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देशभर में 5 दिन बाद कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई फिर से शुरू सरकार ने कहा घबराकर बुकिंग न करें 

देशभर में 5 दिन बाद कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई फिर से शुरू सरकार ने कहा घबराकर बुकिंग न करें 
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 15, 2026 10:27 अपराह्न
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भारत में कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की आपूर्ति और कचरे से बनी गैस (CBG) के उपयोग को लेकर हालिया घटनाक्रम ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़े बदलाव का संकेत है

पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली सप्लाई बाधित होने के कारण भारत में LPG के आयात पर गहरा असर पड़ा है।भारत अपनी जरूरत का लगभग 62% LPG आयात करता है। सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए घरेलू सिलेंडर की सप्लाई को ‘प्रायोरिटी’ पर रखा है।

केंद्र सरकार ने घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो) की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 9 मार्च 2026 को एक आदेश जारी किया, जिसके तहत रिफाइनरियों को पूरा उत्पादन घरेलू उपयोग के लिए भेजने का निर्देश दिया गया। इस वजह से व्यावसायिक उपयोग वाले नीले सिलेंडरों की सप्लाई अस्थायी रूप से लगभग 29-30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आंशिक या पूर्ण रूप से प्रभावित हुई।

कमर्शियल LPG सिलेंडर की आपूर्ति और वर्तमान स्थिति

​पिछले कुछ दिनों से देशभर के कई हिस्सों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत देखी जा रही है। हालांकि, सरकार और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने स्पष्ट किया है कि अब आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह से बहाल हो गई है।

वर्तमान स्थिति 

​ताजा अपडेट (14-15 मार्च 2026) के अनुसार सरकार ने अब धीरे-धीरे सप्लाई बहाल करना शुरू कर दिया है

  • सप्लाई बहाली – 14 मार्च तक करीब 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीमित मात्रा (औसत मासिक खपत का 20%) में कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति फिर से शुरू की गई है।
  • सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य –  शुरुआत में महाराष्ट्र (खासकर मुंबई और पुणे), कर्नाटक (बेंगलुरु), दिल्ली, केरल, गुजरात (सूरत), पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में होटल-रेस्टोरेंट और छोटे उद्योगों को भारी किल्लत का सामना करना पड़ा।

​आपूर्ति बहाल होने का मुख्य कारण

​रसद (Logistics) और परिचालन संबंधी कुछ तकनीकी कारणों से पिछले 5 दिनों से वितरण में कुछ बाधाएं आई थीं। सरकार ने अब तेल कंपनियों को प्राथमिकता के आधार पर होटलों, रेस्टोरेंट्स और औद्योगिक इकाइयों तक सिलेंडर पहुँचाने के निर्देश दिए हैं।

​ “पैनिक बुकिंग” न करने की सलाह

​पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे घबराकर बुकिंग (Panic Booking) न करें।

  • स्टॉक की उपलब्धता-  सरकार के अनुसार देश में पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है।
  • कालाबाजारी पर रोक –  पैनिक बुकिंग से बाजार में कृत्रिम कमी पैदा होती है जिसका फायदा बिचौलिए उठा सकते हैं।
  • सुचारू वितरण – यदि उपभोक्ता केवल जरूरत के अनुसार बुकिंग करेंगे तो वितरण प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा।

होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर प्रहार

​यह क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुआ है क्योंकि यह पूरी तरह से 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडरों पर निर्भर है।

  • बंदी की कगार – मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे शहरों में लगभग 30-40% छोटे रेस्टोरेंट और होटल या तो बंद हो गए हैं या सीमित घंटों के लिए काम कर रहे हैं।
  • मेन्यू में कटौती –  कई रेस्टोरेंट्स ने ऐसे व्यंजन हटा दिए हैं जिन्हें बनाने में ज्यादा आंच या समय लगता है (जैसे तंदूरी आइटम या लंबी कुकिंग वाली डिशेज)।
  • लागत में वृद्धि – सप्लाई कम होने से ब्लैक मार्केट में सिलेंडर की कीमतें 4,000 रुपये तक पहुँच गई हैं, जिससे खाने की थाली महंगी हो रही है।

​ एमएसएमई (MSME) और लघु उद्योग

​बेकरी, नमकीन फैक्ट्री और छोटे खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) इकाइयां गैस न मिलने के कारण ठप पड़ रही हैं।

