राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने हाल के समय में संघ की कार्यपद्धति और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर विशेष बल दिया है। उनका मानना है कि बदलते युग में यदि संगठन को अपनी पहुंच बढ़ानी है और राष्ट्र निर्माण के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है, तो सोशल मीडिया जैसे शक्तिशाली माध्यमों से दूरी बनाना संभव नहीं है।
डॉ. मोहन भागवत का दृष्टिकोण – सोशल मीडिया और संघ
डॉ. भागवत का स्पष्ट मत है कि “समय के साथ परिवर्तन ही जीवंतता का लक्षण है।” उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों में रेखांकित किया है कि सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह जनमत (Public Opinion) बनाने का सबसे बड़ा मंच बन चुका है।
सक्रियता बढ़ाने के मुख्य कारण
- भ्रामक सूचनाओं का मुकाबला – डॉ. भागवत के अनुसार, अक्सर संघ की छवि को लेकर सोशल मीडिया पर नकारात्मक या गलत जानकारी प्रसारित की जाती है। यदि स्वयंसेवक इस मंच पर सक्रिय नहीं होंगे तो समाज तक केवल एकतरफा और भ्रामक जानकारी ही पहुँचेगी।
- युवा पीढ़ी से जुड़ाव – भारत की अधिकांश युवा जनसंख्या डिजिटल रूप से सक्रिय है। उनके विचारों और आदर्शों को दिशा देने के लिए संघ को उसी भाषा और प्लेटफॉर्म पर संवाद करना होगा जिसे युवा पसंद करते हैं।
- स्वयंसेवकों का वैचारिक प्रबोधन – सोशल मीडिया के माध्यम से देशभर के लाखों स्वयंसेवकों को एक साथ वैचारिक सामग्री उपलब्ध कराई जा सकती है।
सोशल मीडिया – एक दोधारी तलवार
संघ प्रमुख ने जहाँ इसके उपयोग की वकालत की है वहीं इसके खतरों के प्रति आगाह भी किया है। उनके वक्तव्यों का सार यह है कि सोशल मीडिया का उपयोग ‘प्रचार’ के लिए नहीं बल्कि ‘सत्य की स्थापना’ के लिए होना चाहिए।
| पक्ष | संघ की रणनीति |
| संवाद | समाज के अंतिम व्यक्ति तक सीधा संदेश पहुँचाना। |
| सतर्कता | ट्रोलिंग और अभद्र भाषा से बचकर मर्यादित संवाद करना। |
| सत्यता | केवल प्रमाणित और तथ्यपरक जानकारी साझा करना। |
संघ की डिजिटल रणनीति के मुख्य स्तंभ
डॉ. भागवत के आह्वान के बाद संघ अपनी डिजिटल उपस्थिति को निम्नलिखित तरीकों से मजबूत कर रहा है
- ’आईटी मिलन’ और तकनीकी प्रकोष्ठ – संघ ने नगर स्तर पर ‘आईटी मिलन’ कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाई है जहाँ सॉफ्टवेयर इंजीनियर और डिजिटल विशेषज्ञ स्वयंसेवक के रूप में जुड़कर तकनीक के माध्यम से राष्ट्र सेवा पर चर्चा करते हैं।
- कंटेंट निर्माण (Content Creation) – अब संघ केवल शाखाओं तक सीमित नहीं है। वह पॉडकास्ट, शॉर्ट वीडियो (Reels/Shorts), और इन्फोग्राफिक्स के माध्यम से अपने सेवा कार्यों (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्राम विकास) को प्रदर्शित कर रहा है।
- साइबर सुरक्षा और एथिक्स – मोहन भागवत ने बल दिया है कि सोशल मीडिया का उपयोग करते समय “अहंकार” से बचना चाहिए। प्रतिक्रिया देते समय भाषा की मर्यादा बनी रहनी चाहिए जो कि संघ के मूल संस्कार हैं।
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समाज पर प्रभाव और भविष्य की राह
जब संघ जैसा बड़ा संगठन डिजिटल रूप से सक्रिय होता है तो उसका प्रभाव व्यापक होता है। डॉ. भागवत का मानना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से ‘स्व’ स्वदेशी, स्वभाषा, स्वसंस्कृति के विचार को वैश्विक पटल पर रखा जा सकता है।
”हमें तकनीक का दास नहीं बनना है बल्कि तकनीक को अपना उपकरण बनाकर राष्ट्रहित में उसका सदुपयोग करना है।” यह डॉ. भागवत के संदेश का मूल मंत्र है।
एक नए युग की शुरुआत
डॉ. मोहन भागवत का यह आह्वान दर्शाता है कि आरएसएस अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार है। सोशल मीडिया पर सक्रियता केवल उपस्थिति दर्ज कराने के लिए नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने और ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को सिद्ध करने के लिए है।







