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शेयर बाजार में आज तेजी- सेंसेक्स 500 निफ्टी में भी करीब 150 अंक की तेजी कच्चे हॉर्मुज को लेकर अमेरिका की बड़ी चेतावनी तेल रोका तो ईरान पर 20 गुना ताकत से हमला9% की गिरावट ट्रंप के बयान का असर 

शेयर बाजार में आज तेजी- सेंसेक्स 500 निफ्टी में भी करीब 150 अंक की तेजी कच्चे तेल 9% की गिरावट
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 10, 2026 8:34 अपराह्न
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आज यानी 10 मार्च 2026 को शेयर बाजार में जो जबरदस्त रौनक देखने को मिली है वह निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आई है। पिछले कुछ दिनों से जारी अनिश्चितता के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में आया यह उछाल वैश्विक संकेतों, विशेषकर कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों का परिणाम है।

​शेयर बाजार का आज का हाल – एक विहंगम दृश्य

​भारतीय शेयर बाजार ने आज सुबह के सत्र में ही अपनी मजबूती दिखा दी थी। पिछले कारोबारी सत्र में जहाँ भारी गिरावट देखी गई थी वहीं आज बाजार ने ‘गैप-अप’ ओपनिंग के साथ शुरुआत की।

  • सेंसेक्स (Sensex) – बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सूचकांक सेंसेक्स लगभग 500 से 800 अंकों की बढ़त के साथ 78,000 के स्तर पर का कारोबार करता दिखा। इसने न केवल मनोवैज्ञानिक स्तरों को फिर से हासिल किया बल्कि निवेशकों के पोर्टफोलियो में हरियाली वापस ला दी।
  • निफ्टी (Nifty) –  नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी पीछे नहीं रहा। इसमें करीब 150 से 200 अंकों की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी का 24,200 के स्तर को पार करना तकनीकी रूप से बाजार के लिए काफी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

​कच्चे तेल में 9% की भारी गिरावट: क्या है वजह?

​आज की सबसे बड़ी खबर कच्चे तेल (Crude Oil) के मोर्चे से आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 9% से 10% तक की ऐतिहासिक गिरावट देखी गई। कल तक जो कच्चा तेल $119 प्रति बैरल के शिखर को छू रहा था वह अचानक लुढ़क कर $90 के नीचे आ गया है।

​इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं

  • ट्रंप का ‘शांति’ संकेत –  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने हालिया बयान में कहा कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष “काफी हद तक पूर्ण” (pretty much complete) हो चुका है। इस बयान ने बाजार से ‘युद्ध का जोखिम प्रीमियम’ (War Risk Premium) कम कर दिया।
  • रणनीतिक तेल भंडार (SPR) – G7 देशों के ऊर्जा मंत्रियों ने संकेत दिया है कि वे बाजार में आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अपने रणनीतिक तेल भंडारों से तेल जारी कर सकते हैं।
  • आपूर्ति की बहाली –  हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर से सुचारू होने की खबरों ने आपूर्ति संबंधी चिंताओं को दूर किया है।

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​बाजार की इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा ट्रिगर डोनाल्ड ट्रंप के बयान रहे हैं। ट्रंप ने न केवल युद्ध के जल्द समाप्त होने की बात कही बल्कि उन्होंने ऊर्जा कीमतों को कम करने के लिए कुछ “तेल-संबंधित प्रतिबंधों” (Oil-related sanctions) को अस्थायी रूप से हटाने का भी वादा किया।

​”हम कीमतों को कम करने के लिए कुछ तेल प्रतिबंधों को हटा रहे हैं। मैं किसी भी आतंकवादी शासन को दुनिया की तेल आपूर्ति रोकने की अनुमति नहीं दूंगा।” – राष्ट्रपति ट्रंप (10 मार्च 2026)

​उनके इस बयान ने वैश्विक बाजारों में विश्वास जगाया कि अमेरिका ऊर्जा की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है। इसका सीधा असर अमेरिकी बाजारों (Wall Street) पर पड़ा, जहाँ डॉव जोन्स और नैस्डैक में उछाल आया, और भारतीय बाजार ने उसी सकारात्मक भावना को आगे बढ़ाया।

​भारतीय अर्थव्यवस्था और निवेशकों पर प्रभाव

​भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है। इसलिए, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए “बूस्टर डोज” की तरह काम करती है।

​किन सेक्टर्स को हुआ सबसे ज्यादा फायदा?

  • पेंट और एडहेसिव –  पेंट कंपनियों (जैसे Asian Paints, Berger Paints) के लिए कच्चा तेल मुख्य कच्चा माल है। तेल सस्ता होने से इनके मार्जिन में सुधार की उम्मीद बढ़ी है।
  • एविएशन (Aviation) -। एयरलाइंस का 40% खर्च ईंधन (ATF) पर होता है। इंडिगो और स्पाइसजेट जैसे शेयरों में आज इसीलिए 3-4% की तेजी देखी गई।
  • टायर और लॉजिस्टिक्स –  रबड़ और परिवहन लागत कम होने की उम्मीद ने इन क्षेत्रों को भी हरा कर दिया है।
  • ऑटो सेक्टर –  ईंधन की कीमतें स्थिर रहने या घटने की संभावना से नई गाड़ियों की मांग में सुधार होता है।

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​आगे की राह –  क्या यह तेजी टिकी रहेगी?

​बाजार के जानकारों का मानना है कि आज की तेजी एक “राहत भरी रैली” (Relief Rally) है। हालांकि कुछ चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं

  • विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली –  पिछले कुछ समय से विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। यदि वे फिर से खरीदारी शुरू करते हैं, तो बाजार में स्थायी मजबूती आएगी।
  • भू-राजनीतिक स्थिरता –  हालांकि ट्रंप ने सकारात्मक संकेत दिए हैं, लेकिन मध्य पूर्व (Middle East) में वास्तविक शांति कितनी स्थायी होती है, इस पर नजर रखना जरूरी होगा।
  • महंगाई के आंकड़े –  11 मार्च को आने वाले अमेरिकी मुद्रास्फीति (CPI) के आंकड़े फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को प्रभावित करेंगे।

​आज का दिन शेयर बाजार के लिए “उम्मीद की किरण” लेकर आया है। कच्चे तेल में गिरावट ने भारत जैसे देश को महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत दी है जबकि ट्रंप के बयानों ने वैश्विक स्तर पर युद्ध के डर को कम किया है। निवेशकों के लिए सलाह है कि वे बाजार में उत्साह के साथ-साथ सावधानी भी बरतें और गुणवत्तापूर्ण शेयरों (Blue-chip stocks) में निवेश बनाए रखें।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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