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उपभोक्ता के यह हैं अधिकार- जानिए कहां कर सकते हैं शिकायत और क्या है कानून

उपभोक्ता के यह हैं अधिकार- जानिए कहां कर सकते हैं शिकायत और क्या है कानून
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 10, 2026 8:47 अपराह्न
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डेलीबार्ता।आज का उपभोक्ता केवल वस्तु या सेवा खरीदने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नागरिक भी है। बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, ऑनलाइन खरीदारी, निजी सेवाओं के विस्तार और विज्ञापनों की भरमार के बीच उपभोक्ताओं का शोषण भी बढ़ा है। गलत बिलिंग, घटिया सामान, भ्रामक विज्ञापन, गारंटी-वारंटी में धोखाधड़ी और सेवाओं में लापरवाही जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी हर नागरिक के लिए आवश्यक हो जाती है। भारत में उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए स्पष्ट कानून मौजूद हैं, जिनके तहत उपभोक्ता अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है और न्याय पा सकता है।

कौन कहलाता है उपभोक्ता?

उपभोक्ता वह व्यक्ति होता है जो किसी वस्तु या सेवा को मूल्य देकर खरीदता है और उसका उपयोग व्यक्तिगत या घरेलू उद्देश्य से करता है। यदि कोई व्यक्ति वस्तु या सेवा को पुनः बिक्री या व्यावसायिक लाभ के लिए खरीदता है, तो सामान्यतः वह उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता। हालांकि स्वरोजगार के लिए खरीदी गई वस्तुएं कई मामलों में उपभोक्ता कानून के अंतर्गत आती हैं।

भारत में उपभोक्ता संरक्षण कानून

भारत में उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 लागू है, जिसने पुराने 1986 के कानून को प्रतिस्थापित किया। यह कानून उपभोक्ताओं को त्वरित, सस्ता और प्रभावी न्याय प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है। इस अधिनियम में ई-कॉमर्स, ऑनलाइन सेवाएं, डिजिटल भुगतान और भ्रामक विज्ञापनों जैसे आधुनिक पहलुओं को भी शामिल किया गया है।

जानिये क्या है उपभोक्ता के प्रमुख अधिकार

उपभोक्ता को ऐसे वस्तुओं और सेवाओं से सुरक्षा का अधिकार है जो उसके जीवन और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती हैं। खाद्य पदार्थ, दवाइयां, गैस सिलेंडर, बिजली उपकरण जैसी चीजों में सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। इसके साथ ही उपभोक्ता को किसी भी वस्तु या सेवा की गुणवत्ता, मात्रा, शुद्धता, कीमत, निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट, जोखिम और उपयोग की शर्तों की पूरी जानकारी पाने का अधिकार है, ताकि वह सही निर्णय ले सके। 

वहीं उपभोक्ता को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर विभिन्न विकल्पों में से चयन करने का अधिकार है। जबरन कोई वस्तु या सेवा थोपना, बंडलिंग या विकल्प छीनना इस अधिकार का उल्लंघन माना जाता है। साथ ही उपभोक्ता को अपनी शिकायत, समस्या या असंतोष को उचित मंच पर रखने और उस पर विचार किए जाने का अधिकार है। कंपनियों और सेवा प्रदाताओं को उपभोक्ता की शिकायत सुननी और समाधान करना होता है। यदि उपभोक्ता को घटिया सामान या दोषपूर्ण सेवा मिलती है, तो उसे मुआवजा, वस्तु की मरम्मत, बदलवा या धनवापसी का अधिकार है। उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और कानूनी उपायों के बारे में जागरूक करने का अधिकार भी कानून में शामिल है।

अधिकारों के साथ यह है उपभोक्ता के कर्तव्य

उपभोक्ता अधिकारों के साथ-साथ कुछ कर्तव्य भी हैं, जैसे खरीदारी करते समय बिल और रसीद लेना उत्पाद की जानकारी पढ़ना। गलत या अवैध गतिविधियों की शिकायत करना,अफवाहों और भ्रामक विज्ञापनों से बचना इत्यादि।

