अमेरिका इजरायल के साथ ईरान के युद्ध का असर साफ तौर पर भारत पर भी दिख रहा है। हार्मोज की खाड़ी में भारत के लगभग 22 शिप फंसे होने के कारण समय से शिप भारतीय तटों तक नहीं पहुंच पा रहा है। जिससे पेट्रोलियम कंपनी तक पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल नहीं पहुंच पा रहे है। जहां अमेरिका ने 5 दिन का युद्ध विराम कर दिया है वही ईरान अपने तेवर बदलने को तैयार नहीं है। ईरान साफ तौर पर कह रहा है कि हम अपने सुप्रीम लीडर का बदला लेंगे। अमेरिका पर बाकी खाड़ी देशों व अन्य देशों का भी दबाव देखने को मिल रहा है।
पेट्रोल डीजल न मिल पाना अफवाह या सरकार की कमी
जब से ईरान-इजरायल युद्ध हुआ है, तब से पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कमी साफ देखने को मिल रही है। अमेरिका भी साफ पूरी तरह से दवाब झेल रहा है। नाटो ने भी अमेरिका की सहायता करने से साफ मदद कर दी है। वही ब्रिटेन, चीन जैसे विकसित देशों ने भी अमेरिका के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। युद्ध का असर भारत के कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कमी के रूप में देखने को मिला। जहां कई उपभोक्ता सुबह से अपने काम के लिए निकल जाते है तो उन्हें अपने वाहन में पेट्रोल डीजल की जरूरत होती है अगर उन्हें वही नहीं मिल पाएगा तो वह कैसे रोज अपने काम पर जा सकेंगे।
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भारत के इन शहरों में हुई पेट्रोल डीजल की कमी
भारत के मुख्य शहरों में पेट्रोल-डीजल की कमी देखने को मिली; उनमें गुजरात के सूरत, अहमदाबाद, गांधीनगर। कर्नाटक में बैगलोर, मध्यप्रदेश में भोपाल, इंदौर, जबलपुर। उत्तराखंड के कई शहर भी इस स्थिति में उलझते दिखे। लोग सुबह से ही पेट्रोल पंप में लंबी लाइनें लगाते दिखे। खासकर बड़े बड़े ट्रक के खड़े रहने से लाइन और भी लंबी होती दिखी। लोग ऐसी स्थिति में असंमजस की स्थिति में दिखे।
आखिर क्यों हो रही पेट्रोल डीजल की कमी
जब ग्राहकों ने पेट्रोलियम कंपनी से सवाल जवाब किया तो मालूम चला कि जहां से पेट्रोल डीजल एक्सपोर्ट होता है वहां से सही समय में तेल आ ही नहीं पा रहा। एक कारण यह भी है कि अधिकतम पेट्रोल पंप जो तेल आता है उनको आधा पेमेंट तेल लेने के बाद देते है और आधा पेमेंट रोक देते है। फिर वो आधा पेपेंट बाद में देते है जब अगला स्टॉक आता है। लेकिन कई पेट्रोल पंपों ने ग्राहकों के गुस्से को देखते हुए पेमेंट एडवांस करने का फैसला किया। एडवांस पेमेंट होने से तेल सही समय पर और सबसे पहले मिलता है।
सरकार का रुझान
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां लोकसभा और राज्यसभा दोनों में यह बयान दिया कि अमेरिका इजरायल का ईरान के साथ युद्ध का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर देखने को नहीं मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस कठिन परिस्थिति में भारत के प्रत्येक नागरिक का देश के साथ खड़ा रहना बहुत जरूरी है। पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक भारत के पास है। आने वाले समय में और भी शिप भारतीय तट पर आ जाएंगे, जिससे और भी मात्रा में तेल कंपनियों को मिलेगा। वही विपक्ष प्रधानमंत्री को घेरता दिखा।
राहुल गांधी ने जहां एक जगह अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री जहां भारत को विश्वगुरु बनाने की बात कर रहे है वहीं देश तेल की किल्लत से जूझ रहा है। प्रधानमंत्री ने लोकसभा में अपने संबोधन में एक बार भी अमेरिका का नाम नहीं लिया। इसका साफ मतलब है कि प्रधानमंत्री डोनाल्ड ट्रंप के इशारे पर काम कर रहे है।