  • वैकल्पिक ईंधन – सरकार ने अस्थायी रूप से बायोमास, केरोसीन और कोयले के उपयोग की अनुमति दी है, लेकिन अचानक स्विच करना छोटे उद्योगों के लिए तकनीकी और आर्थिक रूप से कठिन है।
  • उत्पादन में गिरावट –  स्टील और अन्य मेटल इंडस्ट्रीज जो प्रोपेन या LPG का उपयोग करती हैं, उनके उत्पादन चक्र (Production Cycle) में देरी हो रही है।

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दिल्ली-NCR –  होटल और रेस्टोरेंट्स के लिए कचरे से बनी गैस (CBG)

​एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए सरकार ने दिल्ली-NCR के होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को कचरे से बनी गैस (Compressed Biogas – CBG) के इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। यह कदम प्रदूषण नियंत्रण और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।

​क्या है कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG)?

​CBG का उत्पादन जैविक कचरे जैसे कृषि अवशेष, नगरपालिका के ठोस कचरे, गन्ने की प्रेस मड और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के कचरे से किया जाता है। इसे शुद्ध करके इसमें मीथेन की मात्रा बढ़ाई जाती है जिससे यह ऊर्जा के मामले में व्यावसायिक एलपीजी के बराबर हो जाती है।

​व्यापारियों के लिए इसके लाभ

लाभ के प्रकारविवरण
लागत में कमीCBG आमतौर पर कमर्शियल एलपीजी की तुलना में 10-15% सस्ती होती है।
स्थिर आपूर्तियह स्थानीय स्तर पर कचरे से बनती है, इसलिए वैश्विक तेल कीमतों का इस पर असर कम होता है।
पर्यावरण अनुकूलयह कार्बन उत्सर्जन को कम करती है, जो दिल्ली-NCR जैसे प्रदूषित क्षेत्रों के लिए वरदान है।
अपशिष्ट प्रबंधनशहरों का कचरा ऊर्जा में बदल जाता है, जिससे लैंडफिल का बोझ कम होता है।

सरकार की रणनीति और ‘सतत’ (SATAT) योजना

​सरकार SATAT (Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation) योजना के तहत बायो-गैस के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। दिल्ली-NCR में इसे लागू करने के पीछे मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  • जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना – भारत अपनी गैस जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। स्वदेशी CBG इसे कम करेगा।
  • प्रदूषण पर प्रहार – दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले प्रदूषण को देखते हुए, क्लीन फ्यूल का उपयोग अनिवार्य होता जा रहा है।
  • व्यापारियों को प्रोत्साहन-  सरकार उन रेस्टोरेंट्स को सब्सिडी या टैक्स में छूट देने पर विचार कर सकती है जो पूरी तरह से हरित ऊर्जा (Green Energy) पर शिफ्ट होंगे।

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​व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए मुख्य निर्देश

​यदि आप दिल्ली-NCR में एक रेस्टोरेंट या होटल चलाते हैं तो आपको निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए

  • अधिकृत वेंडर –  केवल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त CBG प्लांट और वितरण केंद्रों से ही गैस का अनुबंध करें।
  • उपकरणों की जाँच –  CBG के लिए बर्नर और पाइपलाइन में मामूली बदलाव की आवश्यकता हो सकती है जिसे प्रमाणित विशेषज्ञों से ही करवाएं।
  • सुरक्षा मानक –  चूंकि यह गैस भी अत्यधिक ज्वलनशील है इसलिए एलपीजी की तरह ही सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है।

नोट – सरकार ने स्पष्ट किया है कि एलपीजी की कमी अस्थायी थी लेकिन भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए CBG जैसे विकल्पों को अपनाना ही एकमात्र स्थायी समाधान है।

बुकिंग के बीच अनिवार्य अंतर (Minimum Booking Gap)

​सरकार ने “पैनिक बुकिंग” और जमाखोरी को रोकने के लिए अब दो बुकिंग के बीच का समय बढ़ा दिया है

  • शहरी क्षेत्रों (Urban Areas) में – अब कम से कम 25 दिनों का अंतर अनिवार्य है। (पहले यह 21 दिन था)।
  • ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों (Rural Areas) में – अब यह अंतर बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है।

आपूर्ति फिर से शुरू होने से व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है। वहीं कचरे से बनी गैस की अनुमति ने दिल्ली-NCR के व्यापार जगत के लिए एक नया और किफायती रास्ता खोल दिया है। यह कदम न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है बल्कि धरती को बचाने की दिशा में भी एक बड़ी पहल है।
 

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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