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Middle East में अमेरिका-इजराइल और Rजंग के चलते श्रीलंका में पेट्रोल-डीजल की कीमतों बढ़ोतरी 

Middle East में अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते श्रीलंका में पेट्रोल-डीजल की कीमतों बढ़ोतरी 
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 23, 2026 7:07 अपराह्न
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Middle East में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ विशेष रूप से श्रीलंका जैसे आयात-निर्भर देशों को झकझोर कर रख दिया है।श्रीलंका में पिछले दो हफ्तों में दूसरी बार ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है

​श्रीलंका ईंधन संकट 2026 – Middle East संघर्ष का प्रभाव

​मार्च 2026 की शुरुआत से ही मध्य पूर्व में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव एक युद्ध का रूप ले चुका है। इस युद्ध के कारण दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति धमनी, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के प्रभावित होने की खबरों ने वैश्विक तेल बाजारों में हड़कंप मचा दिया है। श्रीलंका जो अपनी ईंधन जरूरतों के लिए 100% आयात पर निर्भर है इस वैश्विक उथल-पुथल का सबसे ताजा शिकार बना है।

पिछले दो हफ्तों में यह दूसरी बार है जब सरकार ने ईंधन की कीमतों में इजाफा किया है। ताजा बढ़ोतरी रविवार 22 मार्च 2026 को की गई जिसमें कीमतों में 25% तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

नई कीमतें और वृद्धि का विवरण

श्रीलंका की सरकारी तेल कंपनी सीलोन पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (CPC) ने नई दरों को प्रभावी किया है। पिछले दो हफ्तों में हुई दो क्रमिक वृद्धियों के बाद कीमतों का चार्ट कुछ इस प्रकार है

ईंधन का प्रकारपुरानी कीमत (15 मार्च से पहले)पिछली वृद्धि (मध्य मार्च)नई कीमत (22 मार्च 2026 से)कुल वृद्धि (%)
पेट्रोल 92 ऑक्टेनरु. 293रु. 317रु. 398~35.8%
पेट्रोल 95 ऑक्टेनरु. 341रु. 365रु. 455~33.4%
ऑटो डीजलरु. 281रु. 303रु. 382~35.9%
सुपर डीजलरु. 329रु. 353रु. 443~34.6%
मिट्टी का तेल (Kerosene)रु. 182रु. 195रु. 255~40.1%

​नोट – ये कीमतें श्रीलंका के इतिहास में डीजल की अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि मानी जा रही हैं।

कीमतों में इस भारी वृद्धि के मुख्य कारण

  • ​ अमेरिका-इजराइल और ईरान संघर्ष – ​मध्य पूर्व (West Asia) में जारी युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को तहस-नहस कर दिया है। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई और उसके जवाब में ईरान द्वारा ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को बंद करने की चेतावनी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। दुनिया का लगभग 20% तेल इसी मार्ग से गुजरता है।
  • ​आयात पर पूर्ण निर्भरता – ​श्रीलंका अपनी ईंधन जरूरतों के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। देश अपनी रिफाइनरी के लिए कच्चा तेल मुख्य रूप से मध्य पूर्व से मंगवाता है और तैयार पेट्रोलियम उत्पाद सिंगापुर व दक्षिण कोरिया जैसे देशों से आयात करता है। आपूर्ति मार्ग में व्यवधान और डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई रुपए की अस्थिरता ने लागत को बढ़ा दिया है।
  • ​खपत कम करने की रणनीति – ​सरकार का मानना है कि कीमतों में वृद्धि से ईंधन की खपत में 15% से 20% तक की कमी आएगी। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने पहले ही चेतावनी दी थी कि देश को एक लंबे संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए जो श्रीलंका की ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।

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​आम जनता और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

  • परिवहन संकट – डीजल की कीमतों में 26% की ताजा वृद्धि ने बस ऑपरेटरों को संकट में डाल दिया है। लंका प्राइवेट बस ओनर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि किराए में तत्काल 15% की वृद्धि नहीं की गई तो 90% बसें सड़कों से हट जाएंगी। तीन-पहिया (Three-wheeler) टैक्सी चालकों ने भी पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के कारण अपने संचालन को असंभव बताया है।
  • खाद्य मुद्रास्फीति (Inflation) – ​श्रीलंका में माल ढुलाई का मुख्य माध्यम डीजल से चलने वाले ट्रक हैं। ईंधन महंगा होने से सब्जियों, खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में 10% से 20% तक की तत्काल वृद्धि देखी जा रही है।

बिजली संकट की आशंका – ​श्रीलंका अपनी बिजली उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा कोयले और डीजल जनरेटरों से प्राप्त करता है। ईंधन की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण देश में फिर से बिजली कटौती (Power Cuts) का डर पैदा हो गया है।

​सरकारी कदम – राशनिंग और 4-दिन का कार्य सप्ता

​बढ़ते संकट को देखते हुए राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की सरकार ने कुछ कड़े कदम उठाए हैं

  • ​ईंधन राशनिंग –  वाहनों के लिए साप्ताहिक कोटा फिर से लागू कर दिया गया है।
  • ​QR कोड प्रणाली –  2022 की तरह ही ईंधन वितरण के लिए QR कोड आधारित प्रणाली को अनिवार्य किया गया है।
  • ​4-दिवसीय कार्य सप्ताह-  ईंधन की खपत कम करने के लिए सरकारी दफ्तरों में कामकाज के दिनों को घटाने पर विचार किया जा रहा है ताकि सड़कों पर आवाजाही कम हो।

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भविष्य की चुनौतियां 

​यदि मध्य पूर्व का युद्ध और लंबा खिंचता है, तो श्रीलंका को अपनी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से ठप होने से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) या मित्र देशों भारत और चीन से अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है। सरकार का लक्ष्य वर्तमान कीमतों के माध्यम से ईंधन की खपत में 15% से 20% की कमी लाना है ताकि विदेशी मुद्रा भंडार को बचाया जा सके।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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