्लामपुर दर्ज है। गांव में नाम परिवर्तन की चर्चा अब प्रमुख मुद्दा बन चुकी है।

सरपंच आमीन मनियार के अनुसार, 17 फरवरी 2026 को स्थानीय भाजपा विधायक राजेंद्र भाम्बू ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गांव का नाम बदलकर श्रीरामपुर करने की अनुशंसा की थी। इसके बाद 3 जून को तहसीलदार ने ग्राम सभा से नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पारित कर भेजने के लिए कहा।

हालांकि, ग्राम पंचायत ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया और इसकी जानकारी पत्र के माध्यम से प्रशासन को दे दी गई।

भाजपा संगठन में भारी फेरबदल – चार राज्यों को मिले नए प्रदेश अध्यक्ष

मुख्यमंत्री कार्यालय से भी भेजा गया पत्र

विधायक के पत्र का हवाला देते हुए 29 मई को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कार्यालय से झुंझुनूं जिला कलेक्टर को इस्लामपुर का नाम श्रीरामपुर करने संबंधी पत्र भेजा गया।

भाजपा विधायक राजेंद्र भाम्बू का दावा है कि मुगल काल से पहले गांव का नाम श्रीरामपुर था। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 1990 में विश्व हिंदू परिषद के पत्राचार में भी श्रीरामपुर नाम का उल्लेख मिलता है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि इस दावे से जुड़े दस्तावेज अभी जुटाए जा रहे हैं।

प्रशासन कर रहा है दस्तावेजों की जांच

झुंझुनूं जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने बताया कि नाम परिवर्तन से संबंधित प्रतिवेदन प्राप्त हुआ है और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक जानकारियां एकत्रित की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि प्रशासन को नाम परिवर्तन के समर्थन और विरोध दोनों पक्षों से ज्ञापन मिले हैं। इनके साथ उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच भी की जा रही है। फिलहाल सरकार को कोई अंतिम रिपोर्ट नहीं भेजी गई है।

ग्रामीणों ने जताया विरोध

विकास के मुद्दों को प्राथमिकता देने की मांग

गांव के कई लोगों का कहना है कि जब शिक्षा, रोजगार और पानी जैसी मूलभूत समस्याएं मौजूद हैं, तब नाम बदलना प्राथमिकता नहीं होना चाहिए।

66 वर्षीय मनीराम, जो गांव में किराने की दुकान चलाते हैं, कहते हैं कि गांव का नाम सदियों से इस्लामपुर है और यहां हिंदू-मुस्लिम समुदाय भाईचारे के साथ रहता आया है।

बीएड की छात्रा सबा खानम का भी मानना है कि नाम परिवर्तन के जरिए लोगों को बांटने की कोशिश की जा रही है।

स्थानीय निवासी सोनी देवी ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे से गांव में तनाव बढ़ सकता है।

भारतीय सेना से सेवानिवृत्त 82 वर्षीय कैप्टन इस्माइल खान का कहना है कि बिना व्यापक सहमति के इस तरह का प्रस्ताव आगे बढ़ाया जा रहा है।

वहीं, इब्राहिम खान ने दावा किया कि ग्रामीणों ने प्रशासन को पुरानी किताबें, स्कूल की रसीदें, लगान संबंधी दस्तावेज और वर्ष 1904 का शिक्षा विभाग का रिपोर्ट कार्ड सहित कई प्रमाण सौंपे हैं, जिनमें गांव का नाम इस्लामपुर दर्ज है।

इस्लामपुर का नाम बदलकर श्रीरामपुर करने की सिफारिश, ग्रामीणों का विरोध

विरोध प्रदर्शन और सरकार को चेतावनी

15 जून को निकाली गई पदयात्रा

नाम परिवर्तन के विरोध में ग्रामीण 15 जून को करीब 18 किलोमीटर की पदयात्रा कर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंप चुके हैं।

सरपंच आमीन मनियार का कहना है कि यदि सरकार ने ग्रामीणों की मांग नहीं मानी तो जयपुर तक कूच किया जाएगा और बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन धरना और आमरण अनशन भी किया जाएगा। हालांकि, उनके अनुसार जिला कलेक्टर ने भरोसा दिलाया है कि प्रशासन इस मामले में जल्दबाजी नहीं करेगा।

तमिलनाडु की सियासत में बड़ा उलटफेर: के. अन्नामलाई का भाजपा से इस्तीफा, नितिन नवीन ने दी मंजूरी

भाजपा पर लगाए गए राजनीतिक आरोप

ग्रामीणों के एक वर्ग ने आरोप लगाया कि नाम परिवर्तन के मुद्दे के जरिए राजनीतिक लाभ लेने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।

इन आरोपों पर विधायक राजेंद्र भाम्बू ने कहा कि जिले में आज भी पहले जैसा भाईचारा कायम है और किसी प्रकार की सांप्रदायिक राजनीति नहीं की जा रही।

पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने भी ग्रामीणों के विरोध का समर्थन करते हुए इस मुद्दे को लोगों के बीच मतभेद पैदा करने का प्रयास बताया है।

गांव का एक वर्ग नाम परिवर्तन के पक्ष में

श्रीरामपुर नाम की बहाली की मांग

हालांकि, गांव के कुछ लोग नाम बदलने के समर्थन में भी हैं।

स्थानीय निवासी सुमेर सिंह का दावा है कि करीब 5,000 लोग श्रीरामपुर नाम के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि पहले गांव का नाम श्रीरामपुर था, बाद में मुगल काल में सलामपुर और वर्ष 1958 में पंचायती राज के दौरान इसका नाम इस्लामपुर कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि समर्थन में दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं, जिन्हें जल्द प्रशासन को सौंपा जाएगा।

इसी तरह गांव के सौरभ योगी ने कहा कि उन्होंने चुनाव के दौरान ही विधायक से श्रीरामपुर नाम बहाल करने की मांग की थी। उनका दावा है कि वे हरिद्वार से पूर्वजों के रिकॉर्ड लाकर प्रशासन को सौंपेंगे।

Conclusion

इस्लामपुर का नाम बदलकर श्रीरामपुर करने की सिफारिश ने गांव को दो अलग-अलग मतों में बांट दिया है। एक ओर बड़ी संख्या में ग्रामीण नाम परिवर्तन का विरोध कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर कुछ लोग इसे ऐतिहासिक पहचान की बहाली बता रहे हैं। फिलहाल प्रशासन सभी उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई करेगा।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment