RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत की सुरक्षा को लेकर HC में याचिका दायर की गई है। यह याचिका नागपुर में रहने वाले ललन सिंह ने अपने वकील के द्वारा HC में याचिका दायर करवाई है। हालांकि HC में इस याचिका को खारिज कर दिया गया है। याचिका में यह दावा किया गया है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ एक पंजीकृत संगठन नहीं है इसलिए मोहन भागवत की सुरक्षा का खर्चा सरकार को वहन नहीं करना चाहिए बल्कि RSS को खर्चा खुद वहन करना चाहिए। जनता के टैक्स के पैसे को इस तरीके से बर्बाद करना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस पूरे मामले में अभी तक RSS की तरफ से की आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सुरक्षा में 40 से 45 लाख खर्च होने का दावा
हाईकोर्ट में यह दावा किया गया है कि मोहन भागवत की सुरक्षा में मासिक खर्चा 40 से 45 लाख रुपए है। इस पूरे खर्च खर्चे का वहन सरकार उठाती है। ज्ञात हो कि मोहन भागवत को Z+ सुरक्षा केंद्र सरकार से प्राप्त है। साल 2015 से मोहन भागवत को z+ श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है। HC में दायर याचिका को HC ने ख़ारिज कर दिया और उस बात का हवाला दिया जिसमें बिजनेसमैन मुकेश अंबानी को सरकार न z+ श्रेणी की सुरक्षा मुहैया करवाई थी। मोहन भागवत पूरे देश में संघ के कार्यक्रमों के लिए भ्रमण करते है। मोहन भागवत हमेशा सीआरपीएफ जवानों के घेरे में होते है। मोहन भागवत हमेशा भीड़ भाड़ वाले जगहों में रहते है जिस कारण उनकी सुरक्षा और बढ़ जाती है।
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क्या है RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ)
RSS एक सामाजिक संगठन है जिसकी स्थापना 1925 को विजयदशमी के दिन नागपुर में डॉ बलिराम हेडगेवार ने की थी। RSS को एक हिंदू संगठन भी कहा जा सकता है जो हिंदुत्व की बात करता है। RSS की अनेक इकाइयां है जिसमें हर क्षेत्र के लोग काम करते है। भारतीय जनता पार्टी भी RSS का ही एक अंग है। इसलिए जब कभी भी RSS की बैठक होती है तब बीजेपी के बड़े बड़े नेता उस बैठक में दिखाई पड़ जाते है। अभी लगभग 50 इकाइयों में RSS का काम है। संघ ने 2025 में अपना शताब्दी वर्ष मनाया है। संघ लगातार समाज को एक करने के उद्देश्य से काम करते आया है। RSS के कई स्कूल्स विधा भारती इकाई के माध्यम से पूरे देश में सरस्वती शिशु मंदिर के नाम से संचालित हो रहे है।
याचिका में RSS के पंजीकृत संगठन न होने का दावा
RSS दुनिया का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन है। जिसका विस्तार केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के 22 देशों तक फैल हुआ है। HC में दायर याचिका में RSS के पंजीकृत न होने का दावा किया गया है। ललन सिंह ने दावा किया कि RSS एक पंजीकृत संगठन नहीं है फिर भी केंद्र सरकार मोहन भागवत को z+ श्रेणी की सुरक्षा मुहैया करा रही है। जनता के टैक्स का पैसा सही जगह जाना चाहिए जबकि जनता का पैसा अपंजीकृत संगठन के प्रमुख की सुरक्षा में लगाया जा रहा हैं। जब भी की मामला RSS के विरुद्ध आता है तब RSS अपने आधिकारिक पत्र के माध्यम से उत्तर देती है।







