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तलाक के बाद पत्नी को गुजारा भत्ता देने से बचने के लिए सिंगापुर के एक व्यक्ति ने करोड़ों की नौकरी छोड़ी करीब 8.60 लाख सिंगापुर डॉलर की

तलाक के बाद पत्नी को गुजारा भत्ता देने से बचने के लिए सिंगापुर के एक व्यक्ति ने करोड़ों की नौकरी छोड़ी करीब
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 20, 2026 7:17 अपराह्न
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सिंगापुर के इस चर्चित कानूनी मामले ने पारिवारिक कानून और नैतिक जिम्मेदारी की बहस को दुनिया भर में हवा दी है। यह मामला एक ऐसे व्यक्ति का है जिसने अपनी पूर्व पत्नी को गुजारा भत्ता (Alimony/Maintenance) देने से बचने के लिए अपनी उच्च वेतन वाली नौकरी ही छोड़ दी।

केस की पृष्ठभूमि – एक सफल करियर और टूटता रिश्ता

यह मामला सिंगापुर के एक पेशेवर व्यक्ति का है जो एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में बेहद उच्च पद पर कार्यरत था। उसकी वार्षिक आय लगभग 8.60 लाख सिंगापुर डॉलर (भारतीय रुपयों में करीब 5.5 करोड़ रुपये से अधिक) थी। पति और पत्नी की शादी कई वर्षों तक चली, जिससे उनके बच्चे भी थे।

हालाँकि, कुछ समय बाद पति के दूसरी महिला के साथ संबंध बन गए। उसने अपनी पहली पत्नी और बच्चों को छोड़ दिया और अपनी नई पार्टनर के साथ रहने लगा। इसके बाद पत्नी ने तलाक और भरण-पोषण (Maintenance) के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।

नौकरी छोड़ने का फैसला –  क्यों और कैसे?

जब सिंगापुर की अदालत ने पति की विशाल आय को देखते हुए पत्नी और बच्चों के लिए एक मोटी गुजारा भत्ता राशि तय करने का संकेत दिया, तो पति ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया। उसने अपनी करोड़ों की नौकरी से इस्तीफा दे दिया।

उसके तर्क,  उसने अदालत में दावा किया कि वह “तनाव” (Stress) में है और अब काम जारी रखने में असमर्थ है।

उसने तर्क दिया कि चूँकि अब उसके पास कोई आय नहीं है, इसलिए वह पत्नी को गुजारा भत्ता देने की स्थिति में नहीं है।

अदालत का कड़ा रुख – ‘जानबूझकर बेरोजगारी’

सिंगापुर की फैमिली कोर्ट ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया। अदालत ने पाया कि पति ने नौकरी किसी वाजिब कारण से नहीं, बल्कि कानूनी जिम्मेदारी से बचने के लिए छोड़ी थी।

कोर्ट के मुख्य आदेश और टिप्पणियाँ

  • क्षमता बनाम वास्तविकता –  कोर्ट ने कहा कि गुजारा भत्ता केवल वर्तमान आय पर नहीं, बल्कि व्यक्ति की ‘कमाने की क्षमता’ (Earning Capacity) पर आधारित होता है।
  • दंडात्मक टिप्पणी –  न्यायाधीश ने कहा कि एक पिता और पति के रूप में अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए जानबूझकर बेरोजगार होना कानून का अपमान है।
  • आदेश –  कोर्ट ने उसे आदेश दिया कि भले ही उसने नौकरी छोड़ दी हो, उसे अपनी पिछली आय के स्तर के आधार पर ही भुगतान करना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह अपनी संपत्ति बेचकर या अन्य संसाधनों से इस राशि का भुगतान करे।

वर्तमान स्थिति –  वह अब कहाँ है?

क्या उसने देश छोड़ दिया? शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, उसने सिंगापुर छोड़ने और अपनी नई साथी के साथ कहीं और बसने की कोशिश की थी, लेकिन कानूनी बाधाओं और वित्तीय देनदारियों के कारण वह पूरी तरह से गायब नहीं हो सका।

  • पत्नी और बच्चे – पत्नी वर्तमान में सिंगापुर में ही रह रही है और अपने बच्चों की परवरिश कर रही है। वह इस कानूनी लड़ाई को मजबूती से लड़ रही है ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहे।
  • दूसरी पत्नी –  वह व्यक्ति अभी भी अपनी दूसरी पार्टनर के साथ है, लेकिन उसकी वित्तीय स्थिति अब उतनी मजबूत नहीं रही जितनी नौकरी के दौरान थी, क्योंकि उस पर कानूनी देनदारियों का भारी बोझ है।

इस केस का महत्व 

यह मामला एक मिसाल बन गया है कि कोई भी व्यक्ति अपनी वित्तीय स्थिति को जानबूझकर खराब दिखाकर कानून को धोखा नहीं दे सकता। सिंगापुर का कानून स्पष्ट करता है कि बच्चों और पूर्व पत्नी का कल्याण प्राथमिक है, और “स्वेच्छा से बेरोजगारी” (Voluntary Unemployment) को ढाल नहीं बनाया जा सकता।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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