उपभोक्ता शिकायत कहां और कैसे करें

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन-उपभोक्ता टोल-फ्री नंबर 1915 पर कॉल कर शिकायत दर्ज करा सकता है। यह हेल्पलाइन केंद्र सरकार द्वारा संचालित है और प्रारंभिक स्तर पर समाधान का प्रयास करती है। ऑनलाइन 

शिकायत पोर्टल-उपभोक्ता ई-दाखिल प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसमें घर बैठे दस्तावेज अपलोड कर मामला दर्ज किया जा सकता है। 

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग –यदि शिकायत की राशि निर्धारित सीमा के भीतर है, तो उपभोक्ता अपने जिले के उपभोक्ता आयोग में मामला दर्ज कर सकता है। यह मंच स्थानीय स्तर पर त्वरित सुनवाई के लिए जाना जाता है। बड़े मामलों या जिला आयोग के फैसले के खिलाफ अपील राज्य आयोग में की जा सकती है। उच्च मूल्य के मामलों और राज्य आयोग के आदेश के विरुद्ध अपील राष्ट्रीय आयोग में की जाती है।

शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया – आवश्यक दस्तावेज

किसी भी उपभोक्ता को शिकायत दर्ज करानें को लेकर कई दस्तावेज की भी आवश्यकता होती है। जो उपभोक्ता के पास होना आवश्यक होता है। इनमें खरीद का बिल या रसीद,वारंटी/गारंटी कार्ड, संबंधित पत्राचार या ई-मेल,पहचान पत्र,समय सीमा शामिल है।सामान्यतः उपभोक्ता को घटना या सेवा में कमी के दो वर्ष के भीतर शिकायत दर्ज करनी होती है।

ई-कॉमर्स और ऑनलाइन खरीदारी में उपभोक्ता अधिकार

ऑनलाइन खरीदारी में उपभोक्ताओं को विशेष सुरक्षा दी गई है। ई-कॉमर्स कंपनियों को विक्रेता की जानकारी, रिटर्न-रिफंड नीति, डिलीवरी शर्तें और शिकायत निवारण अधिकारी का विवरण देना अनिवार्य है। फर्जी रिव्यू, भ्रामक छूट और गलत जानकारी पर दंड का प्रावधान है।

भ्रामक विज्ञापन और दंड का ‌प्रावधान

यदि कोई कंपनी झूठे दावे या भ्रामक विज्ञापन करती है, तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उस पर जुर्माना, विज्ञापन पर रोक और जिम्मेदार व्यक्ति पर कार्रवाई हो सकती है। सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट के मामलों में भी जवाबदेही तय की गई है।

उपभोक्ता आयोग की शक्तियां

उपभोक्ता आयोग को सरकार नें कई शक्तियां दी है, उपभोक्ता के पक्ष मेम निर्णय आनें पर आयोग चाहे तो मुआवजा दिला सकता है,वस्तु बदलने या धनवापसी का आदेश दे सकता है।सेवा में सुधार के निर्देश दे सकता है। साथ ही  जुर्माना और दंड लगा सकता है।

उपभोक्ता जागरूकता का क्या है महत्व

कानून तभी प्रभावी होता है जब उपभोक्ता जागरूक हों। जागरूक उपभोक्ता न केवल अपने अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि बाजार को भी ईमानदार और प्रतिस्पर्धी बनाता है। “जागो ग्राहक जागो” जैसे अभियान इसी उद्देश्य से चलाए जा रहे हैं।

हर नागरिक के सुरक्षा की ढ़ाल

आज के समय में उपभोक्ता अधिकार केवल कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि हर नागरिक की सुरक्षा की ढाल हैं। यदि उपभोक्ता अपने अधिकारों को समझे, दस्तावेज सुरक्षित रखे और गलत होने पर शिकायत दर्ज करे, तो शोषण पर रोक लगाई जा सकती है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 ने उपभोक्ताओं को मजबूत मंच दिया है। जरूरत सिर्फ जागरूकता और सही समय पर सही कदम उठाने की है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